00:00इरान और अमेरिका के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। कई दौर की बापचीत, कई देशों की मध्यस्तता और
00:06बार-बार युद्ध विराम की कोशिशों के बावजूद दूनों देशों के बीच स्थाई शांती समझोता आज तक नहीं हो सका।
00:13इसकी एक बड़ी वज़े सर्फ इरान का परवाणू कारेकरम नहीं है, बलकि मध्यपुर्व में फैला उसका व्यापक प्रभाव भी है।
00:21जब भी इस्राइल लेबनान में हिजबुल्ला पर हमले तेज करता है, जब भी अमेरिकी से ना इराक या सीरिया में
00:28अपने ठीकानों
00:29को मजबूत करती हैं, तब सवाल उड़ता है कि आखिर इरान इतने बड़े विरोध के बावजूद अपने प्रभाव को कैसे
00:36बनाए रखता है? क्या आपने कभी सोचा है कि छेत्रपल और सैने ताकत के लिहाज से अमेरिका से कहीं छोटा
00:42इरान आखिर किस भरोसे दुनिया
00:57की ढाल सिर्फ हिजबुल्ला है, तो ठहरिए. क्योंकि इसका जवाब सिर्फ लेबनान का हिजबुल्ला नहीं है. इसके पीछे इराग में
01:04मौजूद कई ऐसे शिया सशेस्तर समोह हैं, जो वर्षों से इरान के सबसे भरोसे मंद सहयोगी माने जाते हैं. और
01:11जब भी इरान �
01:12पर हमला होता है, ये सब ही इरान के लिए गुप्त तरीके से लड़ाई लड़ते हैं. इन समोहों को समझना
01:18इसलिए भी जरूरी है क्योंकि मध्यपुर्व में लाखो भारतिया काम करते हैं. खाडी देशों में रहने वाले भारतियों की सुरक्षा,
01:25वहां की स्थीर्ता और
01:26शेत्र में होने वाला हर बड़ा संघर्ष भारत की अर्थववस्था, तेल की कीमतों और विदेश नीती को प्रभावित करता है.
01:33तो आए जानते हैं कि आखिर कौन है ये इराक के समूव, ये कैसे बने, इन्हें कौन फंड करता है,
01:41इरान के लिए ये इतने महत्वपुर्�
01:46शान्ती और संघर्ष दोनों की दिशात तै करने की उप्षमता रखते हैं. नमस्कार, मेरा नाम है रिचा पराश्वर और आप
01:52देख रहे हैं, वानिट याहिन. इराक में इरान के प्रभाव की सबसे बड़ी ताकत Popular Mobilization Forces यानी की PMF
01:59है. अर्भी में इसे अलहश्द, अलशा�
02:03ये कोई एक संघठन नहीं, बलकि लगभग 50 से 70 अलग-अलग सशस्त्र समूहों का एक छत्र माना जाता है.
02:10इन सभी की विचारधारा, नित्रतों और प्राथमिक्ताएं अलग हो सकती हैं. लेकिन इनमें से कई गुट एरान के बेहत करीब
02:17माने जाते हैं. यही वज़ा है कि
02:20विशिशक ये अकसर कहते हैं कि इराक के भीतर सिर्फ सरकारी सेना ही नहीं, बलकि एक समनांतर सैन्य और राजुनितिक
02:27शक्ती भी मौजूद है. सबसे प्रभाविशाली समूह कौन-कौन हैं? चलिए आपको एक कुरी लिस्ट बताते हैं. इसमें सबसे उपर
02:32है बद्र और्
02:36इरान समर्थक संगठनों में गिना जाता है. 1980 के दशक में जब इरान और इराक के बीच युद्ध चल रहा
02:42था, उसी दोरान इस संगठन की निव पड़ी. वर्षव बाद ये किवल एक सश्यस्त्र संगठन नहीं रहा, बलकि इराक की
02:49राजुनिती और सुरक्षा व्यवस्
02:51की हिस्सा बन चुका है. कताईब हिजबुला, ये दूसरा है. नाम से भ्रमित मत हो येगा. ये लेवनान वाले हिजबुला
02:58से अलग इराकी संगठन है. इसे इरान का सबसे करीबी और सबसे कटर समर्थक सम्मूव माना जाता है. अमेरिका ने
03:06इसे विदेशी आतंकवादी स
03:07संगठन खूशिद किया हुआ है. क्योंकि अमेरिकी सेने ठिकानों पर कई हमलों का आरोप इसी संगठन पर लगाया जाता है.
03:15तीसरा, असाइब अहल अलहक. ये संगठन पहले मुक्तदा अलसद्र के आंदोलन का हिस्सा था, लेकिन बाद में अलग होकर इरान
03:24समर्थक धड
03:29प्रभाव भी रखता है. चोथा है हरकत अलनुजबा. सीरिया के ग्रहिद के तोरान इस संगठन की भूमिका तेजी से बढ़ी.
