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  • 3 weeks ago
मां सीता के श्राप के सामने 334 करोड़ का डैम पिंडदानियों के काम नहीं आ रहे. गयाजी से रत्नेश कुमार की ग्राउंड रिपोर्ट.

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00:28
00:30करोणों की लागत से बना गयाजी रबर डैम आज सफेद हाथी साबित हो रहा है।
00:35तक्नीक और आस्था की इस जंग में मासीता का पौरानिक श्राप जीतता नजर आ रहा है।
00:52फल्गों का सूखा होना महज मौसम का असर नहीं बलकि इसके पीछे सदियों पुरानी मान्यता है।
00:59कहा जाता है कि वनवास के दोरान माता सीता ने फल्गों नदी को अंतह सलीला होने का श्राप दिया था।
01:06तब से ये नदी उपर से सूखी लेकिन जमीन के भीतर बहती है।
01:11पहले श्रद्धालों रेत खोद कर पानी निकाल लेते थे। लेकिन अब नदी के सीने पर गाद और मिट्टी की ऐसी
01:19परत जमी है कि रेत खोदने पर भी पानी नसीब नहीं होता।
01:34इसी श्राप के प्रभाव को खत्म करने और श्रद्धालों को साल भर पानी देने के लिए साल 2022 में ततकालीन
01:42मुख्यमंत्रे नितीश कुमार ने
01:44334 करोड की लागत से देश के सबसे बड़े रबर डैम का उदगाटन किया था। मकसद था साफ जल और
01:53सुगम पिंडदान।
01:54लेकिन आज हकिकत कुछ और है। डैम का पानी आचमन के लायक तो दूर बीमारियों को दावत देने वाला बन
02:02चुका है। गंदे पानी और बदबु के कारण प्रशासन को पानी छोड़ना पड़ा और अब डैम का तल पूरी तरह
02:10सूख चुका है।
02:12अभी तो एक गम सुखा हुआ है। असम और त्रपुरा जैसे राज्यों से हजारों किलो मीटर दूर चल कर आयती
02:27धियात्री यहां कर ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
02:30कोई पाने खरीद कर कर्मकांड कर रहा है तो कोई चापा कल के हथे चला कर ठखार चुका है।
02:37त्रपुरा से आये अपूर्वा सरकार हूं या असम के सारनाजी साह। सबकी एक ही कहानी है।
02:44यहां पानी नहीं सिर्फ गंदगी है।
02:47पंड़ा समाज भी चंतित है क्योंकि जमा हुआ गंदा पानी श्रधालूं को चर्म रोग दी रहा है।
03:03प्रशासन अब मानसून की रह देख रहा है ताकि डैम की सफाई हो सके।
03:07लेकिन सवाल वही है क्या 334 करोड खर्च करने के बाद भी श्रधालूं मानसून के भरोसे ही रहेंगे।
03:15क्या तकनीक और इंजीनियरिंग मासीता के श्राप और प्रशासनिक सुस्ती के आगे घुटने टेख चुकी है।
03:24गयाजी से रतनेश कुमार की रिपोर्ट
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