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  • 8 hours ago
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Transcript
00:00एक थे शिष्य जी और एक थे गुरू जी तो गुरू जी ग्यान देने निकलें शिष्य जी पीछे पीछे और
00:06जब ग्यान दें तो दस में से एक ही आदमी सुने और सौ में से एक ही आदमी गुने तो
00:11शिष्य को बड़ी निराशा हुई गुरू जी जा रहे हैंगे बनारस की
00:20तो आपना बता रहें हैं, सो में से एक आदमी ऋनके बोले कि हाँ, हम भी चलेंगे काशी, परले, सब
00:29कुत्ते बनारस ही चले जाएंगे,
00:31तो दोना कौन चाटेगा
00:33दोना चाटने अला भी तो कोई चाहिए न
00:35सबके जीवन में अगर वो आ गया
00:37तो ये जो सब मूर्खताएं चल रही है इनको कौन समालेगा
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