00:06पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही अब सर्फ सरकार नहीं बदली है बलकी राज्य की राजनितिक और वैचारिक दिशा बदलने
00:13के संकेत भी मिलने लगे हैं
00:15मुख्यमंतरी पद की उशपत लेने के कुछे घंटों बाद सुवेंदू अधिकारी ने ऐसा एलान कर दिया जुसने बंगाल की राजनिती
00:21में नई बहस छेड़ दी है
00:23ममता बैनर जी जहां पोईला बैशाक यानि की बंगाली नववर्ष के दिन बंगाल दिवस मनाने की पक्षधर थी
00:29वहीं अब शुवेंदू अधिकारी ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार हर साल 20 जून को ही बंगाल दिवस
00:35मनाईगी
00:36आज के इस रपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आखिर बंगाल दिवस कोले कर विवाद क्या है
00:40ममता बैनर जी और केंदर सरकार के बीच टकराव क्यों हुआ था और अब सुवेंदू अधिकारी ने ऐसा क्या फैसला
00:45लिया है जिसने इस मुद्धे कोफर से सुर्ख्यों मिला दिया है
00:48दरसल कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउन में भवेशपत ग्रहन समारो के बाद मुख्यमंतरी सुवेंदू अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार
00:55पश्चिम बंगाल दिवस 20 जून को मनाने का प्रस्ताव विधान सभा और कैबिनेट में लाएगी
01:00सुवेंदू अधिकारी का कहना है कि 20 जून 1947 बंगाल के इतिहास की सबसे महतोपुन तारीकों में से एक है
01:07इसे दिन पश्चिम बंगाल के विधायकों ने भारत के साथ रहने और विभाजन के पक्ष में मददान किया था
01:13उस समय पुर्वी बंगाल के विधायकों ने भी भाजन का विरोध किया था लेकिन पश्चिम बंगाल ने भारत के साथ
01:18रहने का फैसला लिया
01:19बाद में पुर्वी बंगाल पुर्वी पाकिस्तान बना और फिर बंगलादेश की रूप में अस्तित्व में आया
01:25सुवेंदू अधिकारी ने कहा कि अगर उस समय ये फैसला नहीं लिया गया होता तो पश्रिम बंगाल के लोग आज
01:30एक सुतंत्र और लोकतांत्रिक भारत का हिस्सान नहीं बन पाते।
01:34मुख्यमंत्री ने इस एतिहासिक फैसले का श्रिय जन संग के संस्थापक डॉक्टर श्यामप साद मुखर जी और भारत सिवाश्रम संग
01:41के संस्थापक स्वामे प्रनबा अनंद को दिया।
01:43शबत लेने के बाद सुवेंदू अधिकारी भावानी पूर्स थे डॉक्टर श्यामप साद मुखर जी के घर भी पहुँचे।
01:48सवाल यह है कि आखर समुद्धे पर विवाद क्यों हुआ था।
01:51दरसल साल 2023 में केंद सरकार ने 20 जून को पश्यम बंगाल दिवस के रूप में सुची बद किया था।
01:56इसके बाद राजभवन ने भी 20 जून को स्थापना दिवस अमारो आयो जित किया था लेकिन ततकालीन मुख्यमंतरी ममता बैनर्जी
02:03ने इसका विरोध किया।
02:04ममता सरकार का कहना था कि बंगाल दिवस पोईला बैशाक यानि कि बंगाल नवर्ष के दिन मनाया जाना चाहिए क्योंकि
02:10वो बंगाल की संस्कृतिक पहचान और परमपरा का प्रतीक है।
02:34से पेश किया जाएगा।
02:35राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ये सिर्फ एक तारीख बदलने का मामला नहीं है, बलकि बंगाल की राजनीती में वहच्वारिक
02:41बदलाव का भी संकेत है।
02:43BJP जहां बंगाल के तिहास को राश्ट्रवाद और विभाजन के संदर्व में देखने की कोशुश कर रही है, वही TMC
02:49इसे सांस्कृतिक पहचान से जोड़ कर देखती रही है।
02:52यानि बंगाल दिवस की ये बहस अब सिर्फ कैलेंडर की तारीक नहीं, बलकि बंगाल की राजनीती और पहचान की नई
02:58लड़ाई बन चुकी है।
02:59इस खबर में तरह ही अपडेट्स के लिए देखते रहे वन इंडिया हिंदी।
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