00:00दूर से कोई व्यक्ति आ रहा हो, ये आप भले न पता पाएं कि पुरुष है या नहीं, पर दूर
00:05से ये ज़रूर बता देंगे कि महिला है, अदा, हाभाव, नैन नक्ष, कपड़े, बाल, इक्षाएं, माननेताएं, उपर से लेके नीचे
00:14तक पूरी वुमन बनी बैठी है, क
00:28पिकलौती साइंटिस्टर घर की, ने, जो हस रही है, वो भी यही करती है, हाँ, बैठो, बैठो, चाय लेके आती
00:36हो, तू क्यों जारी चाय बनाने, बाकियों को नहीं आती बनानी, और कोई बाहर का काम होगा, सुनो जी, बाहर
00:44का काम कर लाओ, का है, तू बाहर निकलेगी,
00:45तो गल जाएगी, धूप बहुत है, पिखल जाएगी, बाहर निकल, जो बाहर के तेरे काम है, खुद कर, काम भी
00:52कर, बाहर और कमाया भी कर, तो बनी बैठी है, मैं तो वुमन हूँ, वुमन बनने में तुम्हारा कौन सा
00:59भला है, वुमन बनना अभिशाप है तुम्हारा, मै
01:20तो तक आपको यह सब सिरे नेकारणा बढ़ेगा इस सबमें की यही है।
01:32नहीं है दो चार चीजे कर लो एहसान अपने उपर अगर थोड़ा भी तुमको दर्शन वेदान्त गीता समझ में आए
01:40है तो
01:40कम से कम अपने आपको चीज की तरह सजाना सवारना छोड़ दो इतना तो हैसान कर लो अपने उपर
01:48फीमेल होने पर गौरव करो सुन्दर बात है वोमन होने पर नहीं
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