00:08शास्त्र कहते हैं, भगवान अपने अपमान को क्षमा कर सकते हैं, पर अपने भक्तों पर हुए अत्याचार को सहन नहीं
00:16करते।
00:17इसलिए जब-जब किसी भक्त पर संकट आया, भगवान किसी ना किसी रूप में उसकी रक्षा के लिए प्रकट हुए।
00:30या मेरे पीछे क्यों पड़ा है, ये भगवान, स्भगवान, बचाईए सुदर्शन से।
00:38अहम भक्त पराधीनो, यस्वतंत्र इवद्विजा, साधु भिर्ग्रस्तरदयो, भक्त इर्भक्त जनप्रिया।
00:54भगवान कहते हैं, हे द्विज, मैं अपने भक्तों के प्रेम के आधीन रहता हूँ, मानो स्वतंत्र ही नहीं हूँ, साधु
01:03भक्तों ने मेरे हृदय को अपने प्रेम से बांध लिया है।
01:08श्रीमत भागवतम के अनुसार, राजा अंबरीश सूर्य वन्ष के महान राजा थे, और उनका राज्य अयोध्या तथा उसके आसपास के
01:16क्षेत्रों में माना जाता है।
01:18राजा अंबरीश इक्षवाकु वन्ष के अत्यंत धर्मनिष्ट और विश्नुभक्त राजा माने जाते हैं।
01:24कुछ ग्रंथों में उनका संबंध पूरे सब्त द्वीपों पर प्रभाव रखने वाले चक्रवर्ती समराट के रूप में भी बताया गया
01:32है।
01:32लेकिन उनकी मुख्य राजधानी अयोध्या ही मानी जाती है।
01:39उनके पास अपार धन था, नाना प्रकार की सुक सुविधाएं थी, एश्वर्य था, चप्पन भोग थे।
01:47लेकिन भोजन, राजवैभव और सुखों से अधिक महत्वर बिर्धर्म और भक्ती को देती थे।
01:57हे भगवान, मैं कौन हूँ? राजा या सिर्फ इतनाम? प्रभू, मेरा उद्देश्य आपको पाना है।
02:08आप पूरी तरह अपना बना लीजिये या फिर मिटा दीजिये। हे प्रभू, मुझे आशिर्वात दें कि मेरी हर श्वास आपकी
02:19सेवा बने।
02:20मेरा धन तो केवल आप है, केवल नारायन है।
02:26मन को भगवान में स्थिर्फरने के लिए, उन्होंने एकादशी व्रत का संकल्प ही आपूर्वान को साक्षी मानकर पूर्ण सत्य, निष्ठा
02:35और जिम्मेदारी के साथ संकल्प लेता हूँ।
02:38आज से पूरे वर्ष नियम पूर्वा के एकादशी व्रत का पालन करूँ।
02:44तुम्हारा ये संकल्प सिद्ध हो, भगवान तुम्हें शक्ती और निष्ठा प्रदान करे।
02:50प्रकृती के प्रभाव से परे एक वर्ष थक एकादशी व्रत किया, भक्ती को राज मुकुट से उपर रखा।
02:58अंबरीश अपना मन, वानी, कर्म और संपत्ती सब भगवान को समर्पित कर चुके थे।
03:05उनके लिए वरत केवल भोजन छोड़ना नहीं था, बलकि हरी स्मरण, कीर्तन, दान, ब्राम्हन सेवा, आत्म सैयम, इंद्रियों की शुद्धी
03:16का साधन था।
03:45ओम नमो भगवते वासुदेवाया।
03:47वस्त्र तथा स्वण वित्रित किया।
03:51ओम भगवते वासुदे वाय नमा।
04:06और अब द्वादशी का वो शुबशन निकटा चुका था, जब इस महान तपस्या का पारण होना था।
04:18ओम नमो भगवते वासुदेवाया।
04:21ओम नमो नारायना।
04:22ओविंदं भज्यमूर्मते हरी श्री हरी हरी।
04:48द्वादशी के शुब अवसरकर प्रवेश करते हैं महा तपस्वी दुर्वासा रिशी।
04:58गुरुदेव, आपका स्वागत है।
05:01कृपा कर भोजन ग्रहन करें।
05:03यशस्वी भाव।
05:05राजन, मैं यमुनासनान के बाद ही भोजन ग्रहन करूँगा।
05:11जैसी प्रभु की इच्छा, आशिरवाद है तुम्हें।
05:21वरत तोड़ने का समय समाप्त होने वाला था।
05:24रिशी लोटे नहीं, सभा में तनाव छा गया।
