00:00मुझे पिसंदता है कि जिस समय जर्मनी में बैठा हुआ एक युवक्त, अमेरिका में बैठे हुए दूसरे युवक्त के साथ
00:08मिलकर, तर्की में बैठे हुए लाइक्स के सहारे, भारत को नेपाल बनाने का प्रयास कर रहा है, उस समय देश
00:15का जिवार भारत का संस्कार हो, हम
00:18हम कभी लोग है, हम सदेव इतने मीठे आपके लिए नहीं रहेंगे, राजीदिती मेरे देवे कोई निर्णा ऐसा होगा जो
00:27हमें विपरीत लगेगा, उसमें हम सारी मैत्री और भात्रत वभूलकर आपके निर्णाओं के विपरीत भूलेंगे, देवभूमे में किसी भी ए
00:50लोगोपकारी संस्क्रती रक्षक धर्म रक्षक यशश्री मुख्य मंत्री भाई श्री कुश्कर जिंधामी जी हमारी हिंदी की वाचिक परंपरा को अपनी
01:03महनी मेधा अनथक श्रम और नबाचार के माध्यम से दिरंतर संब्रिद्ध करने वाले आधी शताप्दी से साधन
01:11प्रफेसर रिशी रिक्तित्पुर्द पद्मश्री प्रफेसर डॉक्टर रशोग चक्रधर जी जागरन रस की चेतना के पिछले आधे दशक के ऐसे कवी
01:21जिनके उद्बोधन में इस देश ने अपनी चेतना को आकार लेते हुए देखा है और दिनके एक स्वर से निजाने
01:30संभावनाओं के सैक्रणों कवियों में आख खोली है ऐसे मेरे आधरिया ग्रच प्रोफेसर डॉक्टर हरियों पभार साहब इस हंच के
01:39सामने की पंक्तियों में बैठे हुए वे सब कवी जिनने पिछले तीन दशकों से दो दशकों से एक दशक से
01:48इस वाचिक परंपरा के स
01:55आत के सही होगी कुछ पीछे आने वाले और कुछ बिल्कुर नवाकत जो इस वहतरिणी में गोता लगाकर लोकप्रियता का
02:03यश का स्वांते सुखाय का मोटी दोडने का प्रियास कर रहे हैं उन सब बालकों बालिकाओं के यहां बहुत-बहुत
02:09स्वागत है बहुत-बहुत
02:22हो गया उस बालक को कभी सुनने का उससे मिलने का उसर नहीं मिला तो उसका मुझे दुख है निजी
02:28रूप से लेकिन उसके प्रती जिससे भावना हैं सबने व्यक्त की और मैंने उसकी कुछ रचनाएं पढ़ी एक संभावना का
02:35स्वरुद्वित हो गया हम सब कभी कुन की ल
02:51कि लोग आपके पुत्र की तरह हैं आपकी पुत्ली की तरह हैं हम उस बालक के श्रूप में संभिध हैं
02:56उसके माता पिता तक हमरी समद्धना पहुंचे प्रिया मित ने प्रिय कुशल ने पियूश ने ये कारिकन पिछले
03:04पांच वर्षों में इसकी सेयोजना सजाई और आज देश भर के बहुत सारे कवी कवियत्री यहां परिकत्वित होते हैं दो
03:10तीन दिन में मंध्थन करते हैं
03:12मैं चुभी कविकुल की और से हूँ इस नेमंच पर बेटे हुए अपने आधरनिये दोनों कवियों का आभार गत्त करना
03:18मेरी पारिवारिक परणपर के विबरीत होगा लेकिन राजनीती के क्षित्र से एक महत्पून गत्त्व ने यहां यह स्रीकार किया केवल
03:26पांच दिन प
03:40कभी आएंगे आप कहा हैं उन्होंने कहा कि नहीं कुमार भाई अगर कभी आएंगे तो मुझे तो जाना चाहिए आप
