00:00Assalamualaikum,
00:01कभी सोचा है कि सयारों की चाल
00:03हमारी जहनी सेहत पर भी असर अंदाज हो सकती है?
00:07आज हम एक ऐसे ही दिल्चस्प मांखस का जैजा लेने वाले हैं,
00:11जो इल्म-े-नुजूम की रोशनी में बताता है
00:13कि अपनी जहनी तवनाई को कैसे बढ़ाया जाए?
00:17दिमाग कम्प्यूटर से भी तेज,
00:19वा, ये तो बहुत बड़ा दावा है, है ना?
00:22चले देखते हैं कि इस मांखस में इस वादे को पूरा करने के लिए आखर क्या राज बताया गया है?
00:28अच्छा, कभी ऐसा होता है कि कोई चीज़ कहीं रखकर भूल गए
00:31या दिन के बीच में ही दिमागी तोर पर बहुत ठकावा महसूस कर रहे हों,
00:35ये एक ऐसा एहसास है जिससे हम में से अक्सर लोग गुजरते हैं.
00:40ये मांखस कहता है कि इसका तालुक सितारों से है और इसका हल भी वही मौजूद है.
00:44तो इस सब के पीछे आखिर कौन सा सयारा है?
00:49जी हाँ, अतारिद.
00:50इल्म नजूम में अतारिद को जहानत, बातचीत और यादाश्ट का हाकिम मना जाता है.
00:57और कहा जाता है कि इसकी तवानाई हमारी सोचने समझने की सलाहियत पर सीधा असर डालती है.
01:03इस माखज में 22 अपरेल को एक बहुत खास दिन बताया गया है.
01:08कहा जाता है कि इस दिन काइनात में एक ऐसी तवानाई होती है जो हमारे दिमागी खुलियों को रीचार्च करने
01:15का एक नायाब मौका देती है.
01:17लेकिन इस मौके से फाइदा उठाने से पहले ये समझना भी जरूरी है कि आज के दिन कुछ चालेंजिस क्या
01:24हो सकते हैं जिन से ये माखज हमें खबरदार करता है.
01:27तो देखें इस मवाद में आज के दिन के लिए कुछ चालेंजिस भी बताये गए हैं.
01:32पहला है ओवर्थिंकिंग यानि जरूरत से जादा सोचना जो हमारी सारी जहनी तवानाई निचोड लेता है.
01:38और हाँ, खास तोर पर अगर किसी का बुर्ज जोजा यानि जेमिनाए या सुंबला यानि वर्गो है, तो उनके लिए
01:45आज तवज्जु मर्कूस करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.
01:48इसलिए फजूल बहस से बचने का मशवरा दिया गया है.
01:51ठीक है, चालेंजिस तो समझा आ गए. अब चलते हैं इस बुन्यादी हल की तरफ जो इस मवाद में पेश
01:57किया गया है.
01:57तो हल क्या है? तरीका बहुत ही सादा है. इस माख़स में बताया गया है कि सुबह के वक्त साथ
02:04भीगिवे बादाम एक सब्स इलाइची के साथ खाएं. बस ये एक ऐसा नुस्खा है जिसे कोई भी बहुत असानी से
02:10अपना सकता है.
02:11अब आते हैं सबसे दिल्चस्प हिस्से पर इस छोटे से आमल के फाइदे क्या है? ये सिर्फ यादाश्ट को ही
02:18तेज नहीं करता बलके दावा ये है कि ये गुफटगू में मिठास और एतमाद भी पैदा करता है. यानि बहतर
02:25दिमाग के साथ साथ बहतर बोल चाल भी.
02:28बादाम वाले नुसहे के अलावा ये माखिस दो मजीद आदतें भी तजवीज करता है जो इसके असरात को और बढ़ा
02:35सकती हैं. आईए देखते हैं कि वो क्या है? पहला मावन इलाज है लिखना. जी लिखना. कहा जाता है कि
02:43जब हम कुछ लिखते हैं तो हमारा दिमाग प�
02:57और दूसरा मौावन इलाज तो बहुत ही आसान और खुबसूरत है. कुछ वक्त हर्याली को देखना. इसे आखों और दिमाग
03:06के लिए एक ऐसा कुदरती सुकून करार दिया गया है जो महंगी दवाईया भी नहीं दे सकती. तो अब हम
03:12इस तजजिये की बिल्गुल आखिर म
03:13पहुँच गये हैं जहां हम इस माखिस के मरकजी पैगाम का खुलासा करेंगे. तो इस सारी गुफ्तगू का निचोड क्या
03:21है? बस ये एक वात कि एक ताकतवर दिमाग ही काम्याबी की बुनियाद है. ये माखिस हमें याद दिलाता है
03:28कि हमारी जहनी सेहत हमारी जिन्दगी
03:30के हर पहलू पर असर डालती है. और आखिर में एक सवाल हम सब के लिए है. वो कौनसी छोटी
03:37छोटी रोजमर्रा की आदात हैं जो हमारे जहनों को बना रही हैं? चाहे कोई इल्म नुजूम पर यकीन रखता हो
03:44या नहीं, ये एक ऐसा एहम सवाल है जिस पर हम सब को जरूर स
03:48सोचना चाहिए.
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