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  • 2 days ago
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Horror story

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🐳
Animals
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00:00PYM JBZ
00:30थंडी हवा खाली प्लेट फॉर्म पर सरसराती हुई गुजर रही थी।
00:33तूर तक कोई इनसान दिखाई नहीं दे रहा था।
00:36चारों तरफ ऐसा सननाटा था, जैसे जगह खुद सांस रोके खड़ी हो।
00:41स्टेशन के बाहर सिर्फ एक ओंटो खड़ा था।
00:44उसके पास खड़ा था मंगल, एक सीधा साधा ओंटो चालक, जो अभी कुछ यात्रियों को छोड़ कर लोटा था, और
00:52अब घर जाने की तैयारी कर रहा था।
01:14ऐसी रातों में मन अपने आप घबरा जाता है। घर तो जा ही रहा हूँ, लेकिन अगर एक सवारी और
01:22मिल जाये तो आज की कमाई थोड़ी बढ़ जाएगी।
01:25आखरी ट्रेन आने वाली है, शायद उससे कोई उतर जाये। चलो, थोड़ा रुख जाता हूँ, क्या पता किसमत साथ दे
01:33दे।
01:34मंगल घर लौटने ही वाला था, लेकिन उसके मन में एक ख्याल अटक गया।
01:39क्यों ना आज एक सवारी और मिल जाए, तो कमाई कुछ बहतर हो जाएगी।
01:44उसे याद आया कि आखिरी ट्रेन आने वाली है, अगर उससे कोई यात्री मिल गया, तो दिन की थकान भी
01:51सफल हो जाएगी।
01:53तब ही दूर कहीं पटरियों की दिशा से हलकी सी सीटी की आवाज हवा में तैरती हुई, उसके कानों तक
01:59पहुँची।
02:00मंगल ने तुरंत से रुठा कर अंधेरे में देखा, शायद ट्रेन अब आने ही वाली थी।
02:06ये रही ट्रेन की सीटी, लगता है आ ही गई, देखते है, शायद कोई यात्री मिल ही जाए।
02:27फाइनली यार, हम शिफपर पहुची गए, कितना सुन रखा था इस जगा के बारे में।
02:32हाँ भाई, लेकिन स्टेशन तो काफी सुनसान लग रहा है, उमीद है कोई सवारी मिल जाए।
02:38मिलेगी यार, थोड़ा आगे चलते हैं, इतनी दूर आये हैं तो अब रुखने का सवाल ही नहीं।
03:03उस समय स्टेशन के बाहर सिर्फ एक ही ओंटो खड़ा था।
03:07उसी के पास दो युवक खड़े थे, रोहित और करण।
03:12आईए भाईया, सवारी चाहिए क्या, कहा तक जाना है।
03:17भाईया, इधर आसपास कोई ठैरने की जगा मिलेगी क्या, हम पहली बार आये हैं या।
03:22मिल जाएगी भाईया, आप बताईये तो सही कहा रुकना है।
03:26रात काफी हो चुकी है, देर करना ठीक नहीं।
03:30भाईया, सज बताओं तो हम यहाँ थोड़ा एडवेंचर के लिए आए हैं।
03:34शहर की भागदोर से दूर कुछ अलग महसूस करना है।
03:38हाँ, शान्त गाउं देखना है, हर्याली में घूमना है, और थोड़ा रुमांच भी चाहिए।
03:45जगा तो आपने सही चुनी है, हमारा गाउं बहुत शान्त है, लेकिन आज अमावस की रात है।
03:52ऐसी रातों में यहाँ लोग जादा बाहर नहीं निकलते।
03:56अडे भाईया, हम डरने वालों में से नहीं है।
04:26यह किसी रुमांच से कम न हो, लेकिन मंगल का मन उतना बेफिक्र नहीं था।
04:31वह चाबी घुमा कर ओन टो स्टार्ट कर चुका था। फिर भी उसके भीतर एक अंजानी बेचैनी उठ रही थी।
04:38उसे याद आया कि आज अमावस की रात है और ऐसी रातों को लेकर उसने बच्पन से कई अजीब किस्से
04:45सुने थे।
04:46उसने एक पल आसमान की तरफ देखा, चारों और गहरा अंधेरा पसरा था।
04:51मन ही मन उसने सोचा। आज ज्यादा देर बाहर रुकना ठीक नहीं। फिर भी सवारियों को बैठा कर उसने उन्टो
04:59सड़क पर बढ़ा दिया।
05:00इंजन की आवाज सुनसान रास्ते में गूँजने लगी। आगे का रास्ता खाली था। पेड़ों की लंबी परचाईयां सड़क पर अजीब
05:07आकार बना रही थी। और मंगल को महसूस हो रहा था कि यह सफर शायद साधारन नहीं है।
05:15मंगल भाईया, यहां आसपास कोई होटल मिल जाएगा क्या? रात भी होने वाली है।
05:20नहीं भाईया, इस समय तो यहां कोई होटल नहीं मिलेगा। आप चिंता मत कीजिए, मेरे घर चलिए। घर बड़ा तो
05:29नहीं है, मगर आज की रात आराम से गुजर जाएगी।
