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NATO के भीतर Russia की सीमा के और करीब Nuclear-Capable अमेरिकी लड़ाकू विमानों की तैनाती को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Poland और कुछ Baltic देशों ने इस तरह की सैन्य क्षमताओं की मेजबानी में रुचि दिखाई है। हालांकि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो इसे NATO की Nuclear Strategy में दशकों का सबसे बड़ा बदलाव माना जा सकता है। जानिए पूरी रिपोर्ट।

NATO is reportedly discussing the possibility of expanding nuclear-capable military assets closer to Russia's borders. Countries like Poland and several Baltic states are said to be interested in hosting advanced US aircraft such as the F-35A Lightning II and F-15E Strike Eagle. While no final decision has been made, the discussions highlight growing security concerns in Europe amid ongoing tensions between NATO and Russia following the Ukraine war.

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~HT.410~ED.104~GR.508~VG.HM~

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00:00रश्या के तर्वाजे पर अमेरिका की न्यूक्लियर पावर
00:03क्या नाटो अब मॉस्को के और करीब अपनी रणी तक ताकत बढ़ाने की त्यारी कर रहा है
00:08क्या यूरोप एक नए न्यूक्लियर पावर गेम का मैदान बनने वाला है
00:13और क्या ये कदम रश्या और नाटो के बीच तनाव को और खतरनाग बना सकता है
00:19नमस्कार मैं हूँ विशाख शर्मा और आप देख रहे हैं One India Hindi
00:24एक ऐसी चर्चा जिसने वाशिंग्टन से लेकर मॉस्को तक हलचल बढ़ा दी है
00:29क्योंकि अगर ये योजना आगे बढ़ती है तो इसे नाटो की नुकलियर स्टाटेजी में दश्कों का सबसे बड़ा बदलाव माना
00:36जा सकता है
00:37रिपोर्स के मताबिक अमेरिका और उसके नाटो सहयोगी देशों के बीच इस बात पर शुरुआती स्टर की चर्चा चल रही
00:44है
00:44कि नाटो के इस्टन फ्लांग यानि रश्या के सबसे करीब मौजूद सदस्य देशों में नुकलियर केपिबल मिलिटरी आसेट्स की मौजूद्गी
00:53बढ़ाई जाए
00:53यानि ऐसे फाइटर जेट्स जो ज़रूरत पढ़ने पर कन्वेंशनल वेपन्स के साथ साथ नुकलियर वेपन्स भी ले जाने की शमता
01:01रखते
01:01इनमें F-35A लाइटनिंग 2 और F-15E स्ट्राइक इगल जैसे एडवांस्ट फाइटर जेट्स शामिल है
01:09हाला कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है लेकिन पोलांड और कुछ बाल्टिक स्टेट्स इस तरह की सेन्य शमताओं
01:16की मेजबानी करने में रूची दिखा चुके हैं
01:19युक्रेन वार के बाद रशिया और नाटो के रिष्टे लगातार तनाफ़पून बने हुए हैं
01:25एक तरफ रशिया अपने military power और nuclear capabilities का जिख्र करता है तो दूसरी तरफ नाटो अपनी eastern borders
01:32पर सुरक्षा व्यवस्ता मजबूत करने में जुटा है
01:35यही वज़ा है कि नाटो के भीतर नई सुरक्षा रणनीतियों पर बिचार तेज हो गया है
01:40फिलाल नाटो की nuclear sharing policy के तहट American nuclear weapons Germany, Belgium, Italy, Netherlands और टर्की जैसे देशों में
01:49पहले से मौजूर है
01:50हाला कि इन हत्यारों का new environment पूरी तरह अमेरिका के पास रहता है और इसके इस्तवाल की अंतिम मंजूरी
01:57केवल American President ही दे सकते हैं
01:59लेकिन अगर ये व्यवस्था Eastern Europe तक पहुँशती है तो इसे नाटो की nuclear posture में एक एतिहासिक बदलाव माना
02:07जाएगा
02:07फोलान लंबे समय से नाटो की मजबूत nuclear presence की मांग करता रहा है
02:12पोलिश ने इत्रतव का कहना है कि रशिया के सबसे करीब होने की वज़ह से सुरक्षा खत्रे से भी ज्यादत
02:19उसी शेत्र में है
02:20इसलिए नाटो की सुरक्षा गारंटी भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए
02:24वहीं लिूथेनिया, लात्विया और इस्टोनिया जैसे बाल्टिक कंट्रीज भी नाटो की सैन्य मौजूर्की बढ़ाने के फक्ष में रहे हैं
02:32इन देशों का मानना है कि मजबूत deterrence ही किसी संभावित खत्रे को रोखने का सबसे प्रभावी तरीका है
02:39इस प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि इससे रश्या को साफ संदेश जाएगा कि नाटो अपने हर सज़से की
02:47रक्षा के लिए पूरी तरह त्यार है
02:49उनके मुताबिक ये कदम युद्ध को बढ़ावा देने के लिए नहीं बल्कि युद्ध को रोखने के लिए है
02:55लेकिन आलोजकों की राय इससे अलग है
02:58उनका कहना है कि रश्या की सीमा के और करीब नुक्लियर केपिबल आसेट्स की तनाती मौस्कों को सावे जैसी लग
03:05सकती है
03:06और अगर रश्या ने जवाब भी सेन्ने कदम उठाए तो युरोप में तनाव और बढ़ सकता है
03:11कुछ विशेश अग्यों तो इसे एक नई आम्स रेस की शुरुआत तक मान रहे हैं
03:16इसके लावा इस योजना को लागू करना भी आसान नहीं होगा
03:21नए होस्ट कंट्रीज को सेक्योर स्टोरेज फेसिलिटीज बनानी होगी
03:25विशेश परिक्षन देना होगा और नुक्लियर मिशिन्स के लिए जरूरी इंफ्रस्ट्रक्टर तयार करना होगा
03:31यानि ये फैसला सिर्फ राजनीतिक नहीं बलकि सैन्य और आर्थित पर भी बेहत बड़ा होगा
03:38फिलहाल नाटो और अमेरिका दोनों का कहना है कि बादचीत अभी शुरुआती चरण में है
03:43कोई अपचारिक फैसला नहीं हुआ है और ना ही किसी नई डिप्लॉइमेंट का एलान किया गया है
03:49लेकिन इतना तैह है कि यूक्रेन वार के बाद यूरोप की सुरक्षा राजनीति तेजी से बदल रही है
03:55और इसी बदलते महाल में ये सवाल फिर चर्चा के इंदर में है कि अमेरिका इस न्यूक्लियर अम्ब्रेला आखिर कितनी
04:02दूर तक फैलेगी
04:03अगर ये योजना आगे बढ़ती है तो नाटो और रश्या के बीच शक्ती संतुलन पर इसका बड़ा असर पड़ सकता
04:10है
04:11और तब यूरोप की सुरक्षा राजनीति का एक नया अध्याय शुरू हो सकता है
04:15फिलाल इस बड़ी राजनीतिक चर्चा पर दुनिया की नजर बनी हुई है
04:19इस मुद्बे पर आपकी क्या राय है हमें कमेंट करके जरूर बताइए
04:23और ऐसी ही बड़ी अंतराश्च्टी खबरों के लिए जुड़े रहिए One India Hindi के साथ
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