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JP Associates यानी JAL की ₹57,000 करोड़ से ज़्यादा कर्ज़ वाली insolvency battle में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ देखने को मिला। Vedanta ने कथित तौर पर ज़्यादा बोली लगाई… फिर भी डील जीत गया Adani Group।
आख़िर ऐसा क्यों हुआ?
क्या सिर्फ़ ज़्यादा पैसा ही सब कुछ नहीं होता?
NCLAT ने अपने फैसले में क्या कहा?
और insolvency process में “commercial wisdom” का असली मतलब क्या है?
इस एक्सप्लेनर में समझिए:

Vedanta vs Adani की bidding war
JP Associates insolvency case
NCLT और NCLAT की भूमिका
CoC यानी lenders ने Adani को क्यों चुना
Upfront cash recovery और execution capability का पूरा खेल
और क्यों IBC में highest bidder हमेशा winner नहीं होता

ये सिर्फ़ एक corporate deal नहीं… बल्कि भारत के insolvency system को समझने का एक बड़ा real case study है।

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~HT.178~ED.104~

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Transcript
00:06आखिर वेदान्ता क्यों हार गया जे ए एल की सबसे बड़ी जी अडानी ने कैसे बाजी मादे कूट के फैसले
00:14ने कैसे सब को चुकाया
00:15वेदान्ता हारा जीता अडानी
00:23पैसा ज्यादा था भरोसा कम पड़ गया
00:26वेदान्ता ने लगाई बोली अडानी ने सिस्टम समझा
00:30NCR का बड़ा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट लेकिन बीच में ही बनाने वाली कमपनी फाइल कर देती है इनसॉलवेंसी
00:38एक कमपनी ज्यादा लगाती है सबसे बड़ी बोली लेकिन फिर भी डील हार जाती है
00:44सवाल उठता है क्या ये सिर्फ पैसों का खिल था या फिर NCRAT ने कुछ और देखा जो आम लोग
00:52नहीं देख सके
00:52जैप्रकाश एसोसियेट यानि की JAL 57,000 करोड रुपए से ज्यादा के कर्ज में डूबी कमपनी और उसे खरीदने की
01:02लड़ाई में आमने सामने थे
01:04वेदान्ता और अदानी को मामला क्या था दरसल मार्च 2026 में NCLT ने अदानी एंटरप्राइजस की 14,535 करोड रुपए
01:14की बोली को मनजूरी दे लेकिन वेदान्ता ने दावा किया उन्होंने पहतर बोली लगाई थी
01:19वेदान्ता का कहना था कि उनकी बिल्डिंग अभी के टोटल वेल्यू से तकरीबन 3400 करोड रुपए ज्यादा थी और नेट
01:28प्रेजेंट वेल्यू यानि की NPV से लगभग 500 करोड रुपए आगे थी
01:34तो फिर सवाल वही अगर वेदान्ता ज्यादा पैसा दे रहा था तो जीत अदानी की कैसे पूली ऐसे पलट गया
01:41पासा
01:42NCLAT ने अपने फैसले में साफ कहा IBC यानि की Insolvency Law का मकसद सिर्फ सबसे उची बोली चुनना नहीं
01:50है
01:50कानून का असली मकसद है समय पर कमपनी को बचाना उसका रिवाईवल और इन्वेस्टर को उसका पुनर जीवन करना और
01:59करज़दाताओं को भरोसे मन समाधान देगा
02:02सिर्फ पैसा नहीं भरोसा माईने रखता है
02:05लेंडर्स यानि बैंकों ने सिर्फ बोली की रकम नहीं देखी
02:08उन्होंने एक evaluation matrix बनाई उसमें देखा गया कितना upfront cash मिलेगा
02:14पैसा कितनी जल्दी मिलेगा, business plan कितना practical है
02:18कमपनी को चलाने की शमता किसमें ज्यादा है और execution capabilities किसकी मजबूत है
02:25वेदान्ता कहां पीछे रह गया, यहीं वेदान्ता की कमजोरी सामने आई
02:29वेदान्ता की बोली कागस पर बड़ी थी लेकिन लेंडर्स के लिए सबसे एहम था fast recovery
02:35अडानी का plan upfront cash recovery और execution capability में बहतर माना गया
02:40यानी बैंकों को भरोसा था कि अडानी ग्रूप इस large business को जल्दी और इस्तिर तरीकी से समाल सकता है
02:48NCLAT ने साफ कहा सिर्फ highest bid जीत की guarantee नहीं
02:53चिवनल ने माना कि committee of creditors यानी COC को commercial wisdom का अधिकार है
03:00मतलब अंतिम फैसला सिर्फ रकम देखकर नहीं पूरे business risk और buyability को देखकर लिया जाएगा
03:07तो वेदानता इसलिए नहीं हरार क्योंकि उसकी बोली छोटी थी
03:11बल्कि इसलिए क्योंकि insolvency process में सिर्फ ज्यादा पैसा नहीं बल्कि ज्यादा भरोसा माइने रखता है
03:17और N.C.L.A.T. ने यही का
03:20C.O.C. का फैसला मनमाना नहीं बल्कि commercial wisdom पर बेज़र था
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