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This emotional ground report brings the heartbreaking stories of families who lost their children and are still struggling to cope with the pain. While time may have passed, the wounds remain fresh for many parents and relatives. Through on-ground conversations, we explore how these families are living today, what challenges they face, and how the loss has changed their lives forever. Watch this special report to understand the human side of an unimaginable tragedy.

HINDI Description
यह ग्राउंड रिपोर्ट उन परिवारों की दर्दभरी कहानी सामने लाती है, जिनके बच्चे अब इस दुनिया में नहीं हैं। समय जरूर बीत गया है, लेकिन अपनों को खोने का दर्द आज भी उनके दिलों में जिंदा है। आखिर आज किस हाल में हैं ये परिवार? कैसे कट रही है उनकी जिंदगी? बच्चों के जाने के बाद क्या बदला और किन मुश्किलों का सामना उन्हें रोज करना पड़ रहा है? हमारी टीम ने ग्राउंड पर पहुंचकर इन परिवारों से बात की और उनके दर्द को करीब से समझने की कोशिश की। देखिए यह भावुक कर देने वाली रिपोर्ट।

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00:00मुद्धों पर सबसे ज्यादा बात होनी चाहिए एक रफली डेटा मैं भी चेक कर रही थी मैंने आपका वो वीजो
00:05भी देखा जुसमें एक पेरिट एक मा पहुँची थी किसी बच्चे की जिनका बेटा ग्राजुएशन में था लेकिन उनका कहना
00:11था कि वो चब चीज हमारे
00:13घर में हो जाएगी तब क्या हम इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे तो इसी दौरान मैंने एक डेटा पढ़ा अभी जो
00:17एक महीने में है जिन बच्चों ने मौत को गले लगा लिया है इसी परिक्षा इसी पेपर लीक से दुखी
00:22होकर डिप्रेस्ड होकर वो संख्या तो ल
00:43बासट हजार से ज्यादा बच्चों ने मातर चार साल में मौत को गले लगाया है इस पर आप क्या कहेंगे
00:47शिविंद्र जी
00:49फैर जाटियका अब कहते है ना जिसके हाथ पे चिंगारी गिरती है उसकी जलन दो जानता है जूसरों के लिए
00:57होता है तो चिंगारी गिरी यह क्या होगा
00:59लेकिं निचा हम आप सब घर में रहते हैं कभी चाई बनाते समय कभी किसी की जड़ों में आग जिलाते
01:06समययं
01:06आज किमितारी गिरी है तो हम उसका दर्थ पता होता है
01:09जब जिसके घर का चिराग बुषता है
01:14जिसने अपने बेटे को
01:16कहते हैं पालों के पूठ तो पूजों के भूठ
01:19यह कहा बता हमने सुनी होगी
01:21जैनि कि जिसके बच्चे जब पलते हैं
01:24तो जब वो चोटे से बच्ची हो, बच्चा हो, उसको बुखार होता है, तो वो जो है इलाज किराने के
01:30लिए दाक्टरों के आगे हाथ पैर जोडते हैं, पैसे खर्च करते हैं, सब कुस्दाओं से लगा देते हैं, एक बच्चा
01:35एक साल, दो साल, तीन साल, शे साल, अज़ ज
01:51साल का 18 साल का 22 साल का युवा बनाते हैं, तहां कहां से बचाया होता है, उसको बिचारे, इस
01:58मजार, उस मंदिर, उस पंत्रे को उसके पास भी मत कर देखते हैं, गंडा तावीज भी बनाते हैं कि कुछ
02:04भी हो जाए मेरे बच्चे को पुछना हो, और जब उनके पास उन ब�
02:13जो बच्चे की लाग इठानी होती होगी, तो उसको बही माभाब बया कर सकते हैं, हमाब बया नहीं कर सकते
02:20रिचार, वो बहुत ही ददनाक होता है, 20 साल बच्चा कोई पाले, उसकी सहेच करे, उसके लिए गंडा तावीज बनाए,
02:30दबाए कराए, सब कुछ उसकी जिन्द
02:35भर की कमाई उसकी पढ़ाई में लगा दे, घर गिर्मी डाल दे, उसको बाग कर दे, उसके बाद में, उसके
02:41हाथ में उसकी बेटी की, उसके बेटे की लास आ जाए रिच्चा, इसको बया मैं तो नहीं कर सकता, विचार,
02:49बिलकुल शिवेंद जी आपने जो भी बाते कहीं,
02:53अगर ये सुनकर भी सिस्टम की आखे नहीं खुल रही है, उन परिवारों से पूछिए, जब से मैं हमने ये
02:58लाइव शुरू की है, हमने सबसे पहले उसी डेटा पर बात की, कि सिर्फ एक महीने में, सिर्फ इस पेपर
03:04लीग के वज़े से, सिर्फ इस एक नीज की लीग के �
03:0712 से 14 बच्चों ने अब तक बहुत को गले लगा लिया है, और बिल्कुल उन परिवारों से क्या सरकार
