00:06आखिर वेदान्ता क्यों हार गया जे ए एल की सबसे बड़ी जी अडानी ने कैसे बाजी मादे कूट के फैसले
00:14ने कैसे सब को चुकाया
00:15वेदान्ता हारा जीता अडानी
00:23पैसा ज्यादा था भरोसा कम पड़ गया
00:26वेदान्ता ने लगाई बोली अडानी ने सिस्टम समझा
00:30NCR का बड़ा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट लेकिन बीच में ही बनाने वाली कमपनी फाइल कर देती है इनसॉलवेंसी
00:38एक कमपनी ज्यादा लगाती है सबसे बड़ी बोली लेकिन फिर भी डील हार जाती है
00:44सवाल उठता है क्या ये सिर्फ पैसों का खिल था या फिर NCRAT ने कुछ और देखा जो आम लोग
00:52नहीं देख सके
00:52जैप्रकाश एसोसियेट यानि की JAL 57,000 करोड रुपए से ज्यादा के कर्ज में डूबी कमपनी और उसे खरीदने की
01:02लड़ाई में आमने सामने थे
01:04वेदान्ता और अदानी को मामला क्या था दरसल मार्च 2026 में NCLT ने अदानी एंटरप्राइजस की 14,535 करोड रुपए
01:14की बोली को मनजूरी दे लेकिन वेदान्ता ने दावा किया उन्होंने पहतर बोली लगाई थी
01:19वेदान्ता का कहना था कि उनकी बिल्डिंग अभी के टोटल वेल्यू से तकरीबन 3400 करोड रुपए ज्यादा थी और नेट
01:28प्रेजेंट वेल्यू यानि की NPV से लगभग 500 करोड रुपए आगे थी
01:34तो फिर सवाल वही अगर वेदान्ता ज्यादा पैसा दे रहा था तो जीत अदानी की कैसे पूली ऐसे पलट गया
01:41पासा
01:42NCLAT ने अपने फैसले में साफ कहा IBC यानि की Insolvency Law का मकसद सिर्फ सबसे उची बोली चुनना नहीं
01:50है
01:50कानून का असली मकसद है समय पर कमपनी को बचाना उसका रिवाईवल और इन्वेस्टर को उसका पुनर जीवन करना और
01:59करज़दाताओं को भरोसे मन समाधान देगा
02:02सिर्फ पैसा नहीं भरोसा माईने रखता है
02:05लेंडर्स यानि बैंकों ने सिर्फ बोली की रकम नहीं देखी
02:08उन्होंने एक evaluation matrix बनाई उसमें देखा गया कितना upfront cash मिलेगा
02:14पैसा कितनी जल्दी मिलेगा, business plan कितना practical है
02:18कमपनी को चलाने की शमता किसमें ज्यादा है और execution capabilities किसकी मजबूत है
02:25वेदान्ता कहां पीछे रह गया, यहीं वेदान्ता की कमजोरी सामने आई
02:29वेदान्ता की बोली कागस पर बड़ी थी लेकिन लेंडर्स के लिए सबसे एहम था fast recovery
02:35अडानी का plan upfront cash recovery और execution capability में बहतर माना गया
02:40यानी बैंकों को भरोसा था कि अडानी ग्रूप इस large business को जल्दी और इस्तिर तरीकी से समाल सकता है
02:48NCLAT ने साफ कहा सिर्फ highest bid जीत की guarantee नहीं
02:53चिवनल ने माना कि committee of creditors यानी COC को commercial wisdom का अधिकार है
03:00मतलब अंतिम फैसला सिर्फ रकम देखकर नहीं पूरे business risk और buyability को देखकर लिया जाएगा
03:07तो वेदानता इसलिए नहीं हरार क्योंकि उसकी बोली छोटी थी
03:11बल्कि इसलिए क्योंकि insolvency process में सिर्फ ज्यादा पैसा नहीं बल्कि ज्यादा भरोसा माइने रखता है
03:17और N.C.L.A.T. ने यही का
03:20C.O.C. का फैसला मनमाना नहीं बल्कि commercial wisdom पर बेज़र था
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