00:00भारत के प्रमुक गेहु उत्पादक राज्यों में रात का तापमान, दिन के तापमान की तुल्ना में अधिक तेजी से बढ़
00:05रहा है।
00:05जिसका असर सीथे गेहु की पैदावार, बुणवत्ता और किसानों की आपदरी पर बढ़ रहा है।
00:10अगले 20 वर्षों में भारत में जो उत्पादकता है खेतों की, जो क्रॉप इल्ड्स हैं, वो 30 प्रतिशत तक कम
00:19हो सकती हैं और आबादी 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।
00:22और ये सब जलवाई पर अरतन से, भाई फसलें एक खास प्रकार का तापमान मांगती हैं, एक खास अवधी में
00:29बारिश मांगती हैं, वो जितने भी क्लाइमेट पैटर्न्स थे, वो पूरे तरह से बदल रहे हैं, तो पौधे पर आप
00:35आग्या तो नहीं चला सकते, कि गेह�
00:40वो कहरा, भाई मुझे जैसा तापमान और बारिश चाहिए थी, और जैसी मुझे हवाई चाहिए थी, वो नहीं है तो
00:47मैं नहीं उगूँगा, और अबादी आपकी बढ़ गई है, और पैदावार आपकी गिर गई है, आप खाओगे क्या, आप नहीं
00:53खापाओगे, उसका �
00:54नतीजा यह होने वाला है, कि दुनिया के लगभग 120 करोड लोग हैं, जहने अपना घर छोड़ना पड़ेगा, ज्यादा तर
01:03उसमें भारत जैसे देशों के होगे, क्योंकि भारत में इरिगेशन से बहुत पैदावार नहीं होती है, बहुत हद तक अभी
01:12भी मॉनसून पर न
01:16दिरभर हैं कि एक खास टेंपरिचर डिफरेंस हो समुद्र की सतह और थल की सतह के बीच में, तो पहली
01:26बात तो तापमान ज्यादा है, तो पेड पौधे यह सब बड़े होने से इंकार करेंगे, न इन में अन लगेगा,
01:33न फल लगेंगे, न सबजियां लगेंगी, और दू
01:46पके में नहीं हो जाएगा यह सब कुछ, यह साल दर साल लगातार हो रहा है, मैं आपसे वही सारी
01:52बाते बोल रहा हूं जो UN और IPCC की रिपोर्ट्स में रोज सामने आ रही हैं, बस उन रिपोर्ट्स को
01:57हम पढ़ते नहीं हैं