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  • 1 hour ago
सुप्रीम कोर्ट ने हेरोइन तस्करी के एक मामले में आरोपी को दी गई जमानत को रद्द करते हुए कहा है कि जब देश पर हमला हो रहा हो, तो देश की आजादी को निजी आजादी से ज्यादा अहमियत देनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ड्रग्स की सप्लाई देश के खिलाफ जंग से कम नहीं है, जो अर्थव्यवस्था और लोगों की सेहत, दोनों पर असर डालती है. जस्टिस संजय करोल और एन के सिंह की बेंच ने 2 जून को दिए अपने फैसले में कहा कि, "अगर देश की आजादी और निजी आजादी के बीच कोई टकराव होता है तो बेशक, आजादी ही अहमियत रखेगी. खासकर तब, जब देश के खिलाफ जंग छेड़ी जाती है, चाहे वह ड्रग्स की सप्लाई के रूप में हो, जो देश की अर्थव्यवस्था और लोगों की सेहत पर बहुत बुरा असर डालती है." बेंच ने कहा कि हालांकि इस कोर्ट ने कई मौकों पर माना है कि लंबे समय तक जेल में रहने पर संविधान के अनुच्छेद 21 के हिसाब से जमानत देना सही है, "हमने देखा है कि इसका इस्तेमाल एक जैसा नहीं है." बेंच ने कहा, "इसके अलावा, इसमें कोई शक नहीं है कि बेल के लिए लंबे समय तक जेल में रखना क्या होता है, यह इस कोर्ट या देश के कानून ने नहीं बताया है." बेंच ने कहा कि हालांकि न्यायिक समझ न्याय देने का एक जरूरी पहलू है, लेकिन यह कोर्ट इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकता कि हिरासत में एक जैसी स्थिति वाले लोगों को अलग-अलग नतीजे मिल सकते हैं, जो संबंधित बेंच के अपनाए गए तरीके पर निर्भर करता है.

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Transcript
00:07
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00:11
00:13D.O.P.
00:44Supreme Court.
01:12कि प्रतिवादी ने सिर्फ एक साल साथ महीने ही जेल में काटी है
01:16और अगर वो दोशी पाया जाता है तो उसे जादा से जादा 20 साल की सजा हो सकती है
01:21इसलिए ये नहीं कहा जा सकता कि उसने लंबे समय तक जेल में सजा काटी है
01:26जिसके लिए सम्विधान के आर्टिकल 21 के हिसाब से दखल देना जरूरी है
01:33कोट ने कहा कि NDPS Act के तहट इसी तरह के अपराध करने के मामले पहले भी सामने आ चुके
01:40है
01:41इसलिए ये नहीं कहा जा सकता कि बेल पर रहते हुए उसके ऐसा अपराध करने की संभावना नहीं है
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