00:00रश्या के तर्वाजे पर अमेरिका की न्यूक्लियर पावर
00:03क्या नाटो अब मॉस्को के और करीब अपनी रणी तक ताकत बढ़ाने की त्यारी कर रहा है
00:08क्या यूरोप एक नए न्यूक्लियर पावर गेम का मैदान बनने वाला है
00:13और क्या ये कदम रश्या और नाटो के बीच तनाव को और खतरनाग बना सकता है
00:19नमस्कार मैं हूँ विशाख शर्मा और आप देख रहे हैं One India Hindi
00:24एक ऐसी चर्चा जिसने वाशिंग्टन से लेकर मॉस्को तक हलचल बढ़ा दी है
00:29क्योंकि अगर ये योजना आगे बढ़ती है तो इसे नाटो की नुकलियर स्टाटेजी में दश्कों का सबसे बड़ा बदलाव माना
00:36जा सकता है
00:37रिपोर्स के मताबिक अमेरिका और उसके नाटो सहयोगी देशों के बीच इस बात पर शुरुआती स्टर की चर्चा चल रही
00:44है
00:44कि नाटो के इस्टन फ्लांग यानि रश्या के सबसे करीब मौजूद सदस्य देशों में नुकलियर केपिबल मिलिटरी आसेट्स की मौजूद्गी
00:53बढ़ाई जाए
00:53यानि ऐसे फाइटर जेट्स जो ज़रूरत पढ़ने पर कन्वेंशनल वेपन्स के साथ साथ नुकलियर वेपन्स भी ले जाने की शमता
01:01रखते
01:01इनमें F-35A लाइटनिंग 2 और F-15E स्ट्राइक इगल जैसे एडवांस्ट फाइटर जेट्स शामिल है
01:09हाला कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है लेकिन पोलांड और कुछ बाल्टिक स्टेट्स इस तरह की सेन्य शमताओं
01:16की मेजबानी करने में रूची दिखा चुके हैं
01:19युक्रेन वार के बाद रशिया और नाटो के रिष्टे लगातार तनाफ़पून बने हुए हैं
01:25एक तरफ रशिया अपने military power और nuclear capabilities का जिख्र करता है तो दूसरी तरफ नाटो अपनी eastern borders
01:32पर सुरक्षा व्यवस्ता मजबूत करने में जुटा है
01:35यही वज़ा है कि नाटो के भीतर नई सुरक्षा रणनीतियों पर बिचार तेज हो गया है
01:40फिलाल नाटो की nuclear sharing policy के तहट American nuclear weapons Germany, Belgium, Italy, Netherlands और टर्की जैसे देशों में
01:49पहले से मौजूर है
01:50हाला कि इन हत्यारों का new environment पूरी तरह अमेरिका के पास रहता है और इसके इस्तवाल की अंतिम मंजूरी
01:57केवल American President ही दे सकते हैं
01:59लेकिन अगर ये व्यवस्था Eastern Europe तक पहुँशती है तो इसे नाटो की nuclear posture में एक एतिहासिक बदलाव माना
02:07जाएगा
02:07फोलान लंबे समय से नाटो की मजबूत nuclear presence की मांग करता रहा है
02:12पोलिश ने इत्रतव का कहना है कि रशिया के सबसे करीब होने की वज़ह से सुरक्षा खत्रे से भी ज्यादत
02:19उसी शेत्र में है
02:20इसलिए नाटो की सुरक्षा गारंटी भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए
02:24वहीं लिूथेनिया, लात्विया और इस्टोनिया जैसे बाल्टिक कंट्रीज भी नाटो की सैन्य मौजूर्की बढ़ाने के फक्ष में रहे हैं
02:32इन देशों का मानना है कि मजबूत deterrence ही किसी संभावित खत्रे को रोखने का सबसे प्रभावी तरीका है
02:39इस प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि इससे रश्या को साफ संदेश जाएगा कि नाटो अपने हर सज़से की
02:47रक्षा के लिए पूरी तरह त्यार है
02:49उनके मुताबिक ये कदम युद्ध को बढ़ावा देने के लिए नहीं बल्कि युद्ध को रोखने के लिए है
02:55लेकिन आलोजकों की राय इससे अलग है
02:58उनका कहना है कि रश्या की सीमा के और करीब नुक्लियर केपिबल आसेट्स की तनाती मौस्कों को सावे जैसी लग
03:05सकती है
03:06और अगर रश्या ने जवाब भी सेन्ने कदम उठाए तो युरोप में तनाव और बढ़ सकता है
03:11कुछ विशेश अग्यों तो इसे एक नई आम्स रेस की शुरुआत तक मान रहे हैं
03:16इसके लावा इस योजना को लागू करना भी आसान नहीं होगा
03:21नए होस्ट कंट्रीज को सेक्योर स्टोरेज फेसिलिटीज बनानी होगी
03:25विशेश परिक्षन देना होगा और नुक्लियर मिशिन्स के लिए जरूरी इंफ्रस्ट्रक्टर तयार करना होगा
03:31यानि ये फैसला सिर्फ राजनीतिक नहीं बलकि सैन्य और आर्थित पर भी बेहत बड़ा होगा
03:38फिलहाल नाटो और अमेरिका दोनों का कहना है कि बादचीत अभी शुरुआती चरण में है
03:43कोई अपचारिक फैसला नहीं हुआ है और ना ही किसी नई डिप्लॉइमेंट का एलान किया गया है
03:49लेकिन इतना तैह है कि यूक्रेन वार के बाद यूरोप की सुरक्षा राजनीति तेजी से बदल रही है
03:55और इसी बदलते महाल में ये सवाल फिर चर्चा के इंदर में है कि अमेरिका इस न्यूक्लियर अम्ब्रेला आखिर कितनी
04:02दूर तक फैलेगी
04:03अगर ये योजना आगे बढ़ती है तो नाटो और रश्या के बीच शक्ती संतुलन पर इसका बड़ा असर पड़ सकता
04:10है
04:11और तब यूरोप की सुरक्षा राजनीति का एक नया अध्याय शुरू हो सकता है
04:15फिलाल इस बड़ी राजनीतिक चर्चा पर दुनिया की नजर बनी हुई है
04:19इस मुद्बे पर आपकी क्या राय है हमें कमेंट करके जरूर बताइए
04:23और ऐसी ही बड़ी अंतराश्च्टी खबरों के लिए जुड़े रहिए One India Hindi के साथ
Comments