03:45क्या कहते हैं मैंने का जाना चाहिए कि ऐसा मुख्यमंत्री जो शब्द के स्वागत में जैरानों से यहां विशेश उप
03:51से उड़कर आया है उसे आपक
04:01पिछले 25 वर्ष से अधिक का मेरा उनका संपर्क है मुक्तिश्वर में एक गेस्टाउस वाकरता था कड़वार बिकास निगमकार इसमें
04:10केवल दो कक्ष थे तो मैं अपनी एक ही बेटी थी उसको लेकर मारूती अटेंड़ेट चलाता हुआ उसके दोनों कक्षां
04:18को बुक क
04:18करके वहां रुपने के लिए पहुचा उस समय के बहुत लोकप्री नेता जंता के नेता और बड़े ही आधरणीय नेता
04:27मुख्यमंत्री भी रहे राज्यपाल भी रहे अचानक रात्री में उनका प्रवास लों गया और मुझे वहां के प्रबंदर ने कहा
04:33कि दौनों काक्ष
04:43में ले रखे हैं कमरे हम कहा सुनेंगे मैं ने का एक कर्षन आप सुझाएगे तो फिर उस समय उन
04:49से परिचे हुआ और तब से लेकर राजमीती मोतार चड़ावा है मैं भी कुछ दिन उस गल्यारे में भटक के
04:54रापिस लोड़ा लेकिन हमारा संबाद संपर्ग अनवरत जा
05:12भारत को नेपाल बनाने का प्रयास कर रहा है उस समय देश का लिवार भारत का संस्कार यहां मैंने आपदा
05:28के समय की देवभू में भी देखी है आपदा अठारे तारिक को आई थी 21 तारिक को हम लोग यहां
05:34100 डॉक्टरों की टीम लेकर आ गया थे और कुछ गाम तो मुख्
05:39अरफ पंत्री जी ऐसे थे नाराण बगड जैसे जो आदे बह गये थे जहां पहले बार हम लोग ही पहुँचे
05:47थे कभी लोग ही पहुचे थे उत्रागर देवभूमी है जो वियास्तिक है विश्युभर में जो डाई सो करो सनात्मी है
05:53जिनको भी प्रकरती सिप्रेम है वो �
05:57हमारा फित्र परव है हमारे मुज़ुगों की जगए है बाबा बदरी केदार की जगए है हमारी मा गंगा यहां से
06:02प्रकट के परव पाती है लेकिन यहां जिस तरह का स्यकार आपने स्थाफित किया इसलिए नहीं कि आपके प्रती आत्मियता
06:09है पूरे देश नोस की चर्च
06:26जो आपके विपक्ष में हैं वो भी आपकी सदा शेयता की आपकी विनम्रता की आपकी सहज भुपलब्ध हो जाने की
06:33प्रिशंशातरते हैं हम कमी लोग है हम सदय इतने मीठ है आपके लिए नहीं रहेंगे
06:40राजी निती पेरे देवे कोई निर्णा ऐसा होगा जो हमें विप्रीट लगेगा उसमें हम सारी मैत्री और भात्रत वभूलकर आपके
06:48निर्णाओं के विप्रीट भूलेंगे
07:01जब जब आप उसे स्विकार करेंगे तब तब हम मानेंगे कि आप अपने परिवार में इस सत्र के बाद चर्चा
07:09करेंगे तो आप परिवार की बातें करेंगे
07:11इस सब्सक्राइब तो प्रदेश के मुखी आएं हैं अगर उन्होंने ये बात कहिए कि कभी समिर्णाओं का भविश्य अथा है
07:17दुबारा युवाओं की उपस्तिती हो रही है दुबारा लोग आ रहे हैं तो देश किसी बी स्तिती में हो कुछ
07:24भी हो हम यह मानने के लिए �
07:37प्रदेश को आकार लेने में जिन लोगों का योगदान है जिन कभीयों का जिन साहित्यकौरों का उनकी परंपरा इन कभीयों
