Skip to playerSkip to main content
🧔🏻‍♂️ आचार्य प्रशांत से समझे गीता और वेदांत का गहरा अर्थ, लाइव ऑनलाइन सत्रों से जुड़ें:
https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita-course?cmId=m00021

📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं?
फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021
➖➖➖➖➖➖
पूरा वीडियो यूट्यूब पर : पूरी पृथ्वी जल रही है! || आचार्य प्रशांत (2024)
➖➖➖➖➖➖
#acharyaprashant #ClimateCrisis #GlobalWarming #ThinkDeeper #PandemicRisk #EnvironmentalTruth #WakeUpCall #Sustainability #HumanImpact #FutureWarning #आचार्यप्रशांत

Category

📚
Learning
Transcript
00:00कितनी नई तरीके की बिमारी आएंगी कभी सोचा है
00:07कोविड जैसी हजारों बिमारियां उशल करके आने वाली हैं
00:10क्योंकि वो सब वाइरस बर्फ के नीचे
00:13हजारों लाखों करोडों साल से दबे पड़े हैं
00:16डॉर्मेंट हैं
00:17जब वो बर्फ पिखलेगी तो वो सारे वाइरस बहार आजाने हैं
00:20एक कोरोना वाइरस ने पूरी दुनिया हिला दी
00:23ऐसे लाखों वाइरस हैं जो बहार आने को तयार बैठे हुए हैं
00:27लेकिन आम आदनी को कोई फरक नहीं कोड़ पर पहा है
00:28किसी में दम नहीं है कि खुल के बोल सके कि इस पूरी चीज का सबसे बड़ा कारण है जनसंख्या
00:34एक मात्र कारण आप कह सकते हो जनसंख्या है
00:36क्योंकि वाइरस जो है वो स्ट्रिक्टली एक एक लिविंग और्गेनिजम नहीं होता है
00:42वो 50-50 जैसा होता है वो केमिकल मान सकते हो उसको आधा
00:45तो वो कोई भी लिविंग चीज जो होती है उसकी एक उम्र होती है
00:49उस उम्र के बाद वो मर जाती है
00:50वाइरस स्टोर हो सकता है एक केमिकल की तरह है
00:54करोडों सालों तक स्टोर्ड रह सकता है
00:56वो स्टोर्ड हैं ग्लेशियर्स के नीचे और बहुत और जगहों पर बर्फ पिखलेगी हो सब वहां से निकल निकल के
01:02आएंगे वो स्टोर्ड पड़े हुए हैं वहां पर और वहां कभी बर्फ पिखली नहीं थी तो कभी बाहर आए नहीं
01:07थी तो चुपचा वहां पड़े ह�
01:10एक वाइरस ने पूरी दुनिया हिला दी दो साल तर
01:13आयसे कितने निकलने हैं और हमारी कर्टूतों से फिर कर ले न भोग विलास
01:17खुशी मना रहे हैं हम तो कंजम्शन के लिए ही पैदा हुए है
01:21आप पहले ही एक बहुत खतरनाक हालत में थे
01:23आपकी हालत और खतरनाक हो रही है
01:26और इसको जो वैज्यानिक हैं, क्लाइमेट साइंटेस्ट्स हैं
01:30वो कहने हैं, we are accelerating towards our doom
01:34we are not just moving towards our destruction
01:36we are accelerating towards our destruction
Comments

Recommended