00:00खुशियां, हमारी खुशियां खाने ही प्रत्वी
00:06जितना हम भोग रहें उतना हमें खिला पाने के लिए प्रत्वी के पास है नहीं तो हम प्रत्वी कोई खा
00:12गए
00:17और अभी भी हमारी खुशियों का पैमाना वही है
00:20हम समझ ही नहीं रहें कि हर बच्चा जो पैदा हो रहा है
00:23वो हजारों पेड़ों और हजारों पशुओं की लाश पर पैदा हो रहा है
00:28प्लाइमिट चेंज का असर जो है अब साफ साफ दिखने लगा है हम लोगों को
00:32और हम लोग इसका हिलाज बहुत सतही तौर पर कर रहे हैं
00:36जैसे कि पेड़ लगाना हो गया
00:39पांच नहीं, तुम बीस नहीं, तुम सो पेड़ भी लगा दो
00:42तुम पांच सो पेड़ भी लगा दो, उससे भी कुछ नहीं होगा
00:46जितना तुम्हें जंगल चाहिए प्रत्वी पर उतनी जगही नहीं है
00:49सड़क किनारे तुम पेड़ लगा दो उस पेड़ की दुर्दशा देखी दिल्ली अगरा में जाओ
00:54सड़क किनारे जो पेड़ लगे उनकी क्या बेचारों की दैनी हालत है आप कुछ मत करिया आप जो कर रहे
00:59हो बस वो करना बंद करो कोईट के दिनों में देखा था न बच्चा पैदा किये जा रहे हो बच्चा
01:03पैदा हुआ है कहां से घर आएगा उसके लिए वो पैदा हुआ
01:20करके अपने आपको अपराध से बरी कर लेना चाहते हो
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