00:00एक तरफ अस्पताल का वो ठंडा कमरा जहां वेंटिलेटर की गूंचती आवाजों की बीच जिंदकी और मौत से जूजते एक
00:07पिता की आँखे टक्टकी लगाए दर्वाजे को निहार रही है
00:11वो इंतिजार कर रहे हैं कि अभी उनका बेटा आएगा उनकी बहु आएगी उनकी मासूम पोतिया दोड कर उनसे लिपट
00:18जाएंगी और कहेंगी दादा जी आप जल्दी ठीक हो जाओ
00:21लेकिन दूसरी तरफ अस्पताल से महज कुछ दूरी पर मौजूद एक होटिल का वो कमरा जो कुछ ही मिंटों में
00:28शम्शान बन गया
00:29उन वुजर्ग पिता को नहीं मालूम था कि जिन अपनों के सहारे वो ठीक होने की उमीद कर रहे थे
00:35वो अब इस दुनिया में है ही नहीं
00:38एक दिन एक भयानकाग और एक हस्ता खेलता पूरा परिवारी तिहास के पन्नों में दफन हो गया
00:44आज हम आपको सुना रहे हैं दिली के मालविय नगर से आई एक ऐसी दर्दनाग दास्ता जिसे सुनकर पत्थरों का
00:50दिल भी बिघर जाए
00:52ये कहानी है गुरुग्राम के सेक्टर 46 में रहने वाल एक बेहत सम्मानेत और मिलनसार चाटेड अकाउंटिन विवेक अगरवाल की
01:00विवेक जी का परिवार खुशाल था घर में बेटियों के किलकारिया गूंचती थी लेकिन कुछ दिन पहले उनकी बुजर्ग पिता
01:07की तबियत अचानक बिगड़ गए
01:09फेफडों में सीवियर लंग इंफेक्शन की वज़े से उन्हें दिल्ली के साकेट स्थित मैक्स अस्पिताल में बर्ती कराया गया
01:16जब पिता अस्पिताल में हो तो बेटा घर पर चैन से कैसे बैठ सकता था
01:20विवेक अगरवाल ने तै कि वो अपने पूरे परिवार को लेकर दिल्ली जाएंगे
01:24मकसद सर्फ एक था दिमार पिता का हाथ थामना
01:28उन्हें एसास दिलाना कि पूरा परिवार उनके साथ खड़ा है ताकि उनका मनवबल बढ़े और वो जल्दी ठीक हो सके
01:35विवेक अगरवाल ने अपनी पत्नी अपनी दो प्यारी और होनहार बेटियो और अपने बुजर्ग मा को साथ लेकर दिल्ली पहुचे
01:42क्योंकि अस्पिताल में लंबे समय तक रुखना था इसलिए उन्होंने अस्पिताल की पास मालवे नगर के एक होटल में दो
01:48कमरे बुख्ये ताकि पूरा परिवार पास में रहकर पिता की देखबाल कर सके
01:53लेकिन किस्मत का खेल देखिये अपनों से अपनों की महबत इस कदर गहरी थी कि जब विवेक अगरवाल के मौसा
01:59मौसी और एक अन्य रिष्टेदार को पता चला की भाई अस्पिताल में भरती है तो वो भी उनका हाल चाल
02:05जानने के लिए दिल्ली खिचे चले आए
02:07उन्होंने भी सोचा कि अलग कहां रुकेंगे विवेक और उनका परिवाल जिस होटेल में ठहरा है वही रुक जाते हैं
02:13सब साथ रहेंगे तो दुख का ये वक्त असानी से कट जाएगा तारीक समान्य थी रात भी आम रातू जैसी
02:20ही थी पुरा परिवाल होटेल के कमरों मे
02:22बैठा हुआ था अगले दिन सुबा इस्पिताल जाने की तैयारिया हो रही थी बाते हो रही थी कि पिताजी की
02:28सेहत में कैसे सुधार लाया जाए इसे को इस पात का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि जिस होटेल
02:34की छट के नीचे वो अराम कर रहे हैं वो उनकी जिन्द
02:50पिला और काला धुआ कमरों के भीतर इसकदर भर गया कि लोगों को सास लेने तक का मौका नहीं मिला
02:56चीक पुकार मची लेकिन धुए और लप्टों से बहार निकलने के सारे रास्ते बंद कर दिये गए थे वो इमारत
03:03किसी कब्रिस्तान जैसे बंद चुकी थे
03:05स्थानिय लोगों और प्रत्यक्ष दर्शियों के माने तो चुलसने और दम खुटने की वज़े से विवेक अगरवाल उनकी पतनी उनकी
03:12दोनों बेटिया उनकी बुजर्ग मा और उनके मौसा मौसी समेत कुल आठ लोगों की दरदनाक मौत हो गई एक जटके
03:19में तीन पीड
03:34से काम में आगे रहते थे उनकी पतनी ने बच्चों के भविश्रे के लिए अपना बिजनस तक छोड़ दिया था
03:39दोनों बेटिया माता पिता की आँखों का तारा थी लेकिन एक ही रात ने सब कुछ राक की धेरी में
03:45बदल दिया
03:47इस दल दहला देने बाले हादसे के बाद अब जाच उजनसिया हरकत में आई है दिली पुलिस ने होटेल के
03:52मालिक लवकेश बजाज को हिरासत में ले लिया है
03:55शुरुवाती पूश्टाच में पता चुला कि इमारत पहले एक खादी की दुकान हुआ करती थी जिसे तीन साल पहले होटेल
04:01और गेस्ट हाउस की शकल दे दी गई
04:03पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए होटल मालिक और उसकी पतनी के खिलाफ लुकाउट सर्कुलर भी जारी कर
04:09दिया है
04:10ताकि कोई देश छोड़ कर भाग ना सके
04:12माल बेनगर थाने में बेनेस की गंभीर धाराओ के तहट एफाईर दर्ज की गई है जिसमें गेर इरादतन हत्या और
04:19लापरवाही बरतने के आरोब शामिल है
04:21लेकिन यहाँ सबसे बड़ा सवाल सेफटी स्टांडर्स का है क्या उस होटेल में फायर एनोसी थी क्या आद बुझाने के
04:28उपकरंड काम कर रहे थे
04:30कि एमरजनसी एग्जिट परियाप था या फिर चंद पैसों के मुनाफ़े के लिए सुरक्षा के नियमों को ताक पर रख
04:36दिया गया था जिसके कीमत इस बेकसूर परिवार को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी
04:42आज इस हाथ से ने हमें भीतर तक छब चोड़ दिया है लेकिन इस पूरी इत्रासदी की सबसे दर्दनाक और
04:47रूख कपा देने वाली तस्वीर आज भी मैक्स अस्पिताल के उस कमरे में बंद है
04:52उस ICO के बेट पर लेटे बुजर्ग पिता आज भी हर आहट पर दर्वाजे की तरफ देखते हैं वो आज
04:59भी दवाई खाते वक्त अपने बेटे विवेक का हाथ ढूनते हैं उन्हें नहीं मालूम कि उनका वो पूरा परिवार जो
05:05उनकी लंबी उम्र की दूआ मांगने दि
05:22जब उन बुजर्ग पिता का इंफेक्शन ठीक होगा और वो होश में आकर पूछेंगे की मेरा विवेक कहा है मेरी
05:28पोतिया कहा है तो इस दुनिया का कौन सा इंसान उन्हें ये सच बताने की हिम्मत चुटा पाएगा इस दर्दनाक
05:34सच और सिस्टम की लापरवाही की साथ �
05:36आज आपको छोड़े जा रहें आप देखते रहें वन इंडिया हिंदी
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