05:32सच भाईया, फिर तो मज़ा आ जाएगा, गाउं का असली माहौल भी देख लेंगे।
05:38हाँ, आज आप लोग मेरे महमान हैं। लेकिन एक बात ध्यान रखिए, आज अमावस की रात है। ऐसी रातों में
05:46यहां लोग जादा बाहर नहीं निकलते।
05:48क्यूं भाईया, ऐसा के खास है आज की रात में। गाउं में माननेता है कि अमावस की रात में बुरी
05:54और ताकत्व शक्तियां बाहर निकलती है। इसलिए सावधानी जरूरी होती है।
06:00रोमांच अपनी जगा है भाईया, लेकिन समझदारी भी जरूरी है।
06:04अरे भाईया, तब तो और भी मज़ा आएगा, थोड़ा रोमांच तो चाहिए ही।
06:09पहले घर चलिए, रात बाहर बिताने लायक नहीं है।
06:13ठीक है भाईया, जैसा आप सही समझें।
06:16धन्यवाद मंगल भाईया, आपने बड़ी मदद कर दी।
06:19अरे इसमें धन्यवाद की क्या बात है, बस अब जल्दी घर पहुँच जाए।
06:24अमावस की रात में अंधेरा जल्दी गहरा जाता है।
06:27रात के आठ बजने वाले थे, तब ही रोहित और कर्ण मंगल के घर पहुँच चुके थे।
06:33घर के बाहर बैठ कर तीनों ने साथ में चाए पी और देर तक आपस में बातें करते रहे।
06:39माहौल सामान्य था, लेकिन मंगल के चेहरे पर हलकी सी गंभीरता साफ जलक रही थी।
06:45कुछ देर बाद उसने दोनों को समझाते हुए रात की गंभीरता का एहसास कराया।
06:51उसकी आवाज में चिंता साफ महसूस हो रही थी, जैसे वह किसी अनहोनी की आशंका को पहले से भाप रहा
06:57हो।
06:58रोहित, करण, मेरी बात ध्यान से सुनो।
07:02आज अमावस की रात है। ऐसी रातों में यहां का माहौल बदल जाता है।
07:07गाउं के लोग मानते हैं कि इस समय बुरी ताकतें ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं।
07:13इसलिए भेवज़ा बाहर घूमना ठीक नहीं।
07:16अरे मंगल भाईया, आप भी ना, कैसी कैसी बाते करते हैं।
07:20हमें यूही मट डराइये।
07:21भाईया, रास्ते में आपने जिस हवेली का जिक्र किया था, वही है न ये।
07:26क्या सच में वो इतनी डरावनी है।
07:29गाउं से थोड़ा दूर एक पुरानी हवेली है, जो अब पूरी तरह जरजर हो चुकी है।
07:35लोग कहते हैं कि वहां कुछ अच्छा नहीं है।
07:39रात होते ही वहां से अजीब अजीब आवाजे सुनाई देती हैं।
07:43उस हवेली के पास शाम को कोई भी गाउंवाला नहीं जाता।
07:47सच में क्या लोग इतने डरते हैं उस जगह से।
07:50एक बार गाउं का एक आदमी जिद में आकर उस हवेली के अंदर चला गया था।
07:56अगले दिन वो हवेली के पास वाले शमशान के पास बेहोशी की हालत में मिला।
08:02तब से लोग और भी डरने लगे हैं।
08:05वहां हमेशा ऐसा लगता है जैसे खौफ का साया मनरा रहा हो।
08:10जो आप बता रहे हैं वो सुनकर थोड़ा अजीब जरूर लग रहा है।
08:15अगर सच में वहां ऐसा कुछ हुआ था तो बात सोचने वाली है।
08:19खेर, बाते करते करते देर हो रही है।
08:22आप लोग चाये खतम कीजिए, मैं अंदर जाकर खाने का इंतिजाम करता हूँ।
08:38यार रोहित, तुम्हें नहीं लगा कि मंगल भाया के घर में और कोई है ही नहीं।
08:42कितना शान्त है सब कुछ।
08:44हाँ, थोड़ा अजीब तो है, लेकिन गाओं के घर ऐसे ही होते हैं शायद।
08:50और जो उन्होंने हवेली की कहानी बताई।
08:52सच कहूं तो सुनकर तो मुझे और भी इंटरेस्ट आ गया।
08:56सोचो, अगर सच में कुछ रहसे हुआ तो…
08:59पागल है क्या? उन्होंने जो बताया, वो सुनकर मुझे तो थोड़ा डर लगने लगा है।
09:04डर किस बात का? हम दोनों साथ हैं न? वैसे भी इतनी दूर सर्फ मज़े लेने आये हैं, अब पीछे
09:11हटना कैसा?
09:12लेकिन अगर सच में वहां कुछ गड़बड हुई तो…
09:15कुछ नहीं होगा, और अगर मंगल भैया मना करेंगे, तो हम उन्हें मना लेंगे, आखिर देखने में क्या हर्ज हैं?
09:22हम, बात तो तेरी सही है, इतनी दूर आएं हैं तो खाली हाथ थोड़ी लोटेंगे।
09:27बस तै रहा, मौका मिलते ही हवेली तक चलेंगे। पता तो चले वहां सच्चाई क्या है?
