00:01ओडिशा में पुरी के रतखला में सदियों पुरानी परंपरा लकडी और कारीगरी के रूप में जीवन्तों उत्ती है
00:10छेनी और हथाणों की लगातार तालबद गुंज के बीच कुशल कारीकर समय से होड लगाते हुए तीन भव रतों नंदी
00:18घोश ताल ध्वज और दर्प दलन का निर्मान कर रहे हैं
00:23ये रथी सालाना जगनात रथ यात्रा के दौरान भगवान जगनात उनके भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुबध्र को
00:31लेकर आगे बढ़ेंगे
00:33जैसे जैसे ये उत्साव नस्दीक आ रहा है अक्षर ततिया के दिन शुरू हुआ रत निर्मान का कार अब निर्मान
00:52प्रक्रिया के साथ-साथ पारम परिक अनुष्ठान भी जारी है
00:55कारिगर रतों के आधार, पहियों और धुरियों को मजबूती से जोडने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि इस भवे
01:03शोभा यात्रा के लिए इन विशाल लकडी की सनरशनाओं को तैयार किया जा सके
01:26अभी तो यह जो रत में बेस और रत का अक्चा की सब को स्ट्रॉंग करने के लिए एक खील
01:32बार रहे हैं वो लोहे का कील होता है उसको मार का अभी रत को एकदम स्ट्रॉंग बना रहे है
01:39लकडी के धांचे को आकार देने वाले बढ़ाई से लेकर बड़े बड़े लठ हटाने वाले सेवकों और लोहे के जोड
01:46बनाने वाले लोहारों तक हर समुह पवित्र रतों को आकार देने में एहम भूमी का निभाता है
01:55यहां हम जो काम करते हैं बस जगनात का कुरपा में हम काम करते हैं और जितना महरणा भाई लगते
02:04हैं और रस बनाते हैं और भूई लोग जो है लकडी उठाते हैं पकाते हैं रखते हैं उनका काम होई
02:13होता है
02:13The people who can become one of the people who can become one of the people.
02:36ये भवे रत हर गुजरते दिन के साथ धीरे-धीरे आकार ले रहे हैं।
02:41इस भवे आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने के लिए भारत और दुनियाभार से लाखोश धालू, पुरी पहुचेंगे।
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