00:02लकडी के करगों पर कसे हुए धागे, सधे हाथों की कुशल रफ्तार और लेबद आवाज के साथ आकार पकरती खूपसूरत
00:14साड़ी
00:18मदुराई की छोटी बुनाई इकाईयों में हतकरगों की ऐसी आवाज सधियों से गुंचती आ रही है, लेकिन अभी आवाज धीमी
00:25पड़ रही है
00:29ये कठोर सचाई का नतीजा है, बुनकरों की घंटो शारीरीक मेहनत, कम-कमाई और अनिश्चित भविश्य हतकरगा शल्प पर ग्रहन
00:38लगा रही है
00:46हम सारा दिन खरे होकर काम करते हैं, इससे हमारे घुटनों में बहुत दर्द होता है, दिन के अंत में
00:53हम पूरी तर्थक जाते हैं, लेकिन हमारा घर तभी चलता है जब हम काम करते हैं, जब तक हम में
01:00ताकत है, तब तक हम काम कर सकते हैं, उसके बाद मुश्किल हो जाएगी
01:07बुंकरों का कहना है कि इनी हालात को देखते हुए युवा पीड़ी इस शिल्प से दूर होती जा रही है
01:13ऐसे में इस शिल्प का भविश्य अंधकार में है
01:16एले हिंगलाडवन पटी रों हम यह काम बंद कर देंगे हमारे बच्चे कहीं और काम करने चले गए हैं हम
01:25आखरी पीडी होंगे यही हाल यहां के ज़्यातर घरों का है अभी यहां काम करने वाले ज़्यातर लोग 50 साल
01:33से उपर हैं
01:37This is the most important thing in the world.
02:06Mumbai, Odisha and Dura-Dura-Dura people are here to come.
02:10Sarkar to Madurai-Hat-Kargaa will be more than to give.
02:14Sarkar to Niyamit Rupi's will be more than to give.
02:18Sarkar to Sunaishit will be more than to give.
02:20Sarkar to Sunaishit will be more than to give us more than to give.
02:31Sarkar to Sunaishit will be more than to give.
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