00:03आईए आज आपको लिए चलते हैं बिहार स्थित गया जी के एतिहासिक केदारनात मार्किट में जहां नगर निगम को सालाना
00:11करोडों का टैक्स तो टाइम पर चाहिए लेकिन सफाई के नाम पर सिर्फ महीने में एक दिन का एहसान मिलता
00:18है
00:18बाकी के दिन जनता और दुकांदार इस एतिहासिक गंदगी और आवारा पशों के साथ सिस्टम की नाकामी का जश्टन मनाते
00:27हैं
00:55साल 1922 में राय बहादूर की दारनाथ ने पांच बीगे का ये कैंपस शेहर को गिफ्ट किया था ताकि लोगों
01:02को रोजगार मिल सके
01:03लेकिन आज हलकी सी बारिश होते ही प्रशासन दुकांदारों को मुफ्त में घुटने भर पानी और कादो कीचड़ का स्विमिंग
01:12पूल गिफ्ट कर देता है जहां लोग तैरते हुए खरिदारी करने को मजबूर हो जाते हैं
01:17गया का एतिहासिक और गौरबसाली केदारनाथ मार्केट जो 1942 में राय बहादूर केदारनाथ जी एक यहां के बड़े लैनलोड थे
01:31जिन्होंने गिफ्ट किया था
01:34उस समय गया नगर पालिका थी तेरासी से गया नगर निगम बना तो वो गिफ्ट किये थे और पांच बिगहे
01:43का जो वो कैमपस है उसमें सैंकड़ो अस्थाई दुखाने थी आज भी है सारा दुखान उसमें बना हुआ
02:07कमाल की बाद तो ये है कि इसी बधाल कैमपस के पास ही गया सदर SGO का आलिशान कार्यालाय है
02:13और खुद नगर निगम का मुख्य दफतर भी है
02:16लेकिन इसके बावजूद भी बड़े बड़े साहाब सकी चड़ और गंदगी से अंजान बने रहते हैं मजाल है कि उनकी
02:24बंद आँखे खुल जाएं
02:55करोणों का टैक्स वसूलने वाले अफसरों की नाक के नीचे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नहरू की प्रतिमा और एतिहासिक
03:04जवाहर टाउन हॉल आज कबार घर बन चुके हैं
03:07ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि स्मार्ट सिटी का दावा करने वाला प्रशासन सिर्फ टैक्स वसूलने की मशीन बना
03:14रहेगा या फिर कभी इस एतिहासिक धरोहर को उसका हक भी मिलेगा
03:19गया से एटीवी भारत के लिए रतनेश कुमार की रिपोर्ट
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