00:28U.S. Iran
00:30ताकि उनके उपर आने वले खर्च का प्रेशर कम हो सके, जिन रूट्स पर डिमांड इतनी जादा नहीं है, जहां
00:36पर यात्रियों की संख्या कम है, वहां की उडानों को अब कम किया जाएगा।
01:00प्रतिसत तक उडानों को कम कर सकती है, यह कटोती अगले 90 दिनों तक लागूर है सकती है, सबसे ज़्यादा
01:06असर मेट्रो और हाई टैरिफ रूट्स पर देखने को मिल सकता है, बुंबई, दिल्ली, बैंगलोर, हैदराबाद जैसे सहरिस से प्रभावित
01:13हो सकते हैं।
01:14अब आई यह आपको बताते हैं अचानक से ऐसा क्या हो गया जो एर इंडिया और इंडिगो जैसे बड़े ब्रैंड्स
01:19को ऐसा फैसला लेना पड़ा।
01:20एवियेशन सेक्टर में फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है, एक एरलाइन को कुल ऑपरेटिंग खर्च का 40% हिस्सा अपनी
01:27एटियेफ पर देना पड़ता है।
01:29हाल के महीनों में वेस्ट एसिया तनाओ और इरान संकट के कारण कच्चे तेलों की कीमतों में उच्छालाया है, जिसका
01:35सीधा असर विवान इधन पर पड़ा है।
01:38इसके अलावा मई के आखिर तक समर वेकेशन ट्रैफिक कमजोर पड़ने लगता है।
02:09अब इन सारी चीजों से सफर करने वाले यात्रियों पर कितना असर पड़ेगा आईए आपको बताते हैं।
02:38के अलावा यात्रियों को अपनी पसंद के टाइम स्लोट में फ्लाइट मिलना भी मुश्किल हो सकता है।
02:43सुबे और साम के समय चलने वाली लोगत्रियों उड़ानों की संख्या कम होने से लोगों को या तो अलग समय
02:48चुनना पड़ेगा या फिर ज्यादा किराया देना पड़ सकता है।
03:03इसका असर खास्तोर पर उन लोगों पर पड़ेगा जिने अचानक यात्रा करनी पड़ती है।
03:33बढ़ सकता है। अवियेशन सेक्टर में नई चुनोती आ सकती है। भारत का अवियेशन सेक्टर इस समय दोहरी मार जेल
03:39रहा है। एक तरफ महंगा एटीएफ तो दूसरी तरफ कमजोर डिमांड। ऐसे में एरलाइन्स लागत बचाने के लिए उड़ाने कब
03:47करने का रास्
03:51और अशुविधा जनक साबित हो सकते हैं। ऐसी ही और खबरों और अपडेट्स को जानने के लिए देखते रहें। गुड
03:57रिटन्स डिजिटल।
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