09:32कुछ देर बाद मंगल ने खाना तयार कर लिया और दोनों को खाने के लिए आवाज दी।
09:38रोहित और करण हात मुधो कर आंगन में आ बैठे। तीनों ने साथ बैठकर साधा भोजन शुरू किया।
09:45दिन भर की भाग दोड के बाद घर का खाना सबको अच्छा लग रहा था। खाते खाते वे हलकी फुलकी
09:52बातें करते रहे।
09:54तभी रोहित ने निवाला तोड़ते हुए मंगल से एक सवाल पूछ लिया। करण भी उसकी और देखने लगा। जैसे वह
10:01भी उसी बात का जवाब सुनना चाहता हो।
10:03मंगल भाया, खाना सच में बहुत स्वादिश्ट है। आपने इतनी महनत की, इसके लिए दिल से शुक्रिया।
10:09अरे भाया, इसमें शुक्रिया कैसा? घर का ही तो खाना है।
10:13भाया, एक बात पूछू, घर में और कोई नजर नहीं आ रहा। क्या आप यहाँ अकेले रहते हैं?
10:19हाँ मंगल भाया, आपने हमें इस अंजान जगा पर सहारा दिया, ये हम कभी नहीं भूलेंगे। लेकिन सच पताईए, आपके
10:26परिवार में और कौन-कौन है?
10:27अब यहाँ मेरा कोई नहीं है, पहले माता पिता थे, लेकिन वक्त के साथ सब चले गए। पिता जी खेती
10:36किया करते थे, उसी से घर चलता था, उनके बात खेत तो हैं, पर मेरा मन उसमें नहीं लगा। इसलिए
10:43आटो चलाना शुरू कर दिया, उसी से गुजारा हो जाता है
10:47भाईया, ये सुनकर सच में बुरा लगा, इतनी कम उमर में इतना सब संभालना आसान नहीं। जंदगी है भाईया, धीरे
10:55धीरे सब सहना सीख जाता है इंसान, अब तो यही रोज मर्रा बन गई है, आपने जिस हिम्मद से सब
11:02संभाला है, वो काबले तारीफ है भाईया, ब
11:16सच कहूं तो इतना स्वादिष्ट खाना मैंने पहले कभी नहीं खाया, आज समझ आया कि असली स्वाद तो गाउं के
11:23खाने में होता है।
12:15पेंचर के लिए ही आये हैं।
12:17ठीक है, तुम लोग इतनी जित कर रहे हो तो मैं मना नहीं करूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त होगी।
12:24कैसी शर्त मंगल भाया।
12:26हवेली तक जाना ठीक है, लेकिन उसके बाहर जो शम्शान है न, उसकी तरफ कदम भी मत बढ़ाना।
12:33वहां से अगर कोई आवाज आये, कोई रोने की, कोई पुकारने की, या ऐसा लगे की कोई मदद मांग रहा
12:41है, तब भी उधर मत जाना।
12:44यहां तक कि अगर कोई जोर से चीक है, तो भी पलट कर मत देखना। मैं साफ कह रहां, किसी
12:51भी हालत में शम्शान की तरफ नहीं जाना।
12:54ठीक है मंगल भाई, हम आपकी बात मानेंगे, उधर नहीं जाएंगे।
12:58तो पक्का रहा, कल हवेली देखेंगे, और हा भाया, आप सच में हमारी बहुत मदद कर रहे हो, इसके लिए
13:04दिल से धन्यवाद।
13:05अरे धन्यवाद की क्या बात है, तुम लोग मेरे महमान हो, लेकिन मेरी बात हलके में मत लेना।
13:12चिंता मत कीजिए, हम संभल कर रहेंगे।
13:42लेकिन उनकी आँखों में नींद का नाम नहीं था, कमरे में हलकी सी खामोशी पसरी थी, बाहर कहीं दूर कुत्तों
13:49के भॉंकने की आवाज बीच बीच में सुनाई दे रही थी, दोनों करवट बदलते रहे और फिर धीरे धीरे आपस
13:56में बातें करने लगे, कभी सफर की च
14:12अने वाला है कल, सोच कर ही excitement हो रही है
14:15तू तो पूरा जोश में है, लेकिन थोड़ा डर भी लग रहा है न
14:20हाँ, थोड़ा सा, पता नहीं क्यों, मंगल भहिया की बाते याद आ रही है, पर फिर भी दिल कह रहा
14:26है कि कल कुछ अलग होने वाला है
14:28बस कर यार, तू जितना सोचता है, उतना ही दिमाग में घूमता रहेगा
14:32अरे सोचू भी न, तो क्या करूँ, इतनी दूर आये हैं, और वो हवेली, सच में देखना है मुझे
14:38ठीक है भई, देख लेंगे, लेकिन अभी सो भी जा, क्या पूरी रात ऐसे ही बाते करता रहेगा
14:45कोशिश करता हूँ, पर नींद आये तब न
14:48आग बंद कर और चुपचाप लेट जा, कल सुबह जल्दी निकलना है
14:52दोनों बातों ही बातों में कब शांत हुए, और कब उन्हींदे होकर गहरी नींद में डूब गए, उन्हें खुद भी
14:59पता नहीं चला
15:00रात यूं ही गुजर गई, और देखते ही देखते, सुबह की हलकी रोशनी खिड़की से भीतर आने लगी
15:14सुबह, रोहित, करण और मंगल तीनों घर के बाहर बैठकर चाय की चुस्कियाओं ले रहे थे
15:21ठंडी हवा के साथ उनके बीच आगे की योजना पर चर्चा चल रही थी
15:25सफर में साथ क्या-क्या सामान रखना है, किन बातों का ध्यान रखना है
15:30और बाकी तैयारियां कैसे पूरी करनी है
