00:00कृष्णाय वाशुदेवाय हरे परमात्मने प्रनता क्लेशना शाय गोबिंदाय नमूनमा
00:06प्यारे मित्रो जैशियराम जैमातादी
00:08आज आपसे चर्चा करते हैं गंगा दसहरा का पावन पर्व कब मनाया जाएगा
00:15इस विशय को लेकर के आपसे चर्चा करते हैं कि गंगा दसहरा का जो भी पावन पर्व है
00:22यह बड़ी भक्ती और स्रद्धा का एक विशय है बड़ी भावना के शात में पर्व को मनाया जाता है
00:28आज के दिन दानपूर्ण नित्याद किये जाते हैं तो ये पर्ब दुवजार चब्विस में किस तारिक को मनाया जाएगा जेश्ट
00:36मास के शुकल पक्ष की दश्मी तिथी को गंगाद सहरा का पावन पर्ब मनाया जाता है
00:43और पुराणों में वर्णित है आख्यान ऐसा प्राप्त होता है कि गंगाद सहरा जेश्ट शुकल दश्मी को हस्त नक्षत्र कालीन
00:56श्वर्ग में गंगाजी का अवतरण हुआ था
01:01अतयो इस दिन गंगा इश्टनान करना चाहिए गंगा इश्टनान करने के बाद में जब करना चाहिए दान करना चाहिए अन
01:11दान करना चाहिए वस्त्रों का दान करना चाहिए दक्षना इत्यादी का दान करना चाहिए पित्रों के लिए तरपन इत्यादी करना
01:20चाहिए
01:21और यह उपाशना का भी एक केंद्र बताया गया है आज के दिन जो उपाशना करते हैं गंगा इस्टनान करते
01:29हैं उपवास रखते हैं और उपाशना अर्था तवरत पूजनित्यादि करते हैं उनके दस प्रकार के पाप दूर हो जाते हैं
01:39दस प्रकार के पाप कौन से बताया गया है कि तीन प्रकार के पाप काईक पाप हैं, चार प्रकार के
01:47जो पाप वाचिक हैं और तीन प्रकार के पाप जो हैं मानशिक हैं, इस तरह से दस प्रकार के पाप
01:56भी हमारे दूर होते हैं
02:09दशहरा इश्मरता ब्रह्म पुरान में ऐसा बताया गया है योगा दिक्ये है फला दिक्यात अर्थात दस योगों से जितने योग
02:23की अधिकता रहे उतना फल अधिक प्राप्त होता है
02:29जेश्ट अधिक मास की इस्थिती में अधिक मास में यह पर्व मनाया जाएगा जेश्ट का महिना चल रहा है अधिक
02:39मास है अधिक मास का मतलब पुर्षो तम माश है
02:43जेश्ठ के महिने में यह माश अर्थात जेश्ठ माश की स्थिती में उसी अधिक माश में यह पर्व मनाया जाता
02:55है
02:55जेश्ठ मासे सती तथयव दसहरा कार्या नात शुद्धे अर्थात शास्त्र के अनुशार जेश्ठ अधिक माश में गंगाइश्पनान करना पूजन इत्यादि
03:12करना सुद्ध जेठ की अपेक्षा अधिक फल दायक होता है
03:19अतयो वर्स दोहजार छब्विस में पत्चीश मई दोहजार छब्विस जेश्ट का पावन दश्मी का परवहे और जेठ दशहरा इसी पत्चीश
03:33तारिक को मनाया जाएगा
03:35अनेका अनेक ग्रंथों के अनुशार जैसे की मार्तंड पंचांग में पंचांग दिवाकर में निरने शिंदू में राजधानी पंचांग में पत्चीश
03:48मई को ही जेठ दशेरा मनाने का निरने बताया गया है
03:54कुछ तीर्थिस्थलों पर गंगाद सहरा अधिक मास की अपेक्षा शुद्ध जेष्ट माश में मनाने की परंपरा है
04:06जहां पर जैसी परंपरा हो उसके अनुसार आपको कार्य करना चाहिए
04:13तो 25 मई 2026 को गंगाद सहरा का पावन पर्ब मनाया जाएगा
04:21अब जो लोग हरिद्वार इत्यादी नहीं जा सकते हैं वो अपने ही घरों में थोड़ा सा जल ले करके
04:27और गंगा जल जो है बाल्टी में डाल करके इस्टनान करिए गंगा इस्टनान का फल पराप्त होता है
04:35बोलो गंगा मैया की जै
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