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Somvati Amavasya Vrat Katha: ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर सोमवती अमावस्या का महापर्व मनाया जा रहा है। आखिर क्यों इस व्रत को सुहागिनों के लिए अखंड सौभाग्य देने वाला माना जाता है और इसके पीछे सोना धोबिन की क्या मार्मिक कथा है, जानिए इस वीडियो में।
सोना धोबिन के इस त्याग के बाद जैसे ही उसके पति के प्राण पखेरू उड़ गए, उसने सोमवती अमावस्या के दिन बिना किसी सामग्री के पूरी निष्ठा से पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा की। उसके इस पतिव्रता धर्म और अटूट विश्वास के आगे यमराज को भी झुकना पड़ा और उसके पति के प्राण वापस लौट आए। यही कारण है कि आज भी देश के कोने-कोने में लाखों महिलाएं इस पावन कथा का श्रवण करती हैं और अपने परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के लिए पीपल देव की आराधना करती हैं।

About the Story:
On the auspicious occasion of Jyeshtha Amavasya, Somvati Amavasya is being celebrated across India with immense devotion. This special day, falling on a Monday, holds immense spiritual significance for Hindu devotees who worship Lord Shiva, Goddess Parvati, and their ancestors.
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Transcript
00:00जेश्ट अमवस्या के पावन अवसर पर देश भर में सोमवती अमवस्या का पर्वश्रधा और आस्ता के साथ मनाया जा रहा
00:06है।
00:07हिंदु धर्म में सोमवती अमवस्या को अत्यंत शुब और पलदाई माना जाता है।
00:12मानेता है कि जब अमवस्य सुमवार के दिन पढ़ती है तो उसका महत्व कई गुणा बढ़ जाता है।
00:18इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और पितरों की विशेश पूजा अर्चना की जाती है।
00:23महिलाएं अपने पती की लंबी आयू और अखन सो भागे के लिए व्रत रहती हैं जब कि श्रधा लूप अवितरी
00:29नदियों में स्नान करके दान लिपन्य करते हैं।
00:32शास्त्रों के अनुसार सुमतिय मवस्या के दिन पीपल के विरिक्ष की पूजा और उसकी 108 परीक्रमा करने से विशेश पूण्य
00:39की प्राप्ती होती है।
00:40माना जाता है कि इस दिन श्रधा से की गई पूजा जीवन के संकटों को दूर करती है और परिवार
00:46में सुक सम्रधी लाती है
00:47लेकिन कि आप जानते हैं कि आखिर इस व्रत को अखंड सौ भागे कवरत क्यों कहा जाता है
00:53इसके पीछे एक बेहत मार्मिक और प्रेणा दायक कथा जुड़ी हुई है
00:57पौराणी कथा के अनुसार एक गाउं में एक अत्यंत गरीब ब्रामहन रहता था
01:00उसके परिवार में एक सुन्दर और सिंसकारी बेटी थी
01:03समय बीतने के साथ बेटी विवाह योग्य हो गई
01:07लेकिन गरीबी और दुर्भाग्य के कारण उसके विवाह के लिए कोई अच्छा रिष्टा नहीं मिल पा रहा था
01:12इस चुन्दा में माता पिता दिन रात परेशान रहने लगे
01:16एक दिन उनके घर एक साथू महराजा ब्रामण परिवाद ने उनका खुब आदर सिकार किया
01:21उनकी सेवा से प्रसन होकर साथू ने कन्या को आशिरबाद दिया
01:25तब ही ब्रामण ने अपनी बेटी के विवाह की चिंता साथू के सामने रहती
01:29साधु ने कन्या का हाथ देखकर कहा कि उसकी कुंडली में विवाह का योग बहुत कमजोर है
01:35ये सुनकर ब्राम्हन के पैरो तले जमीन खसक गई
01:38उसने साधु से कई उपाय बताने की प्राथना कि
01:41तब साधु ने कहा कि दूर एक गाउं में सोना नाम की एक धोबिन रहती है
01:46वो परंपतिव्रता और इश्वर की अनन्य भक्त है
01:49यदि वो अपनी मांग का सिंदु तुम्हारी बेटी को लगा दे
01:53तो उसकी विवाह संबंदी सभी बाधाएं दूर हो जाएंगे
01:56ब्रामण ने अगले ही दि अपनी बेटी को सोना धोबिन के घर भेजना शुरू कर दी
02:01कन्या रोज सुभे सुभे जाकर चुपचाप उसके घर के सारे काम कर देती और बिना बताएं पापस लोटा दी
02:08वही दिनों तक ऐसा चलता रहा
02:10एक दिन धोबिन को आश्ट्रेरे हुआ कि आखेर उसके घर का काम कर कौन रहा है
02:15उसने चिप कर ने ग्रानी की और ब्रामण की बेटी को देखी
02:20जब उसने लड़की से कारण पूछा तो कन्या ने अपनी पूरी कहाने सुना दी
02:24उसकी विनम्रिता और सेवा भावना देखकर सुना धोबिन का रिदय द्रवित हो गया
02:29उसने तुरंट अपनी मांग का सिंदूर निकाल कर उसकन्या की मांग में लगा दिया
02:33लेकिन जैसे ही उसने ऐसा किया उसके अपने पती ने प्रान ट्याग दिये
02:37ये देखकर धुबिन स्तब्ध रह गई सैयोग से उस दिन सुमवतिया मवस्या थी
02:42अपने पती को बचाने के लिए वो तुरंट पीपल के वरिक्ष के पास पहुंचे
02:46उसके पास पूजा की कोई सामगरी नहीं थी उसने पुरी श्रधा और विश्वास के साथ
02:50पीपल के पेड़ की 108 बाद परिक्रमा की और भगवान से प्राण सना की
02:55कहते हैं कि उसके अटूट निष्ठा और पवित्ता धर्म के प्रभाव से उसके पती के प्राण वापस लोटाए
03:01तभी से सोमवतिय मवस्या को अखंड सौभागय देने वाला परव माना जाता है
03:05मानता ये भी है कि जो विवाहित महिलाएं जिन व्रत रखकर भगवान शिव पार्वति की पूजा करती हैं
03:11पीपल की परिक्रमा करती हैं और इस कथा का श्रवन करती हैं उन्हें खंड सुभाग्य, सुखी व्यवाहिक जीवन और पती
03:17की दरगायू का श्रिवाद प्राथ होता है
03:19इसी आस्था और विश्वास के कारण आज भी देश भर में लाखो महीलाएं सोमवतिय मरस्या का व्रत रखती हैं और
03:25इस पवित्र कथा का श्रवन करती हैं
03:27धार्मिक मानेताओं के अनुसार श्रद्धा और विश्वास से किया गया ये व्रत जीवन में सुख सम्रिधी और सुभाग्य ने कराता
03:35है
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