00:00सर मतलब जो आजकल के बच्चे है ना तो उनके अंदर बहुत विरोध भाव भरावा है
00:04स्कूल के प्रती, स्टडी के प्रती, तीचर्स या फिर घर में जो भी है
00:09तो फिर उनको सही दिशा में लाने का प्रभावकारी तरीका क्या है?
00:14नहीं स्कूल, तो इसलिए होता है कि बच्चा जैसा भी है, वहाँ वो कुछ सीख पाए
00:21बच्चा तो जैसा है वैसा है
00:25बच्चे को सिखाने की सिम्मेदारी स्कूल की है
00:29बच्चे की लर्निंग के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की सिम्मेदारी स्कूल की है
00:34हम बच्चे को दोश नहीं सकते, तो मैंसे क्यों हो, बच्चे को क्या दोश दोगे, बच्चे ने तो जनम भी
00:40सुछा से नहीं लिया है, ना उसके संसकार सुछा से हैं, तो उसको क्या दोश दे रहे, उसके साथ तो
00:47जो कुछ हो रहा है, वो कोई और कर रहा है, जब बच्चे क
01:03करता है उसने सीखा को कहीं से सुधार ने की सिभमेदारी स्कूल की है ना तो इस स्कूल को अपने
01:10किरेवान में जहातना होगा कि वो बच्चे को आगर्शित क्यों नहीं कर पा रहा है वो बच्चे को सिखा क्यों
01:16नहीं पा रहा है और बच्चा स्कूल का विरोध कर रहा है तो
01:19तो बदलने की जिम्मेदारी बच्चे की बाद में है, स्कूल की पहले है, क्योंकि स्कूल ने जिम्मेदारी उठाई है ना
01:26बच्चे को सिखाने की, ठीक है, तो स्कूलों को देखना पड़ेगा कि हमारी अप्रोच क्या है, हम किस दृष्टी से
01:33बच्चों को देख रहे हैं, ह
01:38कर दो कर दो
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