15:33बातों और तैयारियों में समय इतनी तेजी से भी था कि किसी को एहसास ही नहीं हुआ
15:39देखते देखते शाम के चार बच गए
15:41इसी दोरान उन्होंने मंगल को यह भी बता दिया
15:45कि वे एक रात उस पुरानी खंडहर हवेली में बिताने का इरादा रखते हैं
15:50यह सुनकर मंगल का चेहरा गंभीर हो गया
15:53उसे यह विचार बिल्कुल पसंद नहीं आया
15:56Domeo ne hansi mazaq aur samjhani buchhanne ke baad kisii tarha usse raja to kar liya
16:02lekin mangal ka man abhiy nishjint nahi tha
16:05Woha baar baar unhye saavdhan rahane ki salah deta raha
16:08aur har qadam sotsi saamaj kar uthane ki hidaayat deta raha
16:12Kuchhi dier baad, tineo ne aapni tiyari puri ki aur baahara gaya
16:21Dekho, jane se pahle sara samaan, aachsi tarah tiyari kar liena
16:25Woha aaspaas kuch nahi milega
16:28Raat ke liye khana mein bana chuka huu, tiffin mein ruck diya hai
16:31Samaayi par khaa lena, aur bevajah idhar udhar mad bhatakna
16:35Jou bhi karna, sotsi saamaj kar karna
16:38Mangal bhaiya, abh hamaray liye kitna kar rahe ho
16:40Sach me, ham aapka ahisan nahi bholenge
16:43Itnei dhyan se sab tiyar kar diya, varnah hamen to kuchy suji nahi raha tha
16:48Bhaiya, sach me, aapne to pura intazam kar diya
16:51Ab to aur bhi maza aayega
16:53Bhas aap chintah mat kijiye, hum sambal kar rahenge
16:56Aur haan, agar kuch ajeeb laga, to sabse pahle aapko hi yad karenge
17:00Mangal nye aunxto aagye bada kar dhar wazhe ke paas roka
17:04Aur rohit karan uske bhi thar pait kaya
17:06Seat pər baitate hii mangal nye bina kuch kahe engine start kia
17:10Motor ki aawaz goonji
17:12Aur auto dhire dhire aanghan se bahar nikal gaya
17:15Shuruaat mein raastah samaa nye tha
17:17Lekin aagye badahte badahte maahol badalne laga
17:21Gharon ki sankhya kam hodhi gai
17:23Dukanen pichhe chhutti chalhi gai
17:25Aur sadak sunsaan hodhi gai
17:27Hawa ab kuch zyadha thundi mehsus ho rahi thi
17:30Peedon ki lembhi chayayayayen
17:32Sadak par ajeeb dheng se phail rahi thi
17:35Thoڑi hii dher mei
17:36On auto us ilaakye mei pahunch gaya
17:38Jahaan purani hawaili khadhi thi
17:40Charaon aur, veerani pasri thi
17:42Aur dure dure tuk koii halchal dikhayi naihi dhe rahi thi
17:45Mangal nye hawaili se kuch durei pahle hi
17:48Onto rog diya
17:49Mangal bhaiya, kya hum hawaili pahunch gaya
17:53Abhi nahi, thoda aur age jau
17:56Phir daahinye taraf mulna
17:58Vahan tumhe shamshan ka
18:00Purana sa darwaza dhikhe ga
18:02Bas vahin se thoda age badho ge
18:04To hawaili nazara jayegi
18:06Matlab abh hum yahin se age pahidal jayen
18:09Haan, may yahin tuk chhoed saksakta ho
18:12Age ka raastah tum doonon ko
18:14Khud tayo karna hooga
18:15Yad rakhna, joh samjhaya hai usse bhuulna mat
18:20Thik hai Mangal bhai, hum dhyan rakhenge
18:23Kal subha mein aapni auto lekar
18:24Isi jaga a jaunga
18:26Agar sab thik raha, to yehi milna
18:30Thik hai Mangal bhai, kal yehi milte hai
18:32Chintah mat kijiye, hum sameh par vaapas ajaayenge
18:36Thik hai, samhal kar jana
18:39Vahan khađe ho kar, usne unhye savdhani se rrhne ki hidaayat di
18:43Aur phir, vaapas apne ghar ki or loat gaya
18:46Raastah puri tarah sunsaan tha
18:48Doonon oor, gana janggal phella hoa tha
18:51Aur raat ka andhira dhieray dhieray
18:53Aur geharah hota ja raha tha
18:54Hawa mein thandak ghulhi hoi thi
18:56Peedon ke biech se, ajeeb si pakshiyong ki aawazen á rahi thi
19:00Jho vata waran ko, aur bhi rahasimayi bana rahi thi
19:03Dhieray dhieray, mangal ka unto dure jata hua
19:07Aankhon se ojhal ho gaya
19:08Ab us viranen mein kevel rohit
19:11Aur karan hii reha gaya thi
