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  • 3 hours ago
गोल्फ अमीरों का खेल माना जाता है. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के गोल्फ कोच सुरेश महबूबाणी ने गोल्फ को लेकर सोच बदली है. ये चेंबूर की झुग्गी बस्तियों की गलियों में बच्चों को लोहे की छड़ों, लकड़ी की स्टीक, गैस पाइक और प्लास्टिक गेंदों से गोल्फ सिखानें में व्यस्त हैं. स्लम में गोल्फ की नई कहानी बुन रहे हैं. सुरेश और उनकी टीम को एक गोल्फर ने यू ट्यूब पर देखा. 2018 में पेरिस में वर्ल्ड अर्बन गोल्फ़ कप में हिस्सा लेने के लिए बुलाया. उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने इस प्रतियोगिता में पांचवां स्थान हासिल किया. और यहीं से स्लम गोल्फ को पहचान मिली. अब महबूबाणी स्लम गोल्फ की नई पौध को तैयार करने में जुटे हुए हैं.

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Transcript
00:05My purpose is that my children will be a world class of golfers.
00:126 children have been in the slum golfers.
00:18I have been in Paris and Europe.
00:23I have been in Paris and Europe.
00:32Golf is a game.
00:34The country of Mumbai, the golf coach,
00:37Suresh Mhebubadi, has thought about golf.
00:41This is a place where the children of the school,
00:44the children of the school,
00:46the kids, the gas pipe,
00:49and the plastic bags.
00:52They have a new story.
00:59They have a new story.
01:00And these stories are very important.
01:03When I was beginning to get the people,
01:06they all knew about golf.
01:08They have not only the best you can find.
01:08But now, the bring of golf club is constellation.
01:13The second time we have been a school of golf.
01:22ुरेश और उनकी टीम को एक गॉल्फर ने यूट्यूब पर देखा
01:282018 में पैरिस में वर्ल्ड अर्बन गॉल्फ कप में हिस्सा लेने के लिए बुलाया
01:34उनके नित्रतों में भारतिय टीम ने इस प्रतियोगिता में पाच्वा स्थान हासिल किया
01:39और यहीं से स्लम गॉल्फ को पहचान मिली
01:43महबुबानी और उनकी टीम जल्द ही अमेरिका में होने वाले अर्बन गॉल्फ कप में हिस्सा लेने वाली है
01:58अगर मैं किसी ऐसे बच्चे की सिफारिस करता हूँ जो अच्छा खेलता है
02:02तो उसे तुरंट खेलने का मौका दिया जाता है
02:04चह बच्चे स्लम गॉल्फ से मुख्यधारा के खेल में आ चुके हैं
02:08मुझे भरोसा है कि भविस्य में भी यह संख्या 40 से जादा हो जाएगी
02:12यूरोप, कनाडा और अमेरिका जैसे जगहों पर दुनिया भर में अरबन गॉल्फ कप आयोजित किये जाते हैं
02:19मैंने पहले पेरिस में भारत का परतेनेदित किया और यूरोप का दोरा भी किया है
02:29कपिल देव सहित मराठी फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार और विदेश के लोग भी सुरेश के काम की तारीफ कर चुके
02:36है
02:44कपिल देव ने खुद हमारे काम की तारीफ की है
02:47मराथी फिल्म इंडस्ट्री के कलकारों और विदेशों के लोगों ने भी हमारी कोशिशों की सराहना की है
02:53मेरा मकसद जुगी बस्तियों के इन बच्चों को वर्ल्ल क्लास गोलफर बनाना है
02:57मैं इसी दिसा में काम कर रहा हूँ
03:03लेकिन सुरेश का ये सफर यू ही नहीं शुरू हुआ था
03:071993 में जब बहबु बाड़ी स्कूल के बाद चेंबुर गोल्फ कलब के बाहर से गोल्फ देखा करते थे
03:14इससे उन्हें इस खेल में दल्चस्पी हुई
03:16लेकिन पैसो की तंगी के कारण उन्हें कलब में खेलने की इजाज़त नहीं थी
03:21फिर भी उन्होंने इस खेल को देखा, समझा और सीखा
03:26फिर दोस्तों की मदद से चेंबुर की गलियों में स्लम गोल्फ का ये रूप तयार किया
03:32जिसने उन्हें पहचान दी, नाम दिया
03:36ब्यूरो रिपोर्ट, ETV भारत
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