00:00चालीस के بعد आदमी कितना पढ़ा लिखा है या अनपढ़ है,
00:03इसकी ज्यादा वैल्यू नहीं रह जाती,
00:05कई बार आप सबजी वाले या चाए वाले के पास खड़े होते हैं,
00:09और अचानक पता चलता है कि उसकी इनकम आपसे ज्यादा है,
00:12वो भी टैक्स फ्री,
00:41तब जिन्दगी एक जोर का जटका देती है।
00:43इसकी भी कोई एहमियत नहीं रहती।
00:45क्योंकि जब घुटनों में दर्द होता है तो बड़ा घर ज्यादा तकलीफ देता है।
00:49एक कमरे से दूसरे कमरे तक जाना भारी लगने लगता है।
00:52उस समय छोटा घर ही सुकून देता है।
00:54असी के बाद आपके बैंक अकाउंट में करोडों रुपिय क्यों न पड़े हूं।
00:58आपकी टेबल पर रखा खाना कुछ सौ रुपिय की दवाईयों से ज्यादा कुछ नहीं होता।
01:02आदमी पूरी जिन्दगी भाग डौड करता है।
01:04पैसे के लिए न जाने कितने प्रपंच रचता है।
01:07दिमाग में एक ही सोच बैठी रहती है।
01:09अपना टाइम आएगा तब एंजॉय करेंगे।
01:12लेकिन सच ये है कि हम हर दिन अपने उस टाइम से दूर नहीं
01:15बलकि बुढ़ापे के और करीब जा रहे हैं।
01:17और बुढ़ापे में एंजॉय नहीं ज्यादा तर बीमारियों से संघर्श ही करना होता है।
01:22और हमारी आँखों के सामने हमारे बच्चे, रिष्टेदार, यहां तक की नौकर भी उसी पैसे से एंजॉय करते हैं
01:28जिसे हमने पूरी जिन्दगी दाव पर लगा कर कमाया।
01:31श्कर्श, जिन्दगी कल के लिए नहीं होती, जिन्दगी आज के लिए होती है।
01:35भगवान ने जो भी दिया है, उसका आनंद अभी लेना सीखिए।
01:39स्वस्थ रहकर, अपनों के साथ और सुकून के पल जी कर।
01:43क्योंकि पैसा बाद में काम आए या ना आए, लेकिन आज का समय अगर चला गया, तो वो कभी वापस
01:49नहीं आता।