00:00मार्क्स खुद क्या थे? ज़िए बंगाल के इलेक्शन अभी खता हुआ है, मार्क्स कहते थे कि वेक्ति की जो सोच
00:05है, उसकी क्लास डिटरमाइन करती है, विदाउट एक्सेप्शन. मैं सोच रहा था कि इस फ्रेमवर्क के हिसाब से मार्क्स खुद
00:14क्या थे?
00:14तो मोटे तोर पर दो क्लासेज, दो क्लासेज होती है, एक वो होती है जिसके पास माल होता है, कौन
00:25सा माल जिससे और माल तयार हो सकता है, जैसे पैसा, जैसे फैक्ट्री, जैसे जंगल, आजिसन, साधन, उस पूरी क्लास
00:34को बोलेंगे बुर्जुवाजी, बुर्जुवाजी
00:42यह वो लोग जो उसकी factory में जा करके काम करते है यह वो लोग जो उसको जा करके अपना
00:47श्रम बेचते हैं
00:48और Marx की पूरी थेवरी यह है कि इतिहास की पूरी कहानी उन्म दोनों के वर्ग संगर्श पे लिखी गई
00:58यह
00:58मार्क्स नहीं कहा है कि जो जिस वर्ग में पैदा हो गया तो बस हो गया ठीक है यह दो
01:03वर्ग हो गया एक मजदूर का वर्ग एक सेट का वर्ग और यह कह रहे है कि सेट के वर्ग
01:06में जो पैदा होगा वो सेट जैसा ही सोचेगा और मजदूरों से उस्चत्रता रखेगा माने क
01:21कि कॉंशियसनेस इस क्लास रिटर्मेंट अब यहां पे तुम्हारा सवाल बड़ा नजार हो जाता है कि मार्क्स हुद कौन है
01:42के गुजारे के लिए पैसे किसे मिलते थे एंगल्स से और एंगल्स की खुद मैंचेस्टर में फैक्टरी थी तो मार्क्स
01:50हर द्रिष्टी से खुद बुर्जुआ हैं लेकिन मार्क्स ने जो बात करी वो तो प्रोलेटेरियेट के भले की करी तो
01:57मार्क्स खुद इस बात का उ�
02:12मुसार ही बेवहार करें, बिल्कुल आवशक नहीं करें, तुम्हारी मियत का खिया में
Comments