03:37इसे नकेवल इराक बलकि सीरिया में भी इरान समर्थक अभियानों में हिस्सा लिया. इसके बाद कुछ अन्य प्रभाव शाली संगठन
03:44भी है
03:44इनके अलावा कताइब सैयद, अलशुदा, हरकत अंसार, अलवफिया और कताइब अल इमाम अली जैसे कई संगठन भी इरान समर्थन नेट्वर्क
03:55का हिस्सा माने जाते हैं. तो आखिर ये इरान के लिए करते क्या हैं? सबसे आसान भाशा में समझे तो
04:01ये समू इरान के लि
04:14अक्सी वार्स जो आप अक्सर सुनते हैं, वो यही संगठन है, जो इरान के पीट पीछे खड़े होकर इरान को
04:19बल देते हैं. इनकी भूमी का कई स्तरों पर होती हैं? अमेरिकी सेन ठिकानों और काफिलों पर हमले. सीरिया और
04:25लेवनान तक इरान समर्थक नेट्वर्क को स�
04:28हतियार और रसत पहुचाने वाले जमीनी गलियारों की सुरक्षा. इराक की राजनीती और सरकारी संस्थानों में प्रभाव बनाए रखना. पीमेफ
04:36के आधिकारिक धांचे के जरिये सरकारी संसाधनों तक पहुचना. यही वज़य कि इरान को हर बार अपनी सेना भेजने क
04:44जरूरत नहीं पड़े. इरान इन्हें इतना महत्व क्यों देता है? इरान के सुरक्षा रणिती केवल अपनी सीमाओं तक सिमित नहीं
04:50है. तेहरान मानता है कि अगर खत्रे वो अपनी सीमा से दूर ही रोक दिया जाए तो देश अधिक सुरक्षित
04:56रहेगा. इराक उसके लि
05:14है तो इरान अक्सर कह सकता है कि ये उनका सोतंतर फैसला था. ये रणिती वर्षों से उसकी छेत्रिय नीती
05:20का महतोपूर्ण हिस्सा रही है. यानि कि साब भी मर जाता है और लाठी भी नहीं तूटती है जो अपना
05:24भारत की जो कहावत है वो वहाँ पर बहत फिट बैटती ह
05:27चुलिए अब ये भी जाते हैं ये समूँ आखिर बने कैसे. इनकी कहानी केवल आईएस आईएस से शुरू नहीं होती.
05:321980 और 1990 के दशक में कई इराकी शियानेता इरान में शरल लेकर वहाँ से संगठेत हुए.
05:392003 में अमेरिका ने सद्दाम हुसाइन की सरकार गिराई तो इराक की सुरक्षय वबस्था बिखर गई. यहीं से इरान समर्थन
05:47संगठनों का प्रभाव बढ़ने लगा. लेकिन सबसे बड़ा मोड आया 2014 में. जब आईएस आईएस ने इराक के बड़े हिस्से
05:55पर कबजा कर �
05:56तब इराक के प्रमुख शिया धनगुरू ग्रेंड अयातुल्ला अली अल सिस्तानी ने लोगों से हथियार उठाने की अपील कर दी.
06:04इसी अपील के बाद PMF का गचन हुआ. आयस आईस के खिलाफ लड़ाई ने इन समुहों को बैद्यता, संसाधन और
06:11लोगप्रियता सब क�
06:13इराक लंबे समय तक राजुनितिक और संप्रदाइक हिस्से से जूचता रहा. जहां सरकार कमजोर होती गई वहीं इन समुहों का
06:22प्रभाव बढ़ता गया. विशिशग्यों के अनुसार इरान ने इन्हें प्रशुक्षन, हतियार, रणितिक सलाह और वैचारिक समर्थन द
06:32इन्होंने वियापारिक ठेके, सीमा, चौकियों, सीमा शुल्क, स्थानिय प्रिशासन और राजुनितिक दलो तक अपना प्रभाव बढ़ा लिया. यानि अब ये
06:40सिर्फ बंदूक नहीं चराते, बलकि राजुनीती और अर्थववस्था में भी महत्तोपूर्ण भूमी का
06:45निभाते हैं. तो एक सवाल लाजुमी है कि इनके पास इतना पैसा आता कहां से है, इन्हें पैसा कहां से
06:50मिलता है. इनकी फंडिंग कई सोर्स से जुड़ी मानी जाती है. विशलेशकों के अनुसार इनमें शामिल है इराग सरकार के
06:56बजट से PMF को मिलने वाला वेतन और संस
06:59इरान की ओर से मिलने वाला प्रशिक्षन और अस्यान ने सहयता जो की मोटा खर्च हो गया जो इरान खुद
07:04उठा लेता है. ठाने आर्थिक गते विदिया, व्यपारिक नेट्वर्क, सीमा शेत्रों से होने वाली आए. हालाकि अलग-अलग समुहों की
07:10आर्थिक व्यवस्थ
07:29विशेश रूप से नामी तो बैश्विक आतंकवादी संगठन की श्रेणी में रखा गया है. यानि इराक के भीतर इन्हें वैद्य
07:35सुरक्षा ढांचे का हिस्सा माना जा सकता है, जबकि पश्चिमी देशों की नजर में इनमें से कई संगठन इरान के
07:42प्रॉक्सी नेटव
07:58इनकी मौजूदगी ही वो कारण है जिसकी विशे से इरान अपने सीमाओं से बाहर भी प्रभाव बनाए रखता है. लेकिन
08:05यही नेटवर्क छेतर में तनाव बढ़ाने, संगर्ष लंबा खीचने और शांती प्रक्रिया को जटिल बनाने का कारण भी बनता है.
08:12यानि इराक के समूँ सिर्फ थानिय मिलिशिया नहीं है, बलकि मध्यपुर्व की, बदरती भूराजनिती के ऐसे खिलाड़ी है जिनका असर
08:20वशिंग्टन, तहरान, तेल, अवीव, बेरूत और बगदाद से लेकर हर उस छेतर तक पहुँचा हुआ है, जो इसके आस-पास
08:28है और इसके प्रभाव में है, इस ख़बर में इतना ही अपडेट्स के लिए देखते रहें, One India Hindi
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