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Transcript
00:00पेंडी गड़ की पाग जबे पर, पिछी है नूर की चादर, अदब से जुका है शीश यहाँ, दिल में है
00:08बिहत आदर, महें कुधी है सुपी हवाई, खुशियों का पैगाम लिए, पलके बिछाए बैठे हैं हम, आथों में सत्कार हैं
00:30एहिंकार की टूटी दिवारें, जागा है अब सोता भार, छिड़ गया है अंतर मन में प्रेम का वो अनुखाराद
00:43सजदा करते हैं दिल से हम, पभूल कीजी ये बंदगी, आचारेजी की चर्णों में अरपन नहीं से
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