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Abhivyanjana 5.0 के मंच से Kumar Vishwas ने अपने अंदाज में बड़ा सियासी तंज कसा। उन्होंने Germany, America और Turkey के likes का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग भारत को Nepal बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बयान को CJP, Abhijeet और Dhruv Rathee वाले online campaign से जोड़कर देखा जा रहा है। Nainital में दिए गए इस unfiltered बयान ने सियासी चर्चा तेज कर दी है।

At Abhivyanjana 5.0 in Nainital, Kumar Vishwas delivered a sharp political satire, referring to people sitting in Germany, America and Turkey trying to turn India into Nepal through online likes. The remark is being linked to the CJP, Abhijeet and Dhruv Rathee online campaign angle. His unfiltered statement has sparked fresh political discussion.

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~GR.538~HT.408~VG.HM~

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00:00मुझे पिसंदता है कि जिस समय जर्मनी में बैठा हुआ एक युवक्त, अमेरिका में बैठे हुए दूसरे युवक्त के साथ
00:08मिलकर, तर्की में बैठे हुए लाइक्स के सहारे, भारत को नेपाल बनाने का प्रयास कर रहा है, उस समय देश
00:15का जिवार भारत का संस्कार हो, हम
00:18हम कभी लोग है, हम सदेव इतने मीठे आपके लिए नहीं रहेंगे, राजीदिती मेरे देवे कोई निर्णा ऐसा होगा जो
00:27हमें विपरीत लगेगा, उसमें हम सारी मैत्री और भात्रत वभूलकर आपके निर्णाओं के विपरीत भूलेंगे, देवभूमे में किसी भी ए
00:50लोगोपकारी संस्क्रती रक्षक धर्म रक्षक यशश्री मुख्य मंत्री भाई श्री कुश्कर जिंधामी जी हमारी हिंदी की वाचिक परंपरा को अपनी
01:03महनी मेधा अनथक श्रम और नबाचार के माध्यम से दिरंतर संब्रिद्ध करने वाले आधी शताप्दी से साधन
01:11प्रफेसर रिशी रिक्तित्पुर्द पद्मश्री प्रफेसर डॉक्टर रशोग चक्रधर जी जागरन रस की चेतना के पिछले आधे दशक के ऐसे कवी
01:21जिनके उद्बोधन में इस देश ने अपनी चेतना को आकार लेते हुए देखा है और दिनके एक स्वर से निजाने
01:30संभावनाओं के सैक्रणों कवियों में आख खोली है ऐसे मेरे आधरिया ग्रच प्रोफेसर डॉक्टर हरियों पभार साहब इस हंच के
01:39सामने की पंक्तियों में बैठे हुए वे सब कवी जिनने पिछले तीन दशकों से दो दशकों से एक दशक से
01:48इस वाचिक परंपरा के स
01:55आत के सही होगी कुछ पीछे आने वाले और कुछ बिल्कुर नवाकत जो इस वहतरिणी में गोता लगाकर लोकप्रियता का
02:03यश का स्वांते सुखाय का मोटी दोडने का प्रियास कर रहे हैं उन सब बालकों बालिकाओं के यहां बहुत-बहुत
02:09स्वागत है बहुत-बहुत
02:22हो गया उस बालक को कभी सुनने का उससे मिलने का उसर नहीं मिला तो उसका मुझे दुख है निजी
02:28रूप से लेकिन उसके प्रती जिससे भावना हैं सबने व्यक्त की और मैंने उसकी कुछ रचनाएं पढ़ी एक संभावना का
