Skip to playerSkip to main content
  • 5 days ago
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — यही हैं पंच तत्व, जिनसे शरीर, प्रकृति और सृष्टि का निर्माण माना गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन्हीं पंच तत्वों का संबंध आत्मज्ञान, साधना और मोक्ष के मार्ग से भी जोड़ा गया है?

इस वीडियो में जानिए पंच तत्व का आध्यात्मिक रहस्य, शरीर और ब्रह्मांड से उनका संबंध, और कैसे भारतीय दर्शन में इन्हें मुक्ति के द्वार की तरह समझा गया है।

Indian Bhakti Dhara को फॉलो/सब्सक्राइब करें और भक्ति, आध्यात्मिक ज्ञान और सनातन संस्कृति से जुड़े रहें।

Tags:
पंच तत्व, Panch Tatva, पंच महाभूत, Panch Mahabhuta, मोक्ष, Moksha, सनातन धर्म, Sanatan Dharma, Indian Bhakti Dhara, Spiritual Wisdom, Hindu Philosophy, भारतीय दर्शन, आत्मज्ञान, साधना, अध्यात्म, पांच तत्व, पृथ्वी जल अग्नि वायु आकाश, Hindu Spirituality

Category

📚
Learning
Transcript
00:03
00:04
00:10
00:20ुपूरा का पूरा ब्रमांड बना है वही तत्व हमें जन्म और मृत्यू के इस चक्र से बाहर निकलने का रास्ता
00:28भी दिखाते हों?
00:29है न एक गहरा सवाल? और बस यही सवाल हमें खीच कर ले जाता है पंच भूत स्थलों की ओर.
00:35तो सवाल उठता है कि आखिर ये पंच भूत स्थल हैं क्या? दरसल ये दक्षिन भारत के पांच बेहद पवित्र
00:42शिव मंदिर हैं और इनकी खासियत ये है कि हर एक मंदिर स्रिष
00:47के एक मूल तत्व को समर्पित है. पृत्वी, जल, अगनी, वायू और आकाश. इन जगहों पर भगवान शिव की पूजा
00:55इन ही पांच तत्वों के रूप में होती है. तो अब हम इन पांच मंदरों और पांच तत्वों की दुनिया
01:01में उतरने जा रहे हैं. और ये समझना
01:03बहुत जरूरी है कि ये सिर्फ पत्थर और गारे से बनी इमारते नहीं है. नहीं, ये तो ब्रहमांडिये शक्तियों के
01:10आप कह सकते हैं जीते जाकते केंदर हैं, जहां ईश्वर और प्रकृती एक दूसरे में मिल जाते हैं. चलिए, इनकी
01:17गहराई को समझते हैं. दिखिए
01:19इन मंदिरों का जो दार्शनिक महत्व है, वो बहुत गहरा है. ये असल में प्रकृती और परमात्मा के बीच के
01:26उस परफेक्ट बैलन्स, उस आदश संतुलन को दिखाते हैं. और जो भक्त यहां आते हैं, उनके लिए इस यात्रा का
01:33सबसे बड़ा मकसद होता है मोक्षपा
01:48और कैसे हर एक जगा अपने अपने तत्व की उर्जा से मानो धड़कती हैं. तो ये है हमारी इस आध्यात्मिक
01:55यात्रा का पूरा नक्षा. देखिए, प्रिथ्वी तत्व के लिए हम जाएंगे कांची पूरम के एकंबर एश्वर मंदिर. जल तत्व को
02:02महसूस करने के लि�
02:16देखने को मिलता है चिदंबरम के नटराज मंदिर में. तो हमारी आत्रा शुरू होती है प्रिथ्वी और जल के मंदिरों
02:24से. सबसे पहले बात करते हैं कांची पूरम के एकंबर एश्वर मंदिर की. यहां के खासियत है रेच से बना
02:31एक लिंगम, जिसे कहते हैं कि खुद �
02:35पुराने आम के पेड़ के नीचे बनाया था. यह स्थिर्ता और भक्ती का प्रतीक है. और फिर है तिरुवने कवल
02:41का जम्बू केश्वर मंदिर. यहां लिंगम पर लगातार एक जमीन के नीचे से निकले जरने का पानी गिरता रहता है,
02:48जो ग्यान के कभी न रुकने वाले
02:50प्रवाह को दिखाता है. इस प्रिथवी मंदिर के पीछे की जो कहानी है, वो भक्ती की ताकत को बहुत खुबसूर्ती
