00:00उन्होंने कहा कि तुम एक अच्छे गीतकार बन जाओगे इस बात की तो मैं तुमको गारेंटी देता हूँ और तुम्हारे
00:09टेलेंट की वज़े से नहीं तुमको बोल रहा हूँ कि तुम बन जाओगे
00:12मैं इसलिए कह रहा हूँ कि तुम मेरे बेटे हो कम सका मेरा खुन इतना खराब तो नहीं हो सकता
00:18क्या बात है
00:19मगर अगर तुम पिता को चाहते हो कि पिता खुश हो
00:23तो मुझे लोग ये कहते हुए मिलने चाहिए
00:27कि अजान जी आपका बेटा तो लिखता अच्छा है
00:31मगर वो इनसान बहुत अच्छा है
00:33तो पूरी जिन्दकी मैं यही कोशिश करता रहा
00:37कि गीतकार तो अच्छा जो भी रहा बन गया
00:40मगर एक अच्छा इनसान बन जाओं
00:42और लोग जो मिले वो एटलिस एक कहें
00:45कि हाँ मेरे अंदर इनसानिया तभी जिन्दा है
00:47मेरे अंदर वो बदलाव नहीं आया है
00:49मेरे अंदर इतना काम करने के बाद भी
00:52वो घमंड नहीं आया वो अहम नहीं आया
00:55तो मेरे पिता तो वो रहे जिन्नोंने जिन्दकी के उपर
00:59इतनी खुशूरत पंक्ती लिखी
01:00आप सब को याद होगी बाई हाट होगी
01:03कि जिन्दगी तो बेवफा है
01:05एक दिन ठुकराएगी
01:06मौत महभूबा है अपने साथ
01:09लेके जाएगी
01:11मर के जीने की अदा जो दुनिया
01:13को सिखलाएगा वो मुकदर का
01:15सिखंदर जाने मन कहलाएगा
01:17तो वो लहू कहीं न कहीं
01:19तो मुझमें है और
01:20एक शेर सुना के
01:23जाना चाहता हूँ कि
01:26कहता है
01:27कि वो सामने है
01:31फिर भी दिखाई नहीं देता
01:34वो सामने है
01:37फिर भी दिखाई नहीं देता
01:39वो बोलता है
01:42फिर भी सुनाई नहीं देता
01:44वो सामने है फिर भी दिखाई नहीं देता
01:48वो बोलता है फिर भी सुनाई नहीं देता
01:52रहता है साथ साथ
01:55मगर हमसे जुदा है
01:57वही तो खुदा है
01:59वही तो खुदा है
02:01ये राज हम जिस दिन जान जाएंगे
02:04जीवन की सारी मुश्किलें खतम हो जाएंगी
02:07हम अनसुना करते हैं
02:09हम समझते नहीं
02:10सारी बातें हमारी आँखों के सामने हैं
02:13सब कुछ हम जानते हैं
02:15मगर हम उसको एवाइट करने की कोशिस करते हैं
02:19बिजय जी ने बड़ी देर से मुझे याद किया
02:22इस मंच पे और ये शिकायत में मुझे रहेगी उनसे
02:25मगर इसका मुआपजा मैं उनसे ले लूँगा इससे
02:29वो मुझे से बच के जा नहीं पाएंगे
02:31लोग मत मैं आये तमाम लोगों का
02:34मैं हिर्दे से आभार परकड़ करता हूँ
02:36ये समान दे के आपने बहुत
02:38मुझे पे यहसान किया है
02:40और मैं बहुत गरवान मी थी
02:42लोग कर रहा हूँ अपने आपको
02:43आप इस तरह के प्रयास करते रहें
02:46और आप अपनी पत्नी के नाम से
02:48इस समान समारो करते हैं हर साल
02:51और मैंने पिछला देखा
02:53कैसी कैसी महान विभूतियों को
02:55आपने समानित किया है
02:57हमको समान मिलने से
02:59और कुछ मिले ना मिले
03:01एक चीज जरूर मिलती है
03:03कि हमको अपनी जम्मेदारियों का
03:05इहसास होता है
03:07कि अगर समाज के वो लोग
03:09जो अपनी एक
03:11जगे बनाए हुए हैं
03:14समाचार पत्र