00:00कभी कभी online shopping करते वक्त या अपना समान बेशते वक्त मन में एक सवाल जरूर आता है ना कि
00:05ये बड़े-बड़े e-commerce platforms हर sale पर seller की कमाई का एक छोटा सा हिस्सा आखिर क्यों काट
00:11लेते हैं।
00:12आज की इस चर्चा में हम e-commerce के दुनिया के इसी बड़े रहस्य से परदा उठाने वाले हैं।
00:42ये TCS असल में बला क्या है, इसके जरिये डेटा की गड़बणियां कैसे पकड़ी जाती है, एक्स्टा टैक्स का वो
00:48मशूर भरम क्या है और फाइनली ग्राउंड लेवल पर ये पूरा सिस्टम काम कैसे करता है।
00:53चलिए सबसे पहले उस पुरानी लूप होल की बात करते हैं, जिसने इस सबकी शुरुवात की।
00:58देखे शुरुवाती दौर में ऑनलाइन बजारना बिना नियम कानून वाले किसी वाइल्ड वेस्ट जैसा था।
01:03TCS लागू होने से पहले जो सेलर्स रिजिस्टर नहीं थे, उनके लिए टैक्स से बचना बहुत आसान था।
01:09लोग अपनी असली सेल बहुत कम दिखाते थे, फेक अकाउंट बनाते थे और बिना टैक्स दिये रातो रात ऐसे गायब
01:15हो जाते थे जैसे कोई जादू हो।
01:16लेकिन TCS के आने के बाद, गेम पूरी तरह पलट गया, अब हर चीज की आटोमाटिक रिपोर्टिंग होती है, इन
01:23मार्केट प्लेसिस को कड़ाई से रिकॉर्ड मेंटेन करने पड़ते हैं, जिससे टैक्स का एक ऐसा पक्का ट्रेल बनता है, जिससे
01:28कोई मिटा नहीं सकता�
01:31कि ये TCS है क्या चीज?
02:04अब सबसे मज़ेदार बात, ये कटोती असल में है कितनी, सिर्फ और सिर्फ एक परतिशत, मतलब सोच ये, अगर हजार
02:11रुपए का कोई मुबाईल कवर बिका है, तो TCS के नाम पर सिर्फ 10 रुपए कटेंगे, इतनी छोटी सी रकम,
02:17अपने आप में इस बात का पक्का सब�
02:30ये ही से ये पूरी कहानी एक डिटेक्टिव थ्रिलर बन जाती है, जरा इस डेटा मैचिंग को देखिए, मान लीजिए,
02:38Amazon ने रिपोर्ट किया कि किसी सेलर की कुल सेल 5 लाक रुपए की हुई है, लेकिन उसी सेलर ने
02:44अपने GST रिटर्न में होश्यारी दिखाते हुए, सिर
02:59कार ने तुरंत उस डेटा को सेलर के रिटर्न से मैच किया, और जहां भी आकड़े उपर नीचे हुए, बिना
03:05किसी देरी के एक आटोमाटिक नोटिस जनरेट हो गया, ये डर ही काफी है सेलर्स को अपना रिटर्न इमानदारी से
03:11भरने के लिए, लेकिन इस सिस्टम को लेकर
03:14एक बहुत बड़ा भ्रहम भी है, जिसे दूर करना बहुत जरूरी है, ओनलाइन व्यापार करने वालों में ये सबसे बड़ी
03:20शिकायत होती है, तो इसे एकडम साफ कर लेते हैं, TCS कोई एक्स्ट्रा टैक्स का बोज नहीं है, और ना
03:26ही ये कोई पर्मनन नुकसान है, बहु
03:43पर उसका 3,000 रुपे का TCS पहले ही कट चुका है, तो उसे अपनी जेब से सिर्फ बचे हुए
03:4817,000 रुपे ही देने होंगे, तो बेसिकली ये कटा हुआ पैसा एक एडजस्ट होने वाला टैक्स क्रेडिट है, ये
03:55फाइनल बिल को कम कर देता है, बढ़ाता नहीं, तो चलिए
03:58अब फाइनली देखते हैं कि एक असली ट्रांजाक्शन में ये सब कैसे फिट बैटता है, पैसे का फ्लो कैसे होता
04:04है, इसे स्टेब बाइ स्टेब समझते हैं, मान लीजे फ्लिप कार्ट पर 10,000 रुपे का कोई समान बिका, ये
04:09हुआ पहला स्टेब, दूसरे स्टेब में इ
04:28इस पूरे तामजाम का फाइनल रिजल्ट क्या निकला, सरकार के पास अब बैठे बैठे सब कुछ आटोमाटिकली आ रहा है,
04:35सेलर की सेल का डेटा, प्लाटफॉर्म के ट्रांजाक्शन का डेटा और एक ऐसा पक्का टैक्स ट्रेल जिससे कोई मुकर नहीं
04:41सकता, कल को अगर
04:43कोई अपनी बुक्स में हेरा फेरी करने की कोशिश भी करे न, तो भी मार्केट प्लेस का दिया हुआ ये
04:48डेटा हमेशा के लिए सेफ रहता है, और यही बात इस पूरे सिस्टम के असली मकसद को साबित करती है,
04:54ये एक्स्ट्रा रेवेन्यू इखता करने की कोई स्कीम नही
04:57है, बलकि ये e-commerce ecosystem में निगरानी और transparency लाने का एक बहुत ही शांदार और अचूक तरीका है,
05:05तो अंत में ये पूरी विवस्था हमारे सामने एक बहुत ही गहरा सवाल छोड़ जाती है, जब हर एक digital
05:12transaction अपने पीछे एक ऐसी automatic और permanent निशानी छोड़ ही रहा है, तो क्या हमें
05:18ये मान लेना चाहिए कि बिना track किये जाने वाली गुमनाम विकरी का दौर अब आधिकारिक तौर पे खत्म हो
05:23चुका है, सोचने वाली बात है है न, इसी विचार के साथ हम आज की ये चर्चा यहीं खत्म करते
05:29हैं, जुड़ने के लिए बहुत बहुत चुकरिया
Comments