19:14Doonon ne aapne bag u'thaye
19:15Aur aage badehne lagay
19:17Sunsaan pak dandhi par unke kadmo ki aahat
19:20Saaf sunai dhe rahi thi
19:26Karan, pata nahi kiyo
19:28Mujhe yaa kuch thik nahi lag ra
19:30Aray yaar, tu bhi na
19:32Abhi se gavrha gaya
19:33Itni dure aya hai
19:34Aur abh peechay hutnay ki soch raha hai
19:36Yeh sab bas dhimag ka khayel hai
19:38Dekhna, subah hasengi hama iz baat per
19:41Shaya dh hume mangal bhaiya ki baat
19:43Maan lini chahiye thi
19:44Raat mein is tarah rukna
19:46Sahi fayasla hai ya nahi
19:47Samaj nahi aara
19:49Agar halat eisai hi rahe
19:50To hume vaapas lotnay ki baare me
19:52Sochna chahiye
20:00Bato me chalte chalte unhye aahsas hi nahi hua ki kib ve
20:04Us purani haveli ke bilkul qarib aah pahunche
20:08Sannata hii to maza hai
20:09Adventure aysa hi hota hai
20:11Đar laget tabhi to
20:12Asli romanchi miltas hai
20:15Mazak matkar, mahal dhek
20:17Khali haveli, sannata
20:19Kuch toh ajeeb hai
20:21Saamne khađi vahimarat
20:23Andhere me
20:24Aur bhi vishal
20:25Aur rahasya maya lag rahi thi
20:27Sabse ajeeb baat yeh thi
20:29Ki haveli ka
20:30Mukhe fahatak
20:30Pehle se khula hua tha
20:32Jiasse kisi ne
20:33Jaan buch kar
20:34Usse adh khula
20:35Chhoda rakhha ho
20:36Kshanbhar ke liye
20:37Donoh thitkeng
20:38Phrir himmat
20:39Chuta kar
20:39Bheater qadam rakh diya
20:40Anndar ka
20:41Angan suna pada tha
20:42Niche ke kumre
20:44Jharjhar halat me thay
20:45Dhiwaron ka
20:46Palastar jhar chuka tha
20:47Khiđkiaan
20:48Toti hoi thi
20:49Or har taraf
20:50Dhul jami thi
20:50Vahean rukna
20:52Unheh thik nahi laga
20:53Tabhi
20:54Unki nazer
20:55Oopar ki manzil par gai
20:56Jahaan kai kumreo ki
20:57Qatar dikhaayi dhe rahi thi
20:59Toti siedhiyong se
21:00Sambhalte huay
21:01Vhe oopar chadhe
21:03Oopar pahunç kar
21:04Unhonee dekha
21:05Ki ee kumre
21:05Baki hissos ki
21:06Tulna me
21:07Kuch bہتر
21:08Sthiti mei tha
21:08Vohi
21:09Thayarne ka
21:10Nishjaya kiya
21:11Dhonohun ne
21:12Milkar
21:12Thoڑi bہت
21:13Sfai ki
21:13Dhul hattai
21:14Apna bistar bichaya
21:16Or bag
21:17Ek konne me
21:18Rakhdiye
21:18Phrir
21:19Vohi bẹt kar
21:20Idhar udhar ki
21:21Bاتhen karne lagay
21:22Mahal
21:23Shant tha
21:24Or
21:24Sameh dhire dhire
21:25Baitta raha
21:26Unheh pata
21:27Hi nahi
21:27Chala ki
21:28Kib ghađi ki
21:29Suyaan ho
21:29Rath ke
21:30Nau baja
21:30Chukki thi
21:32Arie
21:33Karan
21:33Dekh to
21:34Kib ke
21:34Nau baja
21:35Gaya
21:35Or
21:35Hume
21:35Pata
21:36Bhi
21:36Nahi
21:36Chala
21:36Mujhe
21:37To
21:37Ab
21:37Zor
21:39Chal
21:39Jho
21:40Khana
21:40Laya
21:40Hain
21:40Vohi
21:41Nikal
21:41Liette
21:41Vohi
21:41Vohi
21:42Dher
21:42Ho
21:42Jai
21:43Sach
21:43Me
21:44Yair
21:44Time
21:45Kies
21:45Nikal
21:45Gya
21:45Pata
21:46Hi
21:46Nahi
21:46Chala
21:46Chal
21:47Thik
21:47Hai
21:48Pahal
21:48Khaanah
21:48Khaal
21:49Liette
21:49Hai
21:49Phrir
21:50Aram
21:50Se
21:50Bait
21:50Kar
21:50Aage
21:53Khaanah
21:53Khaanah
21:54Peta
21:54Bura
21:54Rhega
21:54To
21:55Dima
21:55Bhi
21:55Thik
21:56Se
21:56Khaanah
21:56Vohi
21:57Bhu
22:06Khaanah
22:11Dok
22:14Khaanah
22:15Khaanah
22:17Khaanah
22:23Khaanah
22:31Khaanah
22:32फिर धीरे धीरे उनकी आखें बंध होने लगी बाहर गहरा सन्नाटा पसरा था बीच-बीच में हवा पुरानी दीवारों से
22:41टकरा कर अजीब सी सरसराहट पैदा कर रही थी अचानक कहीं पास से किसी जानवर की तेज और अंजानी आवाज
22:47गूंजी उसी आवाज ने करण की �
22:50He was a little tired and he was a little tired.
22:55He was a little tired and he was a little tired.
