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  • 2 months ago
आम आदमी पार्टी में लगातार बड़े नेताओं के जाने से पार्टी की आंतरिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं. हाल में राघव चड्ढा के बाहर जाने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है. इससे पहले योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, कुमार विश्वास और आशुतोष जैसे कई बड़े नाम पार्टी से अलग हो चुके हैं. विश्लेषण में चार मुख्य कारण सामने आते हैं-आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल, असहमति पर कड़ा रुख, नेतृत्व और संगठन के बीच दूरी, और बदलते राजनीतिक समीकरण। हालांकि राजनीति में मतभेद सामान्य हैं, लेकिन एक जैसे आरोप बार-बार सामने आना पार्टी के लिए चुनौती बन गया है. अब AAP के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने भीतर के विश्वास को बनाए रखना है.

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Transcript
00:04एक पार्टी जो बनी थी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से, क्यों आज उसी पार्टी से उसके अपने ही बड़े चहरे
00:11लगतार दूर होते जा रहे हैं।
00:13आम आदमी पार्टी में ऐसा क्या बदल गया जो उसके अपने ही नेताओं को रास नहीं आ रहा।
00:2224 अपरेल 2026 आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा जट का रहा।
00:28राघव चड़ा समेत कई सांसदों ने पार्टी छोड़ कर बीजेपी जोईन कर ली।
00:32इसे अप तकी सबसे बड़ी तूट बताया जा रहा है।
00:36इस घटना क्रम ने पार्टी की आंतरिक स्थिती पर नए सवाल खड़ी कर दिये हैं।
00:41लेकिन ये कहानी आज की नहीं।
00:42साल 2012 में अन्ना हजारे की आंदोलन से आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ।
00:47जन लोकपाल, पारदर्शिता और आंतरिक लोकतंत्र इसके मूल से धान थे।
00:52देश भर की प्रोफेशनल्स, एक्टिविस्ट और सामाजिक कारिकरता इससे जुड़े।
00:57लेकिन 2015 की बाद से तस्वीर बदलनी शिरू हुई।
01:052015 में पार्टी के संस्थापक सदस्य, प्रशांत भूशन और योगेंद्र यादव ने सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाया कि पार्टी में
01:14नर्ने लेने की प्रक्रिया केंद्री करत हो गई है।
01:18स्वराज की जगहा हाई कमांड कल्चर आ गया है। विवाद बढ़ा और दोनों को पार्टी से बाहर कर दिया गया।
01:25यही से पहला बड़ा पैटन सामने आया। क्या आम आदमी पार्टी में असहमती की गुझाईश सीमित होती जा रही है।
01:32इसके बाद कई मामलों में एक जैसा ट्रेंड दिखा। कपिल मिश्रा ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए नतीजा निश्कासन।
01:40विनोत कुमार बिननी बागी हुए तो उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
01:44मतलब असहमती सामने आई तो टकराफ बढ़ा और अंत में अलगाफ हुआ।
01:49लेकिन ये सिर्फ टकराफ की कहानी नहीं।
01:52कुछ नेता बिना बड़े विवाद के भी पार्टी से दूर होते चले गए।
01:55कुमार विश्वास धीरे धीरे पार्टी से किनारे हो गए।
01:59आशितोष नीजी कारणों का हवाला दे कर अलग हुए।
02:02शाजिया इल्मी, संगठन के कामकाच पर सवाल उठा कर बीजेबी में शामिल हो गए।
02:07हाल के सालों में विवाद और तेस हुए।
02:10स्वाती माल विए प्रकरण, सीयमावास से जुड़े आरोप, बड़ा राजनीतिक मुद्दा बने।
02:15इसके साथ ही नेत्रित्व और रणनीती को लेकर भी अंद्रूनी मदभेद सामने आये।
02:20इसने पार्टी की इमेज और आंत्रिक विश्वास दोनों पर असर डाला और अब सबसे बड़ा और ताजा नाम राखाफ चड़ा।
02:32राखाफ चड़ा पार्टी के प्रमुख युवा चेहरों में से एक थे।
02:36केज रिवाल के करीबी माने जाते थे। लेकिन नित्रत्व संगठन के दोरान उनकी चुपी चर्चा में रही।
02:42बाद में उन्हें राजसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर पत से हटा दिया गया।
02:47इसके बाद चड़ा ने कहा कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूँ और इसके साथ ही उन्होंने पार्टी छोड़
02:53दी।
02:54ये सिर्फ स्टीफा नहीं बलकि पार्टी की दिशा पर बड़ा सवाल बन गया।
03:02अब अगर इन सभी घटनाओं को जोड़ कर देखें तो तस्वीर सिर्फ नेता छोड़ रहे हैं तक सीमित नहीं रहती।
03:09बलकि एक गहरी संरचनात्मक समस्या की और इशारा करती है।
03:19चार बड़े कारण साफ दिखाई देते हैं।
03:22पहला आंतरिक लोकतंत्र पर लगतार सवाल, दूसरा असहमती पर कड़ा रोख और निशकासन, तीसरा नेतरत्व और संगठन के बीच बढ़ती
03:32दूरी, चौथा और आखरी बदलता राजनीतिक समीकरण और अफसरवाद।
03:38हाला कि ये भी सच है कि राजनीती में दल बदल और मतभेद आम है और हर पार्टी समय के
03:45साथ बदलती भी है।
03:46लेकिन जब एक ही तरह के आरोप बार-बार अलग-अलग नेताओं से सामने आये, तो ये सिर्फ सहीयोग नहीं
03:53रह जाता।
03:54आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती अब बाहर नहीं बलकि भीतर है।
03:59अगर पार्टी स्वराज और पारदर्शिता के वादे पर बनी थी, तो आज असली परिक्षा यही है कि क्या वो अपने
04:07ही सिध्धानतों को फिर से मजबूत कर पाएगी, या फिर ये तूट आगे भी जारी रहे की।
04:13क्योंकि राजनीती में सबसे बड़ा संकट चुनाव हारना नहीं, बलकि अपने ही लोगों का भरोसा खो देना होता है।
04:20फिलहाल इस वीडियो में इतना ही, बने रहिए ETV भारत के साथ।
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