00:12सुबह के ठीक साड़े आठ बजे थे जब दिल्ली का मालवे नगर इलागा अचानक चीख पुकार और मौत के काले
00:19धूए से तहल उठा एक बैड एंड ब्रेकफ़स होटल की इमारत में लगी भीशनागने देखते ही देखते 21 हंस्ती खेलती
00:27जिंदकियों को हमीशा के लिए �
00:29लेकिन इस खौफनाक मंजर और जरती इमारतों के बीच मौत को सीधी चुनावती देने खड़े हो गए इस थानिया दुकानदार
00:37अर्मान मंसूरी और उनके पिता रिया जुद्दी अपनी जान और दुकान के भारे नुकसान की परभा किये बिना इस बाप
00:44पेटे ने सड�
00:56अला देने वाला हाथसा आज भी लोगों की रुख कपा देता है चश्मदीदों के मुताबिक सुबह करीब 8 बचे इमारत
01:03से पहली चिंगारी निकलती देखी गई और महज आधे घंटे में ग्राउंड फ्लोर्स जोटिया की लप्टों ने पूरी इमारत को
01:10अपनी शिकंज
01:24अगर दमकल विभाग वक्त पर आता तो शायद ये तबाही इतनी बड़ी ना होती और कई मासूमों की जान पच
01:31पाती जब आग लगी तब अरमान मंसूरी को किसी ने फोन कर चेतावनी दी कि वे अपनी दुकान से समान
01:37हटा ली क्योंकि पड़ोस का होटेल धूदू कर चल
01:57अरमान ने एक पल भी नहीं गवाया उन्होंने दुकान बचानी के बचाए इंसानियोत को चुना और अपने पिता के साथ
02:03मिलकर दुकान के सारे नए गद्दे सडक पर बिच्छा दिये जो लोग उपर से कूदे वे सीधे इनहीं गद्दों पर
02:09गिरे जससे उनके सिर और र
02:22परिवारों का नामों निशान मिटा दिया मालवी नगर के रहने वाले विवेक अगरवाल अपने पूरे परिवार के साथ रिसा की
02:29भीर चड़ गए उनके पड़ोसियों का रो रोकर बुरा हाल है जिनका कहना है कि विवेक बेहत मददगार इंसान थे
02:35उनकी पत्नी समास से�
02:36करती और उनके तीन चोटे चोटे बच्चे थे तीन दिन पहले तक जो पूरा परिवार महले में हंस्ता खेलता नजर
02:43आ रहा था वो आज राक के ठेर में तब्दील हो चुका है इस दर्दना अकंत ने हर किसी को
02:49गहरे सदमें और आंसों में डुबो दिया इस भयानक लापर
03:06को साल दोहजार चोबीस में सिर्फ चैकमरों को चलाने की अनुमती मिली लेकिन नियमों को ताक पर रखकर धजियां उड़ाते
03:14हुए इस पूरे होटेल को चलाया जा रहा था सरकार ने अब सक्त रुखा बनाते हुए साफ कर दिया कि
03:20इलाके की ऐसे तमाम इमारतिया जिनके
03:38वन इंडिया पर सब्सक्राइब करें और कोई भी अपडेट विश्चन करें अभी वन इंडिया एप डाउनलोड करें
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