02:35स्वरुद्वित हो गया हम सब कभी कुन की ल
02:51कि लोग आपके पुत्र की तरह हैं आपकी पुत्ली की तरह हैं हम उस बालक के श्रूप में संभिध हैं
02:56उसके माता पिता तक हमरी समद्धना पहुंचे प्रिया मित ने प्रिय कुशल ने पियूश ने ये कारिकन पिछले
03:04पांच वर्षों में इसकी सेयोजना सजाई और आज देश भर के बहुत सारे कवी कवियत्री यहां परिकत्वित होते हैं दो
03:10तीन दिन में मंध्थन करते हैं
03:12मैं चुभी कविकुल की और से हूँ इस नेमंच पर बेटे हुए अपने आधरनिये दोनों कवियों का आभार गत्त करना
03:18मेरी पारिवारिक परणपर के विबरीत होगा लेकिन राजनीती के क्षित्र से एक महत्पून गत्त्व ने यहां यह स्रीकार किया केवल
03:26पांच दिन प
03:40कभी आएंगे आप कहा हैं उन्होंने कहा कि नहीं कुमार भाई अगर कभी आएंगे तो मुझे तो जाना चाहिए आप
03:45क्या कहते हैं मैंने का जाना चाहिए कि ऐसा मुख्यमंत्री जो शब्द के स्वागत में जैरानों से यहां विशेश उप
03:51से उड़कर आया है उसे आपक
04:01पिछले 25 वर्ष से अधिक का मेरा उनका संपर्क है मुक्तिश्वर में एक गेस्टाउस वाकरता था कड़वार बिकास निगमकार इसमें
04:10केवल दो कक्ष थे तो मैं अपनी एक ही बेटी थी उसको लेकर मारूती अटेंड़ेट चलाता हुआ उसके दोनों कक्षां
04:18को बुक क
04:18करके वहां रुपने के लिए पहुचा उस समय के बहुत लोकप्री नेता जंता के नेता और बड़े ही आधरणीय नेता
04:27मुख्यमंत्री भी रहे राज्यपाल भी रहे अचानक रात्री में उनका प्रवास लों गया और मुझे वहां के प्रबंदर ने कहा
04:33कि दौनों काक्ष
04:43में ले रखे हैं कमरे हम कहा सुनेंगे मैं ने का एक कर्षन आप सुझाएगे तो फिर उस समय उन
04:49से परिचे हुआ और तब से लेकर राजमीती मोतार चड़ावा है मैं भी कुछ दिन उस गल्यारे में भटक के
04:54रापिस लोड़ा लेकिन हमारा संबाद संपर्ग अनवरत जा
05:12भारत को नेपाल बनाने का प्रयास कर रहा है उस समय देश का लिवार भारत का संस्कार यहां मैंने आपदा
05:28के समय की देवभू में भी देखी है आपदा अठारे तारिक को आई थी 21 तारिक को हम लोग यहां
05:34100 डॉक्टरों की टीम लेकर आ गया थे और कुछ गाम तो मुख्
05:39अरफ पंत्री जी ऐसे थे नाराण बगड जैसे जो आदे बह गये थे जहां पहले बार हम लोग ही पहुँचे
05:47थे कभी लोग ही पहुचे थे उत्रागर देवभूमी है जो वियास्तिक है विश्युभर में जो डाई सो करो सनात्मी है
05:53जिनको भी प्रकरती सिप्रेम है वो �
05:57हमारा फित्र परव है हमारे मुज़ुगों की जगए है बाबा बदरी केदार की जगए है हमारी मा गंगा यहां से
06:02प्रकट के परव पाती है लेकिन यहां जिस तरह का स्यकार आपने स्थाफित किया इसलिए नहीं कि आपके प्रती आत्मियता
06:09है पूरे देश नोस की चर्च
06:26जो आपके विपक्ष में हैं वो भी आपकी सदा शेयता की आपकी विनम्रता की आपकी सहज भुपलब्ध हो जाने की
06:33प्रिशंशातरते हैं हम कमी लोग है हम सदय इतने मीठ है आपके लिए नहीं रहेंगे
06:40राजी निती पेरे देवे कोई निर्णा ऐसा होगा जो हमें विप्रीट लगेगा उसमें हम सारी मैत्री और भात्रत वभूलकर आपके
06:48निर्णाओं के विप्रीट भूलेंगे
