00:00आचारेजी, वैष्विक संकट जो चल रहा है, वह इस वक्त जो हलात हम देख रहे हैं, बहुत सारे लोग यहां
00:05पर है जो आपको मानते हैं, आपकी बातों को सुनते हैं, अपने जीवन में बदलाओ भी लेकर आ रहे हैं।
00:09वैश्विक संकटों पर भी जनरूर जानना चाहेंगे, क्या आपकी समिराय है?
00:39फिर उसकी लहरें पूरा विश्व अनुभाव करता है, लेकिन वो जो वहाँ बम गिराया जा रहा है, वो बम वही
00:45है जिसका निर्माण हर घर में हो रहा है, ये भूल ना करें कदापे, कि सहाब हम तो शांतिपूर्ण हैं,
00:55लडाई तो कहीं और हो रही है, या कि लडाई तो �
00:59राष्ट्रों के बीच होती है, सीमा पर होती है, सीमाओं के उस तरफ और इस तरफ जो नागरिक रहते हैं,
01:04वो तो शांतिपूर्ण है, नहीं, नहीं, सीमाओं पर जो हो रहा है, यार ये जो ड्रोन घूम रहे हैं, ये
01:09जो बम वर्शा हो रही है, ये जो क्लाइमेट क्राइ
01:26वैसे ही कच्ड़े से भरी हमारी नदियां बह रही है हमने भीतर की हर्याली जैसे काट दिये वैसे हमारे पहाड़
01:34अब हर्याली से रिक्त हो चुके नंगे और सूने हो चुके है जैसे हमारे भीतर गंदगी गंदगी और धुवाई धुवाई
01:40है वैसे हमारी जो हवा है इसका
01:56झाल झाल
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