00:00एसन से त्टी आगमी भारत के खास को कम देगे लिए ये हैं उनकी खास और ये खास ये तक
00:06फिर सामने नहीं देखते हैं
00:07जम देखते हैं नफरत, धुवी करण और निरंतरिक टकराओ की प्रवित्ति पनी रहती है
00:13ऐसे समय में फिर गांधी जी की जो सत्य और अहिंशा की जो विचारधारा है वो कैसे सार्थक है
00:20अहिंशा माने ये नहीं है कि किसी को मारेंगे पीटेंगे नहीं
00:23अहिंशा का अर्थ होता है कोई दूसरा अब है ही नहीं
00:27गांदी जी की जो पारिभाशिक बात थी वो थी आद्ग्रह, द्रढ़ता, जिद, द्रुति, दुबला पतला आदमी, अड़ा हुआ खड़ा, ऐसा,
00:39गांदी जी से अहिंसा नहीं, आद्ग्रह से, जो सही लग गया तो लग गया, कुछ हो रहा है गलत उसको
00:46रोक नहीं सकता, �
00:57इस बात के लिए उनको याद करिए
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