22:57If he was a little tired, then he came back again.
22:59And this is a little tired.
23:03Look, he's a little tired.
23:06Let's go.
23:08When he's a tired,
23:09I'll take a little tired.
23:11After he's got to see this.
23:24ूफ, यहां बाहर तो और भी अजीब लग रहा है
23:28हवा भी जैसे अलग सी लग रही है
23:31पता नहीं क्यों, लेकिन थोड़ा सा डर सा भी मैसूस हो रहा है
23:36अरे रहने दे, डरने से क्या होगा?
23:39इतनी दूर आये हैं तो खाली कमरे में बैठे रहने से अच्छा है
23:42थोड़ा इधर-उधर देख लिया जाए
23:45रोहित तो वैसे भी गहरी नीद में है
23:48चल करण, हिम्मत रख, आखिर एडवेंचर करने ही तो आये हो
23:53कमरे में अब भी वही धुंधली चांद नी थी
23:56लेकिन माहौल पहले से ज्यादा भारी महसूस हो रहा था
23:59करण अपने ही खयालों में डूबा, धीरे-धीरे कदम बढ़ा रहा था
24:04तब ही अचानक उसकी नजर सामने की दीवार पर पढ़ी और वह एकदम से ठिटक गया
24:09दीवार पर कुछ ऐसा दिखाई दे रहा था
24:12जिसे देखकर उसका गला सूक गया
24:15कुछ पल के लिए उसके कदम जैसे जमीन से चिपक गए
24:18उसने गहरी सांस ली, खुद को संभाला और हिम्मत चुटा कर थोड़ा आगे बढ़ा
24:23चांदनी की हल्की रोशनी दीवार पर पढ़ रही थी
24:26मगर वह चीज साफ समझ नहीं आ रही थी
24:29करन ने गरदन आगे बढ़ा कर ध्यान से देखने की कोशिश की
24:33कि आखिर दीवार पर वह अजीब सी आकरती क्या है
24:36उसका दिल तेजी से धड़क रहा था
24:39और हर कदम के साथ उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी
24:43अरे बापरे ये कैसी तस्वीर टांग रखी है यहाँ
24:47ऐसी जगा पर कोई ये सब लगाता है क्या
24:50पहले ही इस हवेली के बारे में इतना कुछ सुन रखा था
24:53वैसे ही दिल घबराय हुआ था
24:55और अब ये
24:57सच में इसे देख कर तो जान ही निकल रही मेरी
25:01पता नहीं किसकी तस्वीर है
25:03लेकिन लग तो बिलकुल भी ठीक नहीं रही
25:05यहाँ खड़ा रहना भी अजीब लग रहा है
25:07कहीं मैं बेवज़ा
25:09ज्यादा सोच तो नहीं रहा
25:10करण हवेली के भीतर
25:12यूँ ही टहलता हुआ एक हिस्से से
25:15दूसरे हिस्से में जा रहा था
25:17दीवारों पर जमी धूल
25:18और तूटी खिडकियों के बीच
25:20उसकी चाल की आहट गूंज रही थी
25:23इसी दौरान उसकी नजर
25:24एक संकरे कलियारे जैसे रास्ते पर पड़ी
25:27उत्सुक्ता में वह उसी तरफ मुड़ गया
25:29और धीरे धीरे सीधे आगे बढ़ने लगा
25:32कलियारा पार करते ही
25:34सामने का द्रिश्य देखकर वह ठहर गया
25:36दूर तक फैला वही शमशान दिखाई दे रहा था
25:39जिसकी चर्चा रास्ते में हुई थी
25:42यह द्रिश्य देखते ही
25:43उसे अचानक मंगल की कही बातें याद आ गई
25:46और उसके कदम कुछ पल के लिए थम से गए
25:51अच्छा तो यही वो जगह है जिसके बारे में
25:54मंगल भहिया बार बार मना कर रहे थे
25:57सामने यही शमशान होगा शायद
26:00उन्होंने कहा था उधर मत जाना
26:03लेकिन मैं तो बस देख ही रहा हूँ
26:06इतनी भी क्या बड़ी बात है
26:08चलो जरा पास से देख कर आता हूँ
26:11कि आखिर इसमें ऐसा क्या खास है
26:14थोड़ा और आगे बढ़ते ही
26:16करण की नजर सामने पड़ी
26:17एक सफेद परचाई के ऊपर
26:19जो हलकी सी पेड़ की आड़ में खड़ी थी
26:21पहली नजर में उसे लगा
26:23जैसे उस पेड़ के पास
26:25कोई धुंदली सी परचाई खड़ी हो
26:27वह ठिठक गया
26:28और ध्यान से देखने लगा
26:30चांदनी में वह आकृती साफ नहीं देख रही थी
26:33बस ऐसा महसूस हो रहा था
26:36मानो पेड़ के सहारे कोई
26:37हलकी सी सफेद चाया मौजूद हो
26:40करण की धड़कन तेज हो गई
26:42और उसने आँखें मलकर
26:44दोबारा उस दिशा में देखने की
26:47हम ये क्या है वहाँ
26:50पेड़ के पास कुछ
26:51सफेद सा दिख रहा है
26:53क्या सच में कोई खड़ा है
26:55या बस चांदनी का खेल है
