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SPIEF 2026: आर्थिक प्रतिबंध से यूक्रेन जंग तक, पुतिन ने दिया आजतक के हर सवाल का जवाब, देखें

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00:00नमस्कार, नमस्ते, द्रास्त विथिया, हलो
00:12माननीय राश्ट्रपती पुतिन, मेरा आप से प्रश्न है कि इस कक्ष में 130 देशों के प्रतिनिधी मौजूद है
00:20और जब विश्वरूस के आर्थिक रूप से अलग थलग होने की बात करता है
00:25तो क्या यह वास्तव में उस तरह का प्रतीत होता है
00:28और क्षमा करें, मैं आप से सीधे पूछ रही हूँ
00:34कि क्या रूस अलग थलग है या आज यूरोप आंशिक रूप से अलग थलग है
00:45आपने मुझे संकेत दिया है कि मुझे अपने उत्तर में क्या शामिल करना चाहिए
00:49इसके लिए धन्यवाद
00:56मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि यह बिलकुल स्पष्ट है कि रूस कभी अलग थलग हुआ ही नहीं
01:05इस अलगाव की शुरुआत अमेरिका के पूर प्रशासन ने की थी
01:08यह बात सभी जानते हैं और फिर यूरोपिय देशों ने
01:12और वर्तमान में वो अमेरिकी प्रशासन से भी अधिक सफल है
01:15लेकिन शुरुआत में ऐसा नहीं था
01:17और अमेरिका सहित कुछ साज़ेदारों के सहयोग से
01:20हम यहां अलग थलग नहीं पड़ें
01:35हमारे प्रतिनिधी यहां मौजूद है
01:38एक उर्जा कंपनी और पूर्व अमेरिकी प्रशासन
01:41हमारी परियोजना का विरोध करने की कोशिश कर रहा था
01:45लेकिन जैसे ही यह परियोजना शुरू हुई
01:47सबसे पहले अमेरिका को भेजा गया
01:49फिर यूरेनियम
01:50जी हां हम यूरेनियम की आपूरती कर रहे हैं
01:53वो भी अमेरिकी बाजार मैं
01:59मातरा के हसाब से पहले स्थान पर एक अमेरिकी कंपनी है
02:03फिर यूरोपिये और अमेरिकी पूंजी की भागीदारी वाली एक अंतरराश्ट्रिय कमपनी है और मात्रा के हिसाब से तीसरे स्थान पर
02:11एक रूसी कमपनी है
02:23अब तक तो सब कुछ ठीक चल रहा है वे व्यावारिक हैं और हमें उन्हें एक उदाहरन के रूप में
02:30लेना चाहिए
02:31इसलिए जब भी उन्हें लाब हुआ काम चलता रहा हम अभी भी रूसी सुदूर पूर्व में उन देशों के साथ
02:38औरजा परियोजनाएं जारी रखे हुए हैं जिन्होंने आपचारिक रूप से अपनी वापसी की घोशना कर दी है फिर भी वो
02:46इन परियोजनाओं में बने
03:01नहीं कर रहा हूं बलकि अपने विश्वसनिय साजेदारों की भी बात कर रहा हूं जैसे अफ्रीकी देश एशियाई देश जिन
03:11में से एक भारत खुद है जिसने कभी भी विदेश से कोई आदेश नहीं माना है साथ ही मैं पीपल्स
03:18रिपब्लिक ओफ चाइना की भी बात कह
03:30पर कभी सवाल नहीं उठाया जा सकता जहां तक अंतरराश्ट्रिय संगठनों की बात है हम अपने साजेदारों और एतिहासिक पडोसियों
03:39के साथ काम कर रहे हैं इसलिए सब कुछ आगे बढ़ रहा है
03:49हमें ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है और जैसा कि आपने बताया हमें अमेरिका के आधिकारिक प्रतिनिधी दिखाई दे रहे हैं
03:55मुझे पता है कि वे यूरोप के प्रतिनिधी हैं और ये एक ऐसी बात है जिसका हम स्वागत करते हैं
04:02हमने कभी भी खुद को किसी से अलग नहीं किया है और अगर स्थिती इस तरह बदली है कि हमें
04:07इन देशों के लोग मिले हैं तो हम जरूर इसका स्वागत करेंगे
