00:03कि अच्छारे जी आपी प्यारी प्यारी बाते करते हैं कि मुझे आज प्षिर से भाग के दौड के आज मैं
00:09टेक्सी में भी नी आई कर्टो टेक्सी में आराम से पहुच गई अभी आप मुझे बताएं
00:14आप इतने बुद्धि जीवी इतने उर्जावान आकरशक भावुक सत्य के प्रती इतने समर्पित और इतने पैशनेट स्पीकर क्यों हैं कि
00:28आप मेरे जैसे किसी इनसान को खींच लाते हैं मैं घर बैठ सकती थी आराम से पर आपने मुझे मजबूर
00:33कर दिया कि मैं पूरे लं
00:44करती हैं जैसे ये आपके लिए बिल्कुल नया था वैसे ही ये मेरे लिए भी उतना ही नया था मतलब
01:09लगभग जैसे आप अपनी सीट से इसे देख रही थी
01:13एक तरह से मैं भी इसके लिए अजनबी ही हूँ मेरा एक मात्र काम है खुद को एक तरफ रखना
01:18और जो बोला जा रहा है उसे होने देना है और मैं ये किसी विचार सिध्धान्त या केवल कहने के
01:25लिए नहीं कह रहा हूँ वास्तव में ऐसा है ऐसे दिन भी होते हैं जब म�
01:42शांत होने में सफल हो जाता हूँ और खुद को शांत कर लेता हूँ ठीक है और फिर वो घटित
01:46होती है जिसकी आप बात कर रही हैं लेकिन मैं उससे अंजान हूँ मैं वास्तव में उस पर अपना अधिकार
01:51नहीं जताता और बहुत ही विनम्रता के साथ मुझे ये स्विकार
01:56करना चाहिए कि मैं उसमें कोई भागिदारी नहीं हूँ और यही कारण है कि जब मैं उठता हूँ तो अकसर
02:01अपनी कुर्सी को नमस्ते करता हूँ तो मैं इसे इस तरह से देखना चाहता हूँ कि कुर्सी ने मेरे माध्यम
02:05से ये किया है ऐसा नहीं कि कुर्सी वास्तव में �
02:07ऐसा करती है लेकिन क्रिया या प्रभाव का श्रे कुर्सी को देकर मैं खुद को उस काम के अहंकार से
02:13विनम्रता पूर्वक मुक्त कर लेता हूं जो किया गया है
02:16तो मैं जो कह रहा हूँ, यह मेरी तरफ से नहीं आ रहा है, शायद यह कुर्सी से आया है
02:20इसलिए कुर्सी को नमस्ते
02:22मुझे आपकी एक और जलक पाकर बहुत खुशी हुई
02:25Thank you
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