03:13ने संपर्क साधा है, क्या संपर्क में सरकार ने जाने की कोशिश की है, कि वो परिवार किस इस्तिथी में
03:19है, जब उनके घर का उनका बेटा, उनका बेटी अब इस द�
03:34तक बैठने के काबिल बनाती है, और फिर आता है सरकार और सिस्टम को संपर्क रखर ना है, उसकी वज़े
03:42से पेपर लीक हो जाता है, उसके बाद आता है, सरकार की नोटेंग की शुरू हो जाती है, Instagram की
03:49तो पार्टी है जो प्रोटेस्ट करिए, यह बंद करेंगे टेलीग्
03:52तो क्या टेलिग्राम बंद करने से पेपर लीग बच जाएगा जब टेलिग्राम नहीं था तो अब तब क्या पेपर लीग
03:58नहीं होता था देश में
03:59वीपिय नहीं है क्या दूसरे साइट्स नहीं है क्या इन से ज्यादा बुद्धी वाले तो वो वो लोग हैं जो
04:04पेपर लीग करा रहे हैं शिवेंद जी के टेलिग्राम बैंक करना सरकार सरकार के सिस्टेम पर रोग पाएगा
04:11मैं एक कड्स सुप्रिम पोट के वकील के पास जाने माने है वकील है वह लिए तो तो तब होगा
04:32तब होगा तब ही तो कोई बालेगा बाई
04:35बिल्कुल पेपर लीक अगर करना होगा तो उसके 50 सादन है रातो रात आज भी चला जाएगा दूसरे तमाम है
04:42मैसेजिंग आफ मैं नाम नहीं लेना चाहता देखिए उन्होंने किलियर कहा और उनकी वासे में सहमत भी हुआ उन्हें का
04:49जब हम कुछ कर नहीं पाते हैं तो करत
05:28करना चाहते हो यानि कि सरकार एकस दिखाना चाहती है लेकिन करना ही पा रही है तो यहीं सवाल मैं
05:34कहूंगा
05:35अगर मुझे माप करें सरकार के लोग भी सुन रहो तो मुझे यह एकसिन जो सवाल आपने पूछा है यह
05:42मुझे उस बंदर की तरह लगता है जो इस जाल
06:12तरफिश पर आप दिल्ली से बिहार या उतर प्रदेश जाने वाली किसी भी ट्रेन को अगर आप देख लीजेगा नहीं
06:18दिल्ली स्टेशन पर याननद वी आपने कहीं कवरेज किया है शिवेंजी खुद स्टेशन पर जाकर तो उन ट्रेनों की क्या
06:22सिति होती है लोग एक पर
06:25एक दस बीस लोग चड़के खड़े होते हैं शायद हम और आप उसमें बैठकर सास भी नहीं ले सकते हों
06:30वैसी स्थी में लोग ट्रावल करने को मजबूर है कि सरकार पैसे नहीं लेती है पहले तो आप अपना बेसिक
06:35फैसिलिटी सुधार नहीं पाते हैं लेकिन बड़े ब
06:51कपड़ा मकान और शिक्षा यह चार चीज़े हैं बहुत बेसिक हैं अभी इस देश में उसमें अगर रोटी कपड़ा किसको
06:59मिलेगा चलिए रोटी कपड़ा की तो बात ही अटा दीजिए देश में अगर मुकमरी और हंगर इंडेक्स देखा जाए तो
07:04एक अलग चिंदा का
07:05विशय हो जाएगा इसके लवा कपड़ा और मकान कपड़ा और मकान सरकारी अगर दस्तावेजों पर देखे तो हर घर योजना
07:12और प्रिधार मंतरी आवास और निवास की योजना है दिखेंगी लेकिन मिलती कितनी है इसके लवा शिक्षा शिक्षा पर जो
07:18की सबसे बड़
07:19अगर कोई भी परिवार बिलो पोवर्टी लाइन है और उस परिवार वो अपने बच्चे को पढ़ाता है पाई पाई जोड़
07:25कर खेती मजदूरी करकर पढ़ाता है उसके बाद जब वो परिक्षा तक पहुशता है उसका बच्चा उसका पेपर लीग हो
07:31जाता है अब तक �
07:32उस बच्चे पर जो लाखो रुपए उस पेरिट ने खर्च किये थे वो एक मिनट में मिट्टी पलेत हो जाता
07:37है और जब वो बच्चा शिक्षा के उसका गार पर आकर फेलियर महसूस करता है फिर वो बच्चा अपने जान
07:44को भी छोड़ देता है यानि की मौत को गले लग
07:47लेता है फिर आती है सरकार की जवाब देही वहाँ पर सरकार मूख दर्शक बन जाती है क्या सरकार को
07:52खबर नहीं हो रही होगी कितने बच्चों ने कितने परिवार हैं जो इस पेपर लीक के वज़े से सफर कर
07:57रहे हैं क्या एक शिक्षा मंतरी उन 15-14 बच्चों के आगे ज
08:15दिमदारी लेनी नहीं चाहिए ये कौकरोच क्या गलक मांगे कर रहे हैं सिर्फ चीखने चिलाने से नहीं होता है अगर
08:22आप ध्यान दीजिएगा सरकार का ही ये फेलियर है जो अब तक सरकार को जो काम खुद करना चाहिए उस
08:28काम को करवाने के लिए आज हजारों यूवा �
08:31जंतरमंतर पहुंचे हैं और वीज्वल्स जो आप अभी थोड़ी देर में प्रोटेस्ट शुरूओ अनवाला है जो भी नए दर्शक हमारे
08:39साथ जूट रहे हैं उन दर्शकों को हम बता दें कि बिल्कुल हम लाइफ दिखा रहे हैं आपको इस वक्त
08:43जंतरमंतर का प्रोट
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