07:01जब जब आप उसे स्विकार करेंगे तब तब हम मानेंगे कि आप अपने परिवार में इस सत्र के बाद चर्चा
07:09करेंगे तो आप परिवार की बातें करेंगे
07:11इस सब्सक्राइब तो प्रदेश के मुखी आएं हैं अगर उन्होंने ये बात कहिए कि कभी समिर्णाओं का भविश्य अथा है
07:17दुबारा युवाओं की उपस्तिती हो रही है दुबारा लोग आ रहे हैं तो देश किसी बी स्तिती में हो कुछ
07:24भी हो हम यह मानने के लिए �
07:37प्रदेश को आकार लेने में जिन लोगों का योगदान है जिन कभीयों का जिन साहित्यकौरों का उनकी परंपरा इन कभीयों
07:44में चाक्रित रहेगी यह वरिश्टा का क्रम है जिसके कारण
07:49यह दो प्रतिवा समफंद लोग और एक मैं कभ प्रतिवा का व्यक्ति उपर बैठा हूँ समय बदलेगा तो जो पीछे
07:56सबसे पीछे बढ़िया बैठी है कोई जो बच्चा बैठा है अभी जना के पांच लिखा हुआ है इसके 25 में
08:04समाहार में इसके 20 में समाहार में दृष
08:20अभी जना कोई और कभी मंच पर थे जिनका हमने सम्मान किया अजय अशोग जी एक आदिश रताती हमें देकर
08:28यहां मंच पर हैं हर्यों भाई साब यहां पर मंच पर हैं किंचित लोग प्रियता के कारण आप लोग में
08:34बुझे इतना सही देते हैं परिवार के साथी होने के
08:38अभी मंच पर देश की धर्म की बड़ी गती है पूरे भारत में आपकी लोग प्रियता है इस जगे का
08:43बड़ा मान है संस्कति यहां की अद्भुत है सहिंत्यकार भी यहां अद्भुत हैं हम तो कभी होने के नाथ जब
08:49कोई किसी कारकर में बढ़ा आती ती आजाता है तो ल
09:07इसलिए मुख्यमत्री जी निगाता मैं टाइम पे निकल लूँना तो यह प्राकर्तिक शुष्वा का प्रदेश है एक कभी को रचने
09:17के लिए उर्धु की आवश्यक्ता होती है कभी तब रचता है जब वो पनी चेतना के उर्धु पर पहुंचता है
09:23जब वो जमीनी हज़
09:25प्रदूशन से कड़ जाता है कोलाहल से कड़ जाता है भीड से कड़ जाता है और पूरे भारत में अगर
09:31कोई एक जगह है जहां इसकी संभावनाएं है अध्यत्मिक चेतना के साथ प्रगर्दिक संपूर विन्यास के साथ तुम देव भूमी
09:37है आपसे एक अनमोद है कि दे
09:42अपने पशों का आतंक हो जहां शेर चीते भी आते हैं हमें उनसे भी डन नहीं लगता है हमने इतने
09:48जहले को उनसे क्या डब लेगेगा है तो ऐसी कोई भी जगह चुटकर एक छोटा सा तुकडा भूमी का इन
09:59कवियों के लिए आविंपित कीजिए जहां कवियों का एक सब
10:40और
10:44हमें कुछ जगह दे दीजिए सब उसके निर्माड के लिए हम आपसे नहीं कहेंगे हम सब कर लेंगे मैं स्वेयम
10:50विजी तौर पर एक करोड रुपे की घोशना करता हूं कि वैद
11:00अगर हमें अगर हमें इसंदे अन्या कम रही है और किसी का मन करता है बिल्कुल छोटे बच्चे हैं हमारी
11:10तीसरी पीड़ी बैठी
11:11डॉक्टर दुबे बैठी है तो डॉक्टर दुबे की पीछे हमारी दूसरी बिटी अभी बैठी है जो कविता में प्रवेश कर
11:15रही है किसी बच्चे का मन करता है कि तीन कविता है लिकिन शोर शराबा बहुत है कहां जाएं तो
11:21उत्तरा खड़ी में इतना दिविय वातावर�
11:36निवास रख देंगे और को रहएं तो अश। करना हैं हमको हमने यतने देवताव कि तु सुझी करी ह Herrn