05:29राजन, यमुनासनान से रिशीवर अभी तक नहीं लोटे हैं, काफी समय बीच चुका है।
05:35कहीं अधिक विलम न हो जाए।
05:42प्रभु कृपा करके मार्क दर्शन करें।
05:46ये कैसा धर्म संकट है।
05:48मार्क दर्शन करें।
05:49राजन द्वाद्शी का मुहूत निकला जा रहा है।
05:53आप अन्ग्रहन करें।
06:01रुशिद दुर्वासा हमारे अतिथी है।
06:04उनको बिना पवाए, स्वयम पानानुचित ही नहीं अपराध होगा।
06:11अन्ण नहीं तो सिर्फ जल ग्रहन कर ले राजन।
06:14ना किसी का अपमान होगा, ना पूजा में व्यवधान होगा।
06:18अतिथी से पहले खाना धर्म के विरुद्ध है और समय पर पाराण न करना नीयम के विरुद्ध है।
06:26पुरोहित के कहने पर राजा सिर्फ जल ग्रहन करते हैं।
06:32जल ग्रहन करने से पारण भी हो गया, और अतिथी का अपमान भी नहीं हुआ।
06:37But how can you do it?
06:41Rishi Durwasa, Yamuna Snan karke lottay.
07:08A new life will be created!
07:18Rishi Dhurvaasa will take a gift of his grace to take a money to accept it.
07:24Oh
07:25Oh
07:25Oh
07:26Oh
07:26Oh
07:33I am here, now I am going to be the king of the king of the king of the king
07:42of the king of the king.
07:57yes
07:59is
08:02is
08:03the
08:04the
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08:05the
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08:06the
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08:10foreign
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08:11ुपर संकट आता है तब संकट मोचट भगवान स्वयम अपने भक्तों की रक्षा करते हैं भगवान का सुदर्शन चक्र जाकृत
08:18हो गया और फिर
08:34कृत्या के बद के बार सुदर्शन चक्र रिशी दुर्वासा के समक्ष पहुचता है
08:39रिशी भाय भी खोकर भागते हैं
09:03रुशिवर आप तो जानते हैं ये मेरे रोके नहीं रुकेगा
09:06आप सीधे कैलाश महाकाल के शरण में जाईए बोले नाथी कुछ करेंगे
09:20रुशिवर आप शान्त हो जाए
09:22सुदर्शन भगवान विश्नु कास्त्र है
09:24वे ही इसे नियंत्रित कर सकते हैं
09:26कृपय आप उनके पास जाईए
09:31भगवान मुझे सुदर्शन से बचाईए
09:35अब आप ही मुझे बचा सकते हैं
09:37उरुशिवर मैं स्वतंत्र नहीं हूँ
09:40मैं अपने भगत के अधीन हूँ
09:42आपका कल्यान राजा अंबरीशी करेंगे
09:45आप उनहीं के शरण में जाएं
09:48क्षमा कीजिए राजन
09:50मुझे क्षमा कीजिए
09:52इस सुदर्शन से बचा लीजिए
09:57उठिये प्रभू
09:58सारा दोश मेरा है
10:00आप निर्दोश हैं
10:02मैं आपसे माफी मांगता हूँ
10:04प्रभू
10:04शांत हो जाएं
10:06सारा दोश मेरा है
10:08इन्हें माफ कर दीजिए
10:22Ananyashchintayantomam
10:23Yejanaah paryupasate
10:30Teshamnithyabhiyuktanam
10:34Yogakshemambahamyaham
10:36Jho bhakt ananyabhav se nirantar mera chintan aur bhakti kertate hain
10:42Unka bhaar mein swayam uthaata haun
10:44Aur unki raksha kertata haun
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