00:05धन, सोभाग्य और सम्रिधी का पर्व अक्षय तृतिया
00:10जब हर शुरुवात मानी जाती है शुब
00:13यहां विश्वास जोड़ता है निवेश से
00:17जब हां अक्षय तृतिया हिंदू धर्म का एक ऐसा पर्व जिसे कभी नखत्म होने वाली सम्रिधी का प्रतीक माना जाता
00:24है
00:24अक्षय यानि जो कभी खत्म नहो और तृतिया यानि बैसाक मास की तीसरी ति थी
00:30साल दोजाथ 26 में हपर्व 19 अपरेल को मनाय जा रहा है और मानता है कि इस दिन किया गया
00:36कोई भी शुबकार या निवेश अक्षय फ़ल देता है
00:40यानि उसका लाब कभी स्तमाप नहीं होता है यही वज़ा है कि इस दिन लोग नए काम शुरू करते हैं
00:46दान करते हैं और सबसे खास सोना चांती खरिते हैं
00:51धार्मिक मानताओं के अनुसार यह वही दिन है जब भगवान विश्णू की आउतार परुसराम का जन्म हुआ था और महा
00:58भारत काल में इसी दिन भगवान कृष्ण ने पांडों को अक्षय पातर दिया था जो कभी खाली नहीं होता था
01:05ऐसे में कई परणालिक परसंग इस
01:21इस अपरेल तक रहेगी और यही पूरा समय सुना चादी खरिदने के लिए शुब माना जगया है खास तोर पर
01:28दस बच कर उन चास मिनट से दोपहर तक का समय बेहत शुब माना जाता है हलाकि मानता यह भी
01:34है कि पूरे दिन में कभी भी खरिदारी की जा सकती है क्योंकि यह
01:51खरिदा गया सोना घर में अस्थाई सुख और सम्रिद्धी लाता है और पीडियों तक धन बना रहता है यही कारण
02:00है कि हर साल इस दिन जुलरी मार्केट में भारी भीड देखने को मिलती है हलाकि समय के साथ इस
02:05परंपरामा में भी बदला वाया है जहां पहले लोग सिर्फ सो
02:20और जरूरत मंदों की मदद करना भी उतना ही महत्यपूर्ण माना गया है यह पर्व हमें सिर्फ धन कमाने का
02:26नहीं बलकि उसे सही दिशा में उपियोग करने का संदेश भी देता है आज के दोर में जब लोग इस
02:32दिन को निवेश के नजरीय से देखते हैं तब यह समझना �
02:35जरूरी है यह अक्षए तिर्थिया सिर्फ एक आर्थिक आउसर नहीं बलकि एक आधियात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा भी है जो हमें
02:42संतुलन सिखाती है विश्वास और ब्यवहार के बीच आस्था और आधरणुनिक्ता के बीच यही वज़ा है कि आक्षए तिर्थिय
02:49आज भी हर भारतिये के जीवन में उतनी ही खास है जितनी सद्यों पहले दी
02:55फिरहाल करिए बस इतना ही बाकी अप्डेटी बने रहिए वन इंडिया हंदी के साथ
02:59झाल झाल झाल
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