02:57से दिखाती है. कहते हैं कि जब देवी पारवती तपस्या कर रही थी, तो नदी में बाढ़ा गई. उन्होंने रेच
03:04से बने उस लिंगम को बचाने के
03:06लिए उसे अपनी बाहों में कसकर पकड़ लिया. उनकी ऐसी अटूट श्रद्धा और लगन देखकर शिव प्रसन्न हुए और उन्हें
03:14स्थिर्ता का आशिरवात दिया. अब आगे बढ़ते हैं अगनी और वायू के मंदिरों की तरफ. अरुनाचल एश्वर मंदिर में शि
03:35जहां मंदिर के अंदर हवा का कोई जोका नहीं आता. फिर भी एक दीपक की लौव लगातार हिलती रहती है.
03:41यह अद्रिश्य वायू तत्व की मौजूदगी का साक्षात प्रमाण है. और अब हम पहुँचते हैं अपनी यात्रा के अंतिम और
03:48शायद सबसे रहस्यमई पड
03:50पर चिदंबरम आकाश मंदिर. यहीं चिदंबरम रहस्य का अनुभव होता है. यहां किसी मूर्ती की पूझा नहीं होती, बलकि पूझा
03:59होती है निराकार, खाली आकाश की, शुन्य की. यह इस परम सच को दिखाता है कि हर चीज की उत्पत्ती
04:07इसी शुन्य से होती है. और �
04:25ुश्वर तक पहुशने का कोई एक ही रास्ता नहीं है और ये मंदिर यही सिखाते हैं एक तरफ वायू मंदिर
04:32की कहानी है जहां एक मकडी, एक साप और एक हाथी जो एक दूसरे के दुश्मन है वो अपनी दुश्मनी
04:38भुला कर साथ में शिफ्की पूजा करते हैं और मोक्�
04:45अकेले तपस्या करके अपनी अटूड भक्ती साबित करती हैं मतलब साथ मिलकर की गई भक्ती हो या अकेले की गई
04:52तपस्या दोनों ही रास्ते उतने ही शक्तिशाली हैं इस अगनी मंदिर की नीव में एक बहुत ही प्रसिद्ध पौरानिक कथा
04:59है हुआ यूं कि एक बार ब
05:15ढूंड कर दिखाए दोनोंने बहुत कोशिश की पर नाकाम रहे तब उन्हें समझ आया कि शिव की शक्ती अनंत है
05:22और अरुनाचर पहाडी उसी अनंत अगनिस्तंब का प्रतीक मानी जाती है और सबसे दिल्चस्प बात ये है कि ये जो
05:29पाँचो ब्रहांडिय तत्व हैं य
05:43शरीर की गर्मी में वायू हमारी सासों में है और आकाश हमारी चेतना, हमारी अवैर्निस में इसी ग्यान को समझ
05:51करी तो शरीर और ब्रहांड के बीच एक तालमिल बिठाया जा सकता है तो सवाल ये है कि आज की
05:57इस भाग दोड़ भरी दुनिया में इस प्राचीन ग्यान का क
06:00Let's see how these 1000 years ago are so many things and how can they get out of their lives?
06:09We can explain how many things are in our lives.
06:151. Prithvi
06:172. Jalqqq
06:213. Ajnqq
06:244. Vayu
06:265. Ajnq
06:305. Ajnq Fari
06:55
07:37
07:45This is the small universe and the outer space of Brahman.
07:48It is not a different one, but it is one of the same.
07:53So, the way the Brahman is the whole five of the Tattwes,
07:56the same way we have these five Tattwes.
08:02So, the question is,
08:04is that the Tattwes in Tattwes in Tattwes?
08:08This is a question,
08:09which is the question we have all in our own.
08:15This is a question.
08:15Let's focus on the Tattwes in Tattwes in Tattwes so truly it is
08:15if it is interesting,
08:15it is kind of big and natural caminho.
08:15It is in the center of the Tattwes in Tattwes in arrival and
Comments

Recommended