04:22मैं आर्थिक प्रशनों पर ही रहना चाहती हूँ लेकिन एक पत्रकार होने के नाते
04:26मुझे आपसे ये पूछना होगा कि यूक्रेन के राष्ट्रपती वॉलोडिमिर जलेंस्की ने एक खुला पत्र लिखा है
04:33और उन्होंने न सिर्फ आपसे सीधी बातचीत का प्रस्ताव रखा है बलकि आपको सीधी धमकी भी दी है और इसे
04:40आपका युद्ध बताया है
04:56कि यह युद्ध आपकी निजी पसंद है एक ऐसा युद्ध जिसका कोई वास्त्विक कारण नहीं है जलेंस्की कहते हैं कि
05:04आप युद्ध से सहज हैं उनका कहना है कि आपके लिए आपका अपना जीवन मूलिवान है
05:10साथ ही उन्होंने आपके और उनके बीच एक बैठक के लिए एक निश्चित तारीख तै करने का प्रस्ताव रखा है
05:17इस पर आप क्या कहेंगे
05:28जहां तक मेरे आवाज या परेड का सवाल है ये मेरा निजी मामला नहीं है इसके अलावा उन्होंने पहले से
05:33कुछ जानकारी दी थी
05:37उन्होंने कहा कि हमें पता था कि आप आवास पर नहीं होंगे
05:40सवाल ये है कि उन्होंने ऐसा किया ही क्यों
05:43मेरे प्रेस सचिव ने कल मुझे यह पत्र दिखाया था
05:52हमने उजबेकिस्तान के राश्ट्रपती के साथ लंच किया
05:54सच कहूं तो मुझे विस्तार से देखने का मौका नहीं मिला
05:58पेसकोव ने आज सुबह मुझे इस पत्र के बारे में फिर से बताया
06:01मैंने उस पर सरसरी नजर डाली
06:03मैंने उसे सरसरी तोर पर पढ़ा
06:11इसलिए कुछ ही बातें ऐसी हैं जिन पर मैं ध्यान दे पाया
06:14पहली बात ये पत्र लिखने वाले ने मेरी उम्र का जिक्र किया है
06:18मैं क्या कहूं खैर हर किसी को अपनी उम्र के बारे में सोचना चाहिए
06:22लेकिन मेरा मानना है कि मेरी उम्र में भी कई अन्य राजनीतिक हस्तियाएं अपना काम बखूबी निभा रही है
06:28उन में से कुछ मुझसे उम्र में बड़े हैं
06:30खैर उम्र महत्वपूर्ण है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण नहीं
06:42सबसे खास बात ये है कि क्या आप ठीक से काम करने में सक्षम हैं
06:47अपना काम ठीक से कर रहे हैं
06:49तो मेरे कुछ सहकर्मी हैं जो उम्र में बड़े हैं
06:52और अभी भी बहुत उरजावान हैं
06:54चाहे वे सही फैसले ले रहे हों या नहीं
06:57फैर, ये कहना मेरा काम नहीं है
07:00ये एक राजनीतिक आकलन है लेकिन फिर भी
07:03उन्होंने निर्वाचित पद पर बने रहने के बारे में कहा
07:06कि यह अहम है, इसमें कोई संदेह नहीं है
07:23क्योंकि यदि आप समवैधानिक दाइरे से बाहर सत्ता पर काबिज रहते हैं, तो यह सत्ता का अतिक्रमन माना जाता है,
07:30और यह एक अपराद है, इसलिए किसी को डरना नहीं चाहिए, चुनाव लड़ना चाहिए, और यह मैं सभी को सुझाऊंगा,
07:42खासकर इसलिए क्योंकि युक्रेइन ने कहा था कि वे चुनाव कराएंगे और फिर अचानक वे चुप हो गए, पत्र लिखने
07:54वाले ने कहा है, कि एंकरेज में हुए समझोतों का पालन नहीं किया जाना चाहिए,
08:01इसके अलावा उन्होंने कहा कि युक्रेइन और रूस के बीच हुए समझोतों के सच्चे गारंटर की तलाश यूरोप में की
08:09जानी चाहिए, विश्वस्नी गारंटर हमेशा स्वागत योग्य होते हैं,
08:21लेकिन वे अमेरिकी प्रशासन और विशेश रूप से राश्ट्रपती ट्रंप के इस आदेश से इनकार क्यों कर रहे हैं, ये
08:28मेरी समझ से परे हैं, वे अमेरिका से हत्यार तो चाहते हैं, लेकिन वे अमेरिकी प्रशासन या राश्ट्रपती ट्रंप को
08:35गारंटर के रू�
08:40आफ्टर एतव पिस्मा उकाज़ा अद्रेस कोट प्रिमाइटे नशित दवाने राश्ट्रपती ट्रम्प को देखा कि वह ओवल ऑंफिस में जैलेंस्की को
08:49निर्देश दे रहे थे उन्हें समझा रहे थे उन्होंने उनके पहनावे तक के बारे में बता रहे थे ये भी
09:07कि क�
09:08के लिए राश्ट्रपती ट्रम्प को धन्यवात कहना चाहूंगा यह उपयोगी रहा लेकिन उन्हें इस पर अभी और काम करना होगा
09:15इसे जारी रखना होगा और अब सबसे महत्वपूर्ण बात पर आते हैं युक्रेणी पक्ष ने हमारे संबंधों को सारवजनिक रूप
09:31सही समझा जो मुझे बिलकुल भी सही नहीं लगता मुझे लगता है कि यह पूरी तरह से अनुचित है लेकिन
09:37फिर भी इस से मुझे कुछ ऐसी बातें कहने का अधिकार मिल जाता है जिनके बारे में कुछ ही लोग
09:42जानते हैं या शायद कोई भी नहीं जानता तो एट दायो
09:59यह गंभीर मामला है मैं कटाक्ष नहीं कर रहा हूँ तीन हफते पहले हमारे व्यापारिक हलकों के एक प्रतिनिधी ने
10:06मुझे फोन किया और उन्होंने मुझे सवाल पूछा उन्होंने कहा श्रीमान राश्ट्रपती मैं इस व्यक्ति को काफी समय से जानता
10:13हूँ हम करीबी
10:14नहीं है लेकिन मुझे उन पर भरोसा है वे एक इमानदार व्यक्ति हैं उन्होंने आगे कहा श्रीमान राश्ट्रपती मुझे कीव
10:22आमंत्रित किया गया है मैंने कहा ठीक है आगे बढ़िये मुझे इससे क्या लेना देना है वो आगे बोले लेकिन
10:30मैं आपको सूचित करना
10:31चाहता था, क्योंकि मुझे लगता है कि वे हमारे दोनों देशों के बीच संबंधों से संबंधित विशयों पर चर्चा करने
10:37वाले हैं, मैंने कहा, मैं आपको आधिकारिक तोर पर दूद के रूप में नहीं भेज सकता, क्योंकि विदेश मंत्राले, रक्षा
10:45मंत्राले और व
10:59वहां जाओंगा, सुनूंगा, और फिर आपको बता सकता हूँ, कि वे किस बारे में बात करने वाले हैं, इसके बाद
11:05वे कीव चले गए, और वहां उन्होंने जलैंस्की से उनके आवास पर मुलाकात की, फिर वो वापस आ गए, मैं
11:25उनसे मिला, आप जानते हैं, कई बाते ह
11:29ये है कि श्री जलैंस्की ने बैठक का अनुरोद किया है, मैंने कहा कि मैंने कभी भी मिलने से इनकार
11:35नहीं किया, लेकिन मैं जानता हूँ कि सिर्फ मिलने के लिए मिलना ठीक नहीं है, खेर, मैंने देखा है कि
11:41मिन्स्क समझोतों का जिक्र हो रहा है, लेकिन हम पूरी रात �
11:44उन मिंस्क समझोतों पर काम कर रहे थे, उन्हें अंतिम रूप दे रहे थे, और फिर फ्रांस और जर्मनी के
11:50पूर्वनेताओं ने बाद में कहा कि ये समझोता खोखला है।
12:14क्योंकि वे रूस की सेनाओं के आक्रमन को रोकना चाहते हैं।
12:21हमें समझोतों व्यवस्थाओं की जरूरत है।
12:24छह महीने या एक साल के लिए नहीं, बलकि लंबे समय के लिए।
12:28पहले विशेश अज्यों को काम करने दें, कोई हल निकालने दें, और फिर हम हस्ताक्षर करने के लिए मिल सकते
12:34हैं।
12:35लेकिन पहले हमें एक समाधान पर पहुँचना होगा।
12:38और यही मुख्य मुद्दा है।
12:39मुझे लगता है कि दर्शक मेरी बात समझ जाएंगे, खासकर रूस के लोग।
12:53मुझे लगता है कि यह 21 माई की बात है।
12:57वही 22 माई को यूक्रेनी सशस्तर बलो ने लुहांस्क पीपल्स रिपबलिक के कॉलेज छात्रावास पर एक जगन्य आतंकवादी हमला किया।
13:06जिसमें किशोरों की हत्या कर दी गई।
13:08यह एक जगन्य अपराद है।