11:45इतना इतों करना है कि चारविया है जूटी प्रशंशा करनी पड़े करदें वह बहुत कि अ ज
12:00कर लेंगे और मैं आशा करता हूं देखिए राजनेती के लोग मेरी बात मान ही लें संभव नहीं है बहुत
12:08बाद लेकिन आदर्णिये मुख्यवलत जी जी का मेरे पृदि इसने है वो बड़ा मानते हूं सदिकार से मैंने आपके क्यों
12:15कि आप नहीं करें गई आचना मुझे �
12:17है जो हमारे चोटे बाई बेनाएं और जो हमारे साथी वरिष्ट हैं वो भी एक प्रदान कर देंगे क्योंकि अब
12:33कभी किसी से मांगने की स्थिती में नहीं है वो कि मद्री जे लोग बैटे चार सो मिलिए ये लोग
12:41जो बैटे हैं कि गेड़ सो करोड इसलिए कि इनमें एक
12:44कभी को सुनने के लिए 50-50,000 आत्मी आता हैं यह सब लोग बैटे हैं यह जब खड़े होते
12:50हैं मंचों का यह मेरे भी सामने मेरे आनुच बैटे मेरे मिंद्र बैटे में पीचे आशिश बाई बैट यह सब
12:55खड़े होते हैं बोलने के लिए वह बहुत हमारा आप नहीं आरा
13:14युग के चारण अगर आपकी प्रशेंशा करें तो आप तो क्षत्री हैं आपका वैसी विए अधिकार बनता है कि कड़ा
13:19निकाल जो लाए लोगारा है कि या रखता है इसलिए आनन्द के साथ मैंने रिदन के लिए आप अधारे हमें
13:32बड़ा आनन्द आया आपका यश और
13:34दो पड़े आप इसी प्रकार दोय भूमी की सेवा करते रहे भारत की सेवा करते रहे मद्यबारत से लेकर चत्रीदर
13:39से आपने प्रिवास प्रिवास कि अलगनों में आप बढ़े हैं बुन्देली इतनी एच्छी बोलते हैं अभी शर्षी से बात कर
13:44रहे थे अच्छी बं�
14:02और और मैं आशा करता हूं कि दो चार पांच अभिवेंजना बाद अभिवेंजना आठ अभिवेंजना नो हम ऐसे किसी हमारा
14:11यह प्रियेच अनुजय इसने बड़ी सुनियजित तरीके से आयोजन किया कि मेरिया कर दीजिए नमस्ते कॉद्वेट में बहुती नियूंतम प्य
14:29अब यह मैंनेजर भूर रहा है पर सोंब आज जाओ इसका मन है रुख जाए इसका मन करें ना रुख
14:34जाए अपने का भी कुछ पता नहीं कब सन्याज लेना अपने भी वह जाकर दमा लेंगे आप रहें आपके रहाँ
14:39हैं इसी प्रकार आप कभियों से इसने मनाई रखिए
14:44हो इसने मनाया विंध एंगे अगले तीन दिन हम सब लोग सत्र के बाद अब फिर बैठेंगे आधरणिया रुख जी
14:50का मदम आपकर हैं हमारे जो देखेंगे他ा लग-अलग क�� सिंपर बिच्व करेंगे घीत का
15:00सत्र है
15:00यहां है और बड़े मन से तीन दिन का अउकाश बैंगा I can't
15:04और हिंदी कैसे जाए कि शुड़ी संभेलन कैसे होगा भारब गारब उसका है पूरी परब्बरा है हमारी और हम समने
15:26इतना
15:27श्रम करके आज यहां पहुंचाया एक प्रदेश के मुख्यमंत्री, हमारे बर्शीबया सामने आये हैं, रजी, हमारे संगधन के सारे तमाम
15:34मित्राय हैं, आप सबने हमें समझा कभियों को कभी हां आपके प्रती अभारगत करते हैं, और आपने समय निकाला इसके
15:42लिए पूर
15:57हुस्छा हुस्ट करते हैं, प्रिक्षाह टाया भारुणाओ मित्रात करते हैं, और आपके बेश्टराह मित्राभते हैं, प्रूल करते हैं, और रे
15:59आपके इस हivil मित्कै
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