00:00ऐसी अगनी जो किसी प्रकार का बंधन बरदाश्ट नहीं करती, वो अगनी हर महिला में है, और वो जला भी
00:06देगी, जब बंधनों को आभूशन मान लिया गया हो, तो अगनी होते हुए भी बेअसर हो जाती है, जजबी की
00:14कमी नहीं है, और वो जजबा जला देना चाहता है अ
00:28नटकट बहनों सिंगार दान को छुट्टी दे दो
00:31आइने से कहो कुछ देर अपना अकेला पन घूरता रहे
00:35कंगी को जड़े हुए बालों की याद में गुनगुनाने दो
00:40रिबन को फेक दो अलगनी पर
00:42ये चोटी करने का वक्त नहीं और ना बाजार का
00:46बालों को एट कर जुड़ा बांध लो
00:49और सब की सब मेरे पास आओ
00:51देखो मैं एक नई और ताजा ख़बर के साथ
00:55घर की दहलीज पर खड़ाओं
00:57जैसा मैंने पहले कहा है
00:59बीस सेबो की मिठास से भरा यौवन
01:02जब भी फटता है तो न सिर्फ टैंक तूटता है
01:06बलकि खून के छीटे जहां जहां पड़ते हैं
01:09बंजर धर्ती पर आजादी के कल्ले फूटते हैं
01:21और ओ प्यारी लड़की
01:23कल तू जहां आतिश के अनार की तरह फूटकर बिखर गई है
01:28ठीक वहीं से हम आजादी की वर्षगाट का जशन शुरू करते हैं
01:36काली तो बजाली आप बताइए
01:38आपको कब समझ पित होगी यह कविता
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