13:10यह पत्र किस बारे में है।
13:12क्या यह व्यक्तिकत मुलाकात के लिए माहौल बनाने का एक साधन है।
13:16या फिर इस पत्र का उद्देश यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्तिकत मुलाकात न हो पाए।
13:22मुझे लगता है कि उनकी दिल्चस्पी बातचीत में नहीं है।
13:25लहाजा हमें इस पत्र और उसके लिखने वाले को संबोधित नहीं करना चाहिए।
13:39इसलिए मैं हमारे लड़ाकों और सीमा पर तैनात हमारे सैनिकों को संबोधित कर रहा हूँ।
13:45मैं उनसे कहना चाहता हूँ।
13:46साथियों, सैनिकों और नाविकों, एड्मिरलों, जनरलों, अधिकारियों, देश की निगाहें आप पर टिकी हैं
13:53देश को आप पर गर्व है और आप ही पर सब की आशायें टिकी हैं
14:01भाईयों, अपने काम में पूरी मुस्तेदी से लगे रहिए
14:10चाहे पर एड़ाई में लगे निग एकी हैं
14:12नहीं हैं जो प्राव प्राव फ्रहाई आप पर एम लेकारी उडिकारी में
14:17प्राव प्रहभ लाईयों के लिप कि एकाराई चाहें प्राव है?
14:23and will that stand how do you think india should be dealing with america and the sanctions
14:33well i would say india always acts as a sovereign country and under the leadership of prime
14:39minister modi the any potential threats of sanctions would boomerang immediately and i
14:46know that for sure we've been in close talks with prime minister modi for a long while
14:51and he knows that for sure we all remember time when prime minister modi was banned from
14:57going to the territory of the united states of america and i know that prime minister modi
15:01would never forget about it now he's a prime minister all the sanctions have been eliminated
15:06and the relationship between the usa and india developing successfully as i understand and
15:11india is a sovereign country and it is free to choose those products that they consider to be
15:16most up-to-date and most applicable for them and obviously offering the best price quality ratio
15:23no matter what people say india has always been acting in this manner how well india is always
15:32guided by its national interests of course that is a very sensitive area the defense area but one
15:41thing is particularly important it is crucially important and the thing is that our cooperation with
15:47india just like with all other partners of ours is not subject to political environment we can't be
15:55dictated do not deliver that to india nobody nobody can dictate us and nobody would even try to do
16:02that we are always going to do what we consider to be right and we will always stand true to
16:08commitments
16:09given to our partners especially such partners as india and in this key in this spirit according to those
16:16rules we do our business we do our business and this is how we determine to continue
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