00:00कभी यह मत सोचो कि तुम देर से चल रहे, सूरज भी हर दिन अपने समय पर निकलता है और
00:07चांद भी किसी दोड का नाम नहीं, यह खुद को बेहतर बनाने का सफर है, आज की महनत शायर किसी
00:14को न दिखी, लेकिन कल यही महनत तुम्हारी पहचान बनेगी, इसलिए रुखना म
00:21ठक जाओ, तो थोड़ा आराम कर लो, लेकिन अपने सपनों का साथ मत छोड़ो, याद रखो, सबसे अंधेरी रात के
00:29बाद ही, सबसे उजली सुभा आती है, अंधिन स्क्रीन बड़े अक्षरों में, तुम्हारा समय आएगा बस चल दे रो
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