00:00ठीक वैसे जैसे बकरीद पर कुर्वानी की बात जायज नहीं है
00:05वैसे ही अगर मंदिरों में भली हो रही है तो वो बात भी जायज नहीं है
00:07और हमने उसका भी विरोद करा है ना बिलकुर
00:12यहां बात हिंदू-मुस्लिम की नहीं है
00:14वो जो सामने आपके एक जीव है उसके आँखों में देखों
00:17उसको क्या फरक पड़ता है कि उसका जटका हुआ कि हलाल हुआ
00:22वो तो जान से गया ना
00:25और उसने कुछ ऐसा गुनाह नहीं कर दिया था कि आपने उसको मार दिया
00:28और उसको मार करके आपको कोई पुर्णे कहीं से नहीं मिल गया
00:32थोड़ा तो विचार करो
00:33इससे आपको कौन सा पुर्णे मिल जाएगा
00:35कैसे हो सकता है यह काम चाहे हिंदू करे चाहे मुस्लिम करे कोई करे
00:38जितने भी धर्मों में हिंसा है और जानवरों के साथ अत्याचार है
00:43उन्हें सभी का विरोध किया है
00:44आप जानते हैं बहुत सारे ऐसे मंदिर हैं
00:47जहां पहले पशुवली दी जाती थी
00:50पर वहाँ पर बरसों तक समझाने बुझाने का
00:56ये प्रभाव पड़ा है कि वहाँ पर अब वो पशुवली की जगह है
00:59तो गन्ना काट देते हैं
01:01गयते हैं चलो काट नहीं है तो संकेतिक रूप से
01:03हम किसी और जीज को काट देंगे
01:05संकेत हो गया और ईश्वर नहीं कह रहा है
01:08कि मुझे किसी बेगुना जीव के रक्त में सनान करना है
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