00:00मैं अपने शरीर को सजाती हूँ, सवारती हूँ और खूब गहने वहने से उसको लोड करती हूँ, अपने आपको सामने
00:05डॉल की तरह रेप्रेजेंट करती हूँ
00:06तो वो जो मेरी बेटी पैदा हुई है क्या मैं उसको भी बेबी डॉल नहीं बनाऊगी
00:11और आप अपनी बेटी को बेबी डॉल बनाओ, ये प्रेम है
00:14और जो महिला खुद को डॉल बनाती हो, वो बेटी को बेबी डॉल कैसे नहीं बनाएगी
00:19जिस महिला के भीतर ये अल्गॉरिदम बैठ गया हो, कि अपने आपको सजाओ सवारो बेबी डॉल बनो
00:24और उसके बाद एक बढ़ियां सा लड़का देख लो, उसकी ट्रॉफी वाइफ बन जाओ, अब वो तुम्हें खूब पालेगा, रुपए
00:29पैसे भी देगा, और तुम्हें पस उसको खुश कर गे रखना है
00:32क्या वो अपनी बेटी को भी यही सब करने के लिए तयार नहीं करेगी, वो सिर्फ इसलिए कि आपके शरीर
00:37से एक प्राणी का जन्म हो गया है, आप प्रेम पूर्ण हो जाएंगे, ऐसा हो सकता है क्या
00:41तो यह उमीद भी क्यों करनी कि माबाप और बच्चों में प्रेम का रिष्टा होगा, रिष्टा तो आत्मग्यान और प्रेम
00:47का हुपर, सुगंधित बहरईयो हवा, तो वो हवा आपके घर में भी प्रवेश करती है, तो सुगंध लेकर आती है
00:54न, इसको बोलते हैं माबा�
00:55का बच्चों के लिए प्यार, हम जैसे थे, हम वही खुश्बू किसी और की जिंदगी में भी लेकर आए
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