26:58खीक से दिख क्यों नहीं रहा
27:00लगता तो है जैसे
27:01कोई परचाई हो
27:04अरे आखे भी ना
27:06शायद मैं ही ज्यादा गौर कर रहा हूं
27:08फिर भी
27:10एक बार और ध्यान से देखता हूं
27:13आखिर है क्या वहाँ
27:15हम
27:17लगता है किसी ने लोगों को डराने के लिए
27:19कोई पुतला वतुला खड़ा कर दिया है
27:22बेकार में सब इसे
27:24भूत प्रेट समझ लेते होंगे
27:26चल करन
27:27पास जाकर देख ही लेते हैं
27:29इतनी भी क्या बड़ी बात है
27:30तौर्च की रोशनी में साफ दिख जाएगा
27:32तब पता चलेगा असली राज क्या है
27:35देखो जरा
27:36अगर ये सच में पुतला निकला न
27:38तो सब की गलत फहमी दूर हो जाएगी
27:41अरे
27:42शायद हवा में हिल रहा है
27:44इसलिए डरावना लग रहा है
27:46पास जाकर ही समझाएगा
27:47जैसे ही करण ने हिम्मत चुटा कर
27:50दो कदम और आगे बढ़ाए
27:52और उस धुंदली आकरती का चेहरा देखने की कोशिश की
27:55उसी पल उसका खून जैसे जम गया
27:57चांदनी में उभरता वह चेहरा इतना डरावना था
28:00कि उसकी सांस अठक गई
28:02आँखें पहली रह गई
28:03गला सूख गया अगले ही क्षण
28:06उसके पैरों ने जवाब दे दिया
28:08और वह वहीं जमीन पर गिर पड़ा
28:10उसी समय एक खौफनाक ठाहा का
28:12पूरे हवेली में गुंज उठा
28:13वह आवाज दिवारों से टकरा कर
28:16कई गना तेज होकर लोट रही थी
28:18ऐसा लग रहा था
28:19मानुपूरी इमारत उसी हासी से काप उठी हो
28:22उस अचानक कुंजी आवाज से
28:24रोल की मींद टूट गई
28:25वह हडबडा कर उठ पैठा
28:27उसका दिल तेज धड़क रहा था
28:30मगर उसे समझ नहीं आ रहा था
28:32कि यह आवाज कहां से आई और करण कहां है
28:35कमरे का सनाटा अब पहले से ज्यादा भारी लगने लगा था
28:39ये कैसी अजीब आवास थी
28:42करण?
28:43अरे करण कहां गया?
28:45अभी तो यहीं लीटा था
28:57और वो गया कहां है
28:59रोहिद घबरा कर कमरे से बाहर निकला
29:01और इधर उधर पेचैनी से देखने लगा
29:04वो हवेली के हर कोने में
29:06करण को पुकारता हुआ भटकने लगा
29:07जैसे उसे यकीन ही ना हो
29:09कि वह अचानक यूँ गायब हो सकता है
29:11सीडियों के पास तूटी खिड़कियों के पास
29:14खाली कमरों में
29:16हर जग है
29:17उसने तलाश की
29:18मगर करण कहीं दिखाई नहीं दिया
29:20उसका डर अब घबराहट में बदल चुका था
29:23तभी अचानक तूर्श मशान की दिशा से
29:26सननाटे को चीरती हुई
29:28एक तेज चीख कुंजी
29:30वह आवाज इतनी दर्दनाग थी
29:32कि रोहित का दिल दहल उठा
29:33उसे समझने में देर नहीं लगी
29:35कि वह चीख करण की ही थी
29:38करण
29:38कहा है तू
29:40जवाब दे
29:41मजाक मत कर यार
29:42ऐसे गायब मत हो
29:44करण
29:45मैं आ रहा हूँ
29:46तू वही रोक
29:48रोहित दूर ही खड़ा होकर
29:50बार-बार करण का नाम पुकारने लगा
29:52उसकी आवाज उस वीरान हवेली में गूंज रही थी
29:55लेकिन सामने से कोई जवाब नहीं आया
30:00सीरियों पर भी नहीं
30:03इन कमरों में भी नहीं
30:05आखिर कया कहा
30:08करण
30:08एक बार आवाज तो दे
30:19उसने फिर जोर से आवाज लगाई
30:21उमीद थी कि करण उठकर कुछ कहेगा
30:24मगर करण बिलकुल स्थर पड़ा रहा
30:27न कोई हरकत न कोई प्रतिक्रिया
30:29अब रोहित की घबराहट बढ़ने लगी
30:31उसके दिल में साफ साफ डर उतर गया था
30:34उसे महसूस होने लगा कि इस जगह पर सब कुछ सामाने नहीं है
30:38यहाँ जरूर कुछ गड़बड है
30:42करण
30:43ओए उठ जा
30:44यह क्या ड्रामा लगा रखा है
30:46दूर से ही दिख रहा है तू नीचे पड़ा है
30:48मुझे डराने की कोशिश कर रहा है न
30:51चल अब उठ भी जा
30:52मजाग बन कर
30:53यह टाइम नहीं है ऐसे खेल खेलने का
30:56करण सुन रहा है न
30:59बहुत हो गया
31:00उठ और कुछ बोल
31:02ऐसे पड़े पड़े मुझे बेवकूफ मत बना
31:05अगर सच में गिरा है
31:07तो आवास तो दे
