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Transcript
00:00आपको इतना क्या डर लगता है लड़की की देंसे की पूरा धके दे रहे हो उसको
00:05फिर आप कहते हो धक के रखो धक के रखो कहते हो संसकार की बात है धक के रखो
00:08हमेशा धक कर रखा करो इसको परिवार की इज़त का सवाल है
00:12और कुछ संस्कृतियों में तो पूरा उपर से नीचे तक ढग देते हैं काला
00:16फलानी बदन दिखाती घुमती है, गंदे चरितर की है
00:20महिलाओं पर तो जो इसका अनिश्टकारी असर पढ़ा है तो पढ़ा ही है
00:27शरीर को इतना बड़ा बना लिया है कि हर आदमी हर समय बस शरीरी शरीर के बारे में सोच रहा
00:32है
00:32लेकिन शरीर शरीर कर कर कर कर कर के हमने अपनी बेटियों को अपनी लड़कियों को
00:40अपनी महिलाओं को हमने इन सब को बस मास का पिंड बना दिया है
00:44मास है, मास है.
00:45वास्तविक धर्म ये नहीने देता है.
00:48वास्तविक धर्म कहता है कि रड़्की हो के रड़का हो, तुम इन्सान हो.
00:51एक चितना हो तुम जिसका धाहित तो है और अधिकार है,
00:55कि वो आस्मान की उचाई हासिल करे.
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