07:44में चाक्रित रहेगी यह वरिश्टा का क्रम है जिसके कारण
07:49यह दो प्रतिवा समफंद लोग और एक मैं कभ प्रतिवा का व्यक्ति उपर बैठा हूँ समय बदलेगा तो जो पीछे
07:56सबसे पीछे बढ़िया बैठी है कोई जो बच्चा बैठा है अभी जना के पांच लिखा हुआ है इसके 25 में
08:04समाहार में इसके 20 में समाहार में दृष
08:20अभी जना कोई और कभी मंच पर थे जिनका हमने सम्मान किया अजय अशोग जी एक आदिश रताती हमें देकर
08:28यहां मंच पर हैं हर्यों भाई साब यहां पर मंच पर हैं किंचित लोग प्रियता के कारण आप लोग में
08:34बुझे इतना सही देते हैं परिवार के साथी होने के
08:38अभी मंच पर देश की धर्म की बड़ी गती है पूरे भारत में आपकी लोग प्रियता है इस जगे का
08:43बड़ा मान है संस्कति यहां की अद्भुत है सहिंत्यकार भी यहां अद्भुत हैं हम तो कभी होने के नाथ जब
08:49कोई किसी कारकर में बढ़ा आती ती आजाता है तो ल
09:07इसलिए मुख्यमत्री जी निगाता मैं टाइम पे निकल लूँना तो यह प्राकर्तिक शुष्वा का प्रदेश है एक कभी को रचने
09:17के लिए उर्धु की आवश्यक्ता होती है कभी तब रचता है जब वो पनी चेतना के उर्धु पर पहुंचता है
09:23जब वो जमीनी हज़
09:25प्रदूशन से कड़ जाता है कोलाहल से कड़ जाता है भीड से कड़ जाता है और पूरे भारत में अगर
09:31कोई एक जगह है जहां इसकी संभावनाएं है अध्यत्मिक चेतना के साथ प्रगर्दिक संपूर विन्यास के साथ तुम देव भूमी
09:37है आपसे एक अनमोद है कि दे
09:42अपने पशों का आतंक हो जहां शेर चीते भी आते हैं हमें उनसे भी डन नहीं लगता है हमने इतने
09:48जहले को उनसे क्या डब लेगेगा है तो ऐसी कोई भी जगह चुटकर एक छोटा सा तुकडा भूमी का इन
09:59कवियों के लिए आविंपित कीजिए जहां कवियों का एक सब
10:40और
10:44हमें कुछ जगह दे दीजिए सब उसके निर्माड के लिए हम आपसे नहीं कहेंगे हम सब कर लेंगे मैं स्वेयम
10:50विजी तौर पर एक करोड रुपे की घोशना करता हूं कि वैद
11:00अगर हमें अगर हमें इसंदे अन्या कम रही है और किसी का मन करता है बिल्कुल छोटे बच्चे हैं हमारी
11:10तीसरी पीड़ी बैठी
11:11डॉक्टर दुबे बैठी है तो डॉक्टर दुबे की पीछे हमारी दूसरी बिटी अभी बैठी है जो कविता में प्रवेश कर
11:15रही है किसी बच्चे का मन करता है कि तीन कविता है लिकिन शोर शराबा बहुत है कहां जाएं तो
11:21उत्तरा खड़ी में इतना दिविय वातावर�
11:36निवास रख देंगे और को रहएं तो अश। करना हैं हमको हमने यतने देवताव कि तु सुझी करी ह Herrn
11:45इतना इतों करना है कि चारविया है जूटी प्रशंशा करनी पड़े करदें वह बहुत कि अ ज
12:00कर लेंगे और मैं आशा करता हूं देखिए राजनेती के लोग मेरी बात मान ही लें संभव नहीं है बहुत
