00:00टेल लाइट नहीं है, रात में काले कपड़े पहन रखे हैं, हेलमेट नहीं होता है, फोन पे बात कर रहे
00:06होता है, इंशुरेंस नहीं होता है, गरीबी हटे तो हटे कैसे, यब तक गरीब गरीबी रहना चाहता है, तो गरीबी
00:14हटे कैसे, इन में से कुछ का तो एक्सिरेंट ह
00:17स्टेडिस्टिक्स की बात है इतने सारे लोग जब करें तुन में से पुछ का एक्सिलेंट भी हो गाई तो कुछ
00:21आफद को दुरगटना को नोता दे रहे हैं और इनका मेडिटल इंशुरेंस नहीं है तो क्या होगा यह गरीब है
00:27और गरीब हो जाएंगे जब यह जाएंगे �
00:29लाखोंगे खर्चा होगा और उन दिनों में जब इनका खर्चा हो रहा होगा उन दिनों इनकी आमदनी भी बंद हो
00:34जाएंगे उनकी अस्कोटाल में पुड़े है एक और बंदा इसका टेल लाइट नहीं है यह एक और नहीं है यह
00:42एक और नहीं है यह दस्वा बीस्वा है �
00:43तो पिछले पादे कांट में मिन रहा है
00:45तुम मुझे रिकॉर्ड करो इतनी देर में थे चार और निकल गए
00:49चार और तो कैसे बोल दें कि गरीबी सिर्फ इसलिए होती है
00:53कि अरे सही हो की बात है
00:55ये भी कैसे बोल दें कि गुझी वादियों में सारा पैसा अपने पाद रख लिया है
00:59तो इसलिए बचारे गरीबों के लिए कुछ नहीं बचाए
01:01अपसे जादा दुखी अब बात वक्ती है
01:04गरीब खुद अपनी गरीबी के कारणों में शामिल है
01:08कि गरीब खुद ऐसे काम कर रहा है जो उसकी गरीबी को और बढ़ाएंगे
01:14और इन कामों का जो संबंद है उसके मूल्यों से होता है
01:18ये जो लोगधार्मिक मूल्य होते है न
01:19इन में एक बड़ा मूल्य है भाद्यवादिता
01:23कि भाई ये तुमारी किसमत में लिखाऊगा तो तुमारा गाम हो जाएगा
01:26और नहीं लिखाऊगा तुमारे भाद्यों में तो तुम कितना भी कारणों तो नहीं होगा
01:31तो उसका रफिज़ा ही होता है कि इनसान कभी बहुत जान लगा करके
01:37ना तो श्रम करता
01:38ना कभी अपनी असफलता
01:41के वास्तवे कारणों की जाच करता है
01:44ना कभी
01:45बहुत बुद्धी लगा पाता क्योंकि लोगधर्म
01:47में एक बात ये भी है
01:48कि बहुत बुद्धी मत लगाओ
01:50तुम तो अंधर शद्दा और अंधर मक्ती करो
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