रेगिस्तानी जिले जैसलमेर में तापमान का ग्राफ लगातार ऊपर बढ़ने के साथ गर्मी अब सिर्फ मौसम की स्थिति नहीं, बल्कि दैनिक जीवन और जरूरी सेवाओं के लिए भी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। ऐसे हालात में प्रशासनिक मशीनरी ने स्वास्थ्य, पेयजल और बिजली सेवाओं को केंद्र में रखते हुए तैयारियों की गति तेज कर दी है।
जिले में बढ़ती गर्मी के असर को देखते हुए प्राथमिकता उन व्यवस्थाओं पर रखी जा रही है, जिनका सीधा संबंध आमजन से जुड़ा है। चिकित्सा संस्थानों में संसाधनों की उपलब्धता से लेकर पेयजल आपूर्ति और विद्युत व्यवस्था तक विभिन्न स्तरों पर सक्रियता बढ़ी है। गर्मी के दौरान सबसे अधिक दबाव चिकित्सा, पानी और बिजली तंत्र पर पड़ता है। इसी कारण विभागीय स्तर पर आपसी समन्वय को अधिक सक्रिय रखा गया है ताकि किसी भी क्षेत्र में समस्या लंबी न खिंचे।
तैयारी का फोकस इन बिंदुओं पर
-अस्पतालों में कूलर, पंखे और शुद्ध पेयजल व्यवस्था की स्थिति पर नजर
-लू-तापघात प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए अलग बेड व्यवस्था
-ओआरएस, फ्लूड, ड्रिप सेट और आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक
- संवेदनशील क्षेत्रों में वैकल्पिक जलापूर्ति की तैयारी
-लो और हाई वोल्टेज की स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर व्यवस्था
-क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी और शिकायतों के त्वरित समाधान पर फोकस
इन अधिकारियों की मौजूदगी रही महत्वपूर्ण
बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर परसराम सैनी, जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रश्मि रानी, उपखंड अधिकारी सक्षम गोयल,अधीक्षण अभियंता विद्युत भैराराम चौधरी, अधीक्षण अभियंता पीएचईडी कैलाश चंद मीणा, अधीक्षण अभियंता वाटरशेड कौशल पालीवाल, नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह सोढ़ा, महिला अधिकारिता उपनिदेशक अशोक गोयल, सहायक निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क प्रवीण प्रकाश चौहान, महिला एवं बाल विकास विभाग उपनिदेशक सोमेश्वर देवड़ा और वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया मौजूद थे।
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