00:00होर्मुज स्टेट में युद्ध के दौरान जहाज पर शिवानन चरोसिया की मौत हो गए थी। उनका शव आठ दिन बाद
00:06दिवरिया पहुँचा। शव को देखते ही पतनी और बच्चे फूट फूट कर रोने लगे। घर के बाहर जैसे ही एम्बुलेंस
00:14रुकी परीजनों
00:15की आखों से आसु थमने का नाम नहीं ले रहे थे। हर कोई अपने बेटे भाई और पती को आखरी
00:22बार देखने के लिए पेताब था। परीजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया और गाओं का माहौल भी घमकीन
00:29हो गया। शिवानन्द विदेश में काम करती थे और परिवा
00:43जिले की सुराली गाओं के रहने वाले शिवानन्द चौरसिया और मुझ स्टेट क्षेत्र में एक शिप पर काम करती थे।
00:49अमेरिका और इरान में युद्ध के दारान उनकी मौत हो गए। घटना के आठ दिन बाद उनका पार्थिव शरीर विमान
00:57से गोरग पुर लाया ग
01:01मृतक के पिता रामजी चौरसिया ने जिला प्रशासन को एक मांग बद्र सौपा है। इसमें कहा गया है कि शिवानन्द
01:08की पत्नी को सरकारी नौकरी ली जाए। के इंद सरकार एक करोड रुपए की आर्थिक सहायता दे। उत्रप्रदेश सरकार भी
01:15एक करोड रुपए की
01:16मदद करें दोनों बच्चों को इंटर्मीडियेट तक पढ़ाई मुफ्त कराई जाए और शिवानन्द चौरसिया को शहीद का दर्जा दिया जाए।
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