00:00घर के जवान लड़कियां जब हो जाती हैं, उनको बोलते हैं कि जो घर के ही पुरुष सदस्य हैं, उनके
00:05साथ भी एकांत और अधेरी जगों पर मत जाना बेटी
00:08क्योंकि आपराधिक वृत्ती उस पुरुष में है सदसे, वो तो जब प्रकाशित और भीड भाण वाली जगह रहती हैं, तो
00:15वहां उसकी आपराधिक वृत्ती दमित रहती हैं, दबी रहती हैं, पर गर उसको अधेरा मिल गया और एकांत मिल गया
00:21तो उसके भीतर का भेडिया
00:23सक्रिय हो जाएगा, तो थोड़ा जो हमारी रेज के घरोंदे हैं, इनको गिरने दीजिए, हमारी परी कथाओं को टूटने दीजिए,
00:31ना हम अच्छे आदमी हैं, ना हमारे आसपास कोई अच्छा आदमी है, अच्छा आदमी बस वो होता है, जिसने जान
00:37लिया कि हो कितना �
00:38बुरा है, ती को आत्मग्यान कहते हैं, यहां कोई अच्छा आदमी नी बैठा, यह जितने घूम रहे हैं, जो बड़े
00:43अच्छे बनते हैं, हाँ हाँ हाँ हाँ, आप कैसे हैं, हम कैसे हैं, जी आईए गले मिलें, सब भेडिये हैं,
00:48मौका मिलने की देर हैं बस, सब भेडिय
00:50बढ़ा प्राव साथा प्राव साथा अजड़ों
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