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क्या आप जानते हैं कि ईरान और इज़राइल कभी गुप्त साझेदार थे?
तेल, जासूसी और क्रांति — 30 साल की वो कहानी जिसने Middle East की राजनीति बदल दी।

1948 में जब इज़राइल बना, चारों तरफ़ दुश्मन थे — मिस्र, सीरिया, इराक़, जॉर्डन। ऐसे में David Ben-Gurion ने एक रणनीति बनाई — अरब देशों के बाहर साझेदार ढूंढो।
और सबसे अहम साझेदार बना शाह का ईरान।

Associated Press के मुताबिक़ — उन सालों में इज़राइल का लगभग 80% तेल ईरान से आता था।
1968 में इलात-अश्केलोन पाइपलाइन बनी — एक ऐसा रास्ता जिसने अरब देशों को पूरी तरह बायपास कर दिया।

CIA दस्तावेज़ों के अनुसार, इज़राइली अफ़सरों ने ईरान की खुफिया एजेंसी SAVAK बनाने में मदद की — जो आगे चलकर दहशत का नाम बन गई।

लेकिन इस कहानी का अंत अचानक और विस्फोटक था।

नजफ़ में एक आदमी टेप रिकॉर्ड कर रहा था — Ruhollah Khomeini।
उसके संदेश ने शाह की नींव हिला दी।

दिसंबर 1977 — Jimmy Carter ने ईरान को “stability का island” कहा।
एक साल बाद — सड़कों पर क्रांति थी।

जनवरी 1979 — शाह देश छोड़कर चला गया।
फ़रवरी 1979 — ख़ुमैनी वापस आया।
और कुछ ही दिनों में — इज़राइल का दूतावास, Yasser Arafat को सौंप दिया गया।

30 साल की साझेदारी — कुछ ही दिनों में खत्म।

TIMESTAMPS

00:00 — HOOK | प्रोफ़ेसर मेहता का सवाल
00:24 — BUILD | बेन-गुरियन का ठंडा हिसाब
01:12 — BUILD | कैसेट टेप और एक गुस्सैल आदमी
01:52 — PEAK | कार्टर का गिलास और काला शुक्रवार
02:32 — RESOLVE | चाबियाँ और एक उतरता झंडा

SOURCES & REFERENCES

• Associated Press Archive
• Reuters Archive
• Israeli Government Press Office
• U.S. State Department Declassified Cables
• CIA CREST Database
• Jimmy Carter Presidential Library

THE IRAN FILES — FULL SERIES

E01 — ईरान-इज़राइल: 30 साल की गुप्त साझेदारी [यह वीडियो]
E02 — 1979 की क्रांति जिसने दुनिया बदल दी [Coming Soon]
E03 — सुलेमानी: वो आदमी जिसे अमेरिका ने मारा
E04 — ईरान का परमाणु कार्यक्रम: पूरी टाइमलाइन
E05 — मोसाद की छाया में: 15 साल की गुप्त जंग
E06 — 7 अक्टूबर से हिज़बुल्लाह के पतन तक
E07 — ख़ामेनेई की मौत: कौन था वो आदमी?
E08 — ईरान का भविष्य: तीन रास्ते

#IranFiles #IranIsrael #MiddleEastHistory #Geopolitics #1979Revolution #HistoryHindi #HindiDocumentary #WorldHistory #GeopoliticsHindi

~HT.178~ED.104~GR.506~

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Transcript
00:02राजनीती में दोस्ती नहीं होती, सिर्ष हिसाब होता है, पर कभी कभी हिसाब बहुत गहरा होता है
00:10वो हिसाब इरान और इसराइल का था
00:1330 साल तक रणनीतिक साजेदार दे, दोस्त नहीं, साजेदार, डर से जुड़े हुए
00:19वो डर शुरू हुआ 1948 में, इसराइल अभी अभी बना था, और चारो तरफ बस दुश्मन, मिस्र, सीरिया, इराक, जॉर्डन
00:30उस घिरे को देखकर बेंगुरियन ने एक ठंडा हिसाब लगाया
00:34अरब देशों के पडोसी साजेदार बन सकते हैं, और वो साजेदार मिला भी
00:39तेहरान, 1950 का दशक, शाह का इरान, आधुनिक, पश्चिमी, और बिलकुल उतना ही डरा हुआ अरब राश्ट्रवात से
00:48इसलिए चुप चाप दो देश मिले, इस्राइली अफसर, इरानी अफसर, एक मेज पर, बिना किसी ज़स्बे के
00:56उस मेज पर पहला सौदा था तेल का, असोसियेटेट प्रेस के मताबिक, इस्राइल का 80 प्रतिशत तेल इरान से आता
01:04था, 80 प्रतिशत, और वो तेल पहुचता था एक पाइपलाइन से, 1968, इलाद से अशकेलों तक, अरब रास्तों को काटते
01:13हुए, सिर्फ पाइपलाइन न
01:17अताबिक, इस्राइली अफसरों ने सवाइक बनाने में मदद की, सवाइक, एक नाम जो इरान में दहशत बन गया, उस दहशत
01:26को एक आदमी ने नाम दिया, लेकिन वो आदमी था दूर, निर्वासन में, और बहुत बहुत उस्सेल, वो निर्वासन था
01:35नजफ में, इराक, 1964
01:3864 से, रूहुला खुमैनी कैसे टेप रिकॉर्ड करते, हर रोज, वो टेप कॉपी होते, हाद से हाद जाते, मस्जिद से
01:46बाजार तक, सेंसर्शिप से तेज, उन टेप पर संदेश साब, इरान की आत्मा अमेरिका और इस्राइल को बेच दी गई,
01:58और वो इरानी, शाह के वि
02:04कुछ बदल रहा था, लेकिन उनहीं दिनों, दिसंबर 1977, जिमी कार्टर प्रेजिदेंशल लाइबरी के मताबिक, कार्टर ने तहरान में गिलास
02:13उठाए, इरान स्थिरता का द्वीप, वो द्वीप एक साल बाद जल रहा था, काला शुक्रवार, फौज ने भीर पर गोलिय
02:24चलाई, और उसके बाद, 16 जनवरी 1989, असोसियेटिट प्रेस के मताबिक, शाह ने तहरान छोड़, छुट्टी के बहाने, और जो
02:34आया, एक फरवरी, खुमैनी का जहाज उतरा, लाखों लोग सरकों पर, पत्रकार ने पूछा, कैसा लग रहा है, उन्होंने कहा,
02:43कुछ नही
02:44उसकुछ नहीं के 18 दिन बाद, वो लमहा आया, जिसने सब बदल दिया, वो लमहा था 18 फरवरी का, रॉय्टोस
02:54के मताबिक, यासर अरफाद तहरान पहुँचे, उन्हें चाबिया दी गई इसराईली दोतावास की, उन चाबियों के साथ इसराईल का जंडा
03:03उतरा, दूसरा
03:04चुरहा, 30 साल का हिसाब एक दोपहर में खत्म, लेकिन वो खत्म किसी दोस्ती की मौत नहीं थी, एक ठंडे
03:11हिसाब का अंत था, और एक नई बहुत खतरनाक जंग का जन्म
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