00:00जो सवाल है कि हम विश्वगुरु इसको मैं आजकर मानता हूँ, यह शब्द हमें नहीं बोलना चाहिए, हम विश्वगुरु आजकर
00:06नहीं है, विश्वगुरु होना चाहिए, विश्वगुरु कभी थे, अगर आज हम है ऐसा नहीं है
00:13भारतिय जनता पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं और संस्थाफक सबस्तियों में शुमार
00:18मुल्ली मनुहर जोशी का हालिया बयान राजनेते कलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है
00:23संस्कत भारिती के कार्याले के उद्खाटन के अफसर पर उन्होंने जो बाते कहीं वे सीधे तोर पर पार्टी की मौजूदा
00:31लाइन और प्रिधान मंत्री नरेंद्र मूदी द्वारा बार बार दिये जा रहे विश्वगूरू वाले बयानों से साफ अलग नजर आती
00:38है
00:38एक तरफ जहां मूदी सरकार और पार्टी के अन्यनेता वैश्विक पटल पर भारत का डंका बचने और दीश के विश्वगूरू
00:45बनने का दावा करते ठकते नहीं हैं वहीं डॉक्टर जोशी ने इस दावे पर एक बड़ा प्रश्न चन्ह लगा दिया
00:53सुनिये विश्वगूरू के सवाल पर क्या कुछ बता रही है मुड्ली मनुहर जूशी
01:31विश्वगूरू के सवाल पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए मुड्ली मनुहर जोशी ने बेबाकी से कहा कि मेरा मानना है
01:37कि हम विश्वगूरू शब्द से बचें वर्दमान संदर्भ में हमें ये शब्द इस्तिमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि आज की वस्तविक्त
01:44विश्वगूरू नहीं है उन्होंने सपष्ट किया कि भारत अतीत में निश्वत रूप से विश्वगूरू की भूमी का मिथा और भविश्य
01:52में हमें इस पद को हासल करने का प्यास अवश्य करना चाहिए लेकिन वर्दमान परिस्तितियों में ये कहना कि हम
01:59विश्वग�
02:00पूरी तरह सही नहीं होगा भाजपक इतने कदवर और वैचारिक नीता द्वारा अपनी ही सरकार के नेरेटिव के विप्रीत ऐसी
02:08टपणी करना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जोशी का मानना है किस लक्षय तक पहुंचने का मार्ग संस्कृत भाशा
02:15के पुनरु�
02:41पूर्व मंत्री ने पीड़ा व्यक्त की उनके सुझाव के बावजूद रहच्यों ने संस्कृत को अनिवारे विश्य के रूपूर्ण माना जाए
02:52जिक्षा नीती पर तन्जिकस्ते हुए पूर्व मंत्री ने पीड़ा व्यक्त की
02:56उनके सुझाव की बावजूद रहच्यों ने संस्कृत को अनिवारे विश्य के रूप में सुझार नहीं किया
03:01यहां तक कि उत्राखंट जैसे राज्यों में इसे राज के भाशा का दर्जातों मिला लेकिन धरातल पर इसके संद्रक्षण के
03:08लिए कोई ठूस काम नहीं हुआ
03:10उन्होंने वर्तमान समय में अंग्रेजी के प्रती बढ़ते मुह और व्यापारिक तुरिष्टी कूण को एक विडम बना बताया
03:16जोशी गल्स पष्ट मानना है कि भारत का वास्विक उधार और विश्व में उसका यूगदान तभी संभव है जब हम
03:23अपनी इस जड़ों को संस्कृत के ज्यान को वहवारिक जीवन में उतारें
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