00:00किसी और से खून मागने से पहले अपना खून बहाना पड़ता है
00:03इधर उनके भीतर जबरतस्त एक विद्रोह खड़ा होता ही जा रहा था
00:07सोयम के प्रते, अपने घर के प्रते, समाज के प्रते
00:11भयालक विद्रोही हो गए थे, वो और संघर्ष से नीचे वो कोई चीज मानते नहीं थे
00:15जो क्रांती मुझे लानी है, वो सरकारी नौकरी अरके थोड़ी ले आ लूँगा
00:19उपनिशद उनके जीवन में आये, और एकदम एक नई शुरुआत हो गई
00:22क्या ज़रूरत थी उनने ये सब करने की, आते पीते घर से थे, उस समय बहुत लोग शिक्षित नहीं होते
00:28थे
00:28वो शिक्षा में अवल नंबर पे थे, ICS जैसी परीक्षा उन्होंने पास कर ली, सब कुछ तो उनको मिला हुआ
00:35था, क्या ज़रूरत थी छोड़ने चाड़ने की
00:37क्योंकि अध्यात्म का अर्थी ही होता है, आगे बढ़ते रहो चरैवेती चरैवेती
00:42जब मुक्ति नहीं है अभी, तो यात्रा कैसे रुक गई अभी, तो यात्री ही रहे जीवन पर
00:48तो मुझे खून तो मैं तुम्हें आजादी दूँगा, ऐसी कोई ड्रस पहन के खड़ा हो जाता है, अमीता जी कहला
00:52जाता है
00:52ऐसा नहीं होता, जान पर खिलना पड़ता है, किसी और से खून मागने से पहले अपना खून रहना पड़ता है
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