12:08बाद लेकिन आदर्णिये मुख्यवलत जी जी का मेरे पृदि इसने है वो बड़ा मानते हूं सदिकार से मैंने आपके क्यों
12:15कि आप नहीं करें गई आचना मुझे �
12:17है जो हमारे चोटे बाई बेनाएं और जो हमारे साथी वरिष्ट हैं वो भी एक प्रदान कर देंगे क्योंकि अब
12:33कभी किसी से मांगने की स्थिती में नहीं है वो कि मद्री जे लोग बैटे चार सो मिलिए ये लोग
12:41जो बैटे हैं कि गेड़ सो करोड इसलिए कि इनमें एक
12:44कभी को सुनने के लिए 50-50,000 आत्मी आता हैं यह सब लोग बैटे हैं यह जब खड़े होते
12:50हैं मंचों का यह मेरे भी सामने मेरे आनुच बैटे मेरे मिंद्र बैटे में पीचे आशिश बाई बैट यह सब
12:55खड़े होते हैं बोलने के लिए वह बहुत हमारा आप नहीं आरा
13:14युग के चारण अगर आपकी प्रशेंशा करें तो आप तो क्षत्री हैं आपका वैसी विए अधिकार बनता है कि कड़ा
13:19निकाल जो लाए लोगारा है कि या रखता है इसलिए आनन्द के साथ मैंने रिदन के लिए आप अधारे हमें
13:32बड़ा आनन्द आया आपका यश और
13:34दो पड़े आप इसी प्रकार दोय भूमी की सेवा करते रहे भारत की सेवा करते रहे मद्यबारत से लेकर चत्रीदर
13:39से आपने प्रिवास प्रिवास कि अलगनों में आप बढ़े हैं बुन्देली इतनी एच्छी बोलते हैं अभी शर्षी से बात कर
13:44रहे थे अच्छी बं�
14:02और और मैं आशा करता हूं कि दो चार पांच अभिवेंजना बाद अभिवेंजना आठ अभिवेंजना नो हम ऐसे किसी हमारा
14:11यह प्रियेच अनुजय इसने बड़ी सुनियजित तरीके से आयोजन किया कि मेरिया कर दीजिए नमस्ते कॉद्वेट में बहुती नियूंतम प्य
14:29अब यह मैंनेजर भूर रहा है पर सोंब आज जाओ इसका मन है रुख जाए इसका मन करें ना रुख
14:34जाए अपने का भी कुछ पता नहीं कब सन्याज लेना अपने भी वह जाकर दमा लेंगे आप रहें आपके रहाँ
14:39हैं इसी प्रकार आप कभियों से इसने मनाई रखिए
14:44हो इसने मनाया विंध एंगे अगले तीन दिन हम सब लोग सत्र के बाद अब फिर बैठेंगे आधरणिया रुख जी
14:50का मदम आपकर हैं हमारे जो देखेंगे他ा लग-अलग क�� सिंपर बिच्व करेंगे घीत का
15:00सत्र है
15:00यहां है और बड़े मन से तीन दिन का अउकाश बैंगा I can't
15:04और हिंदी कैसे जाए कि शुड़ी संभेलन कैसे होगा भारब गारब उसका है पूरी परब्बरा है हमारी और हम समने
15:26इतना
15:27श्रम करके आज यहां पहुंचाया एक प्रदेश के मुख्यमंत्री, हमारे बर्शीबया सामने आये हैं, रजी, हमारे संगधन के सारे तमाम
15:34मित्राय हैं, आप सबने हमें समझा कभियों को कभी हां आपके प्रती अभारगत करते हैं, और आपने समय निकाला इसके
15:42लिए पूर
15:57हुस्छा हुस्ट करते हैं, प्रिक्षाह टाया भारुणाओ मित्रात करते हैं, और आपके बेश्टराह मित्राभते हैं, प्रूल करते हैं, और रे
15:59आपके इस हivil मित्कै
Comments