31:09रोहित जुक कर करण को उठाने की कोशिश ही कर रहा था
31:11कि अचानक उसके पीछे से
31:13एक डरावनी हंसी गुँझ उठी
31:15वह हंसी इतनी तेज और सिहरन
31:17पैदा करने वाली थी कि हवेली की
31:19दीवारें तक कांपती हुई महसूस हुई
31:21करन उठ क्या हुआ तुझे
31:25अरे ऐसे क्यों पड़ा है
31:27आखे खोल
31:28मेरी आवास सुन रहा है ना
31:31जवाब दे
31:31करन भोश में आ
31:34देख मैं यहीं हूँ
31:36उठ यार कुछ तो बोल
31:40ये ये कैसी हसी है
31:42कौन है वहाँ
31:44सामने ओ
31:45आवाज सुनते ही रोहित धीरे धीरे पलटा
31:48जैसे ही उसकी नजर पीछे पड़ी
31:50उसका चेहरा सक्त पड़ गया
31:53आखे भैल गई
31:54और होट खुलकर वहीं ठैर गए
31:57उसके सामने एक भयावह
31:58आकरती घड़ी थी
31:59सफेद लिबास में लिप्टिक
32:01लंबे दिखरे बाल चेहरे पर जूल रहे थे
32:04उस चेहरे पर ऐसी विक्टित मुस्कान थी
32:06जिसे देखकर रूह काप जाए
32:08चांदनी की ठीकी रोश्टी में
32:10वह परचाई और भी खौफनाक लग रही थी
32:13यह दृश्चे देखते ही रोहित के शरीर से
32:15जैसे सारी ताकत निकल गई
32:17उसके हाथ कापने लगे
32:19पहर सुन हो गए
32:20अगले ही पल उसकी आँखों के आगे अंधेरा चा गया
32:23और वह वहीं जमीन पर धडाम से गिर पड़ा
32:26अगली सुबह सूरज निकलने के कुछ समय बाद
32:29मंगल अपना ओंटो लेकर
32:31उसी जगह आकर रुख गया
32:32जहां पिछली रात उसने रोहित और करण को उतारा था
32:37सड़क अभी भी आधी सुनसान थी
32:39हलकी धूप पेडों के बीच से च्छनकर
32:41जमीन पर पड़ रही थी
32:43मंगल ओयंटो के सहारे खड़ा होकर
32:45बार-बार उस दिशा में देखने लगा
32:47जिधर से दोनों को वापस आना था
32:49उसके चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी
32:52रात की बात उसे चैन से सोने नहीं दे पाई थी
32:55वह कभी घड़ी देख था
32:57कभी हवेली की तरफ नजर दोड़ा था
32:59समय बीत रहा था
33:01लेकिन रोहित और करण का कहीं कोई पता नहीं था
33:05इंतजार अब बेचैनी में बदलने लगा था
33:09यही वक्ट तै हुआ था
33:11अभी तक क्यों नहीं पहुँचे दोनों
33:13इतनी देर तो लगनी नहीं चाहिए थी
33:16आखिर रुख कहा गए
33:18कहीं रास्ता भटक तो नहीं गए
33:21मुझे तो अब चिंता होने लगी है
33:22कुछ गरबड तो नहीं हो गई
33:25बस भगवान करे सब ठीक ठाक हो
33:28क्यों नहीं दिख रहे अभी तक
33:30काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी
33:33जब रोहित और करण वापस नहीं आये
33:35तो मंगल को समझा गया कि मामला ठीक नहीं है
33:38अब उसे पूरा यकीन हो चुका था
33:41कि कुछ न कुछ गडबड जरूर हुई है
33:43वह बार बार उस सुन्सान रास्ते की तरफ देखता रहा
33:47लेकिन दूर तक कोई हलचल दिखाई नहीं दे रही थी
33:50इसने तुरंत गाव के कुछ लोगों को बुलाया
33:53और बिना देर किये सब के साथ उन्हें ढूंडने निकल पड़ा
33:57सब के चेहरों पर गंभीरता थी और कदम तेज हो चुके थे
34:01थोड़ी तलाश के बाद वे दोनों मिल गए
34:04और उन्हें संभालते हुए घर वापस ले आया गया
34:07दोनों की हालत देखकर साफ लग रहा था
34:10कि रात उनके लिए आसान नहीं रही थी
34:13कुछ समय बाद करण को होश आ गया
34:15लेकिन रोहित अभी भी बेहोशी की हालत में पड़ा था
34:25मैंने तुम्हें पहले ही समझाया था कि उस तरफ जाना ठीक नहीं है
34:29हर जगह सिर्फ देखने या रोमांच के लिए नहीं होती
34:33जहां के बारे में ठीक से पता ना हो
34:35वहां कदम संभाल कर रखना चाहिए
34:38जिद में लिया गया फैसला कभी कभी भारी पड़ जाता है
34:41मंगल भाईया आप सही कह रहे थे
34:45मुझसे गलती हो गई
34:46आपकी बात हलके में ले ली
34:49आगे से बिना सोचे समझे ऐसा कदम नहीं उठाऊंगा
34:52मुझे माफ कर दीजिए
34:54पिछली रात का मंजर देख कर
34:56उनके मन में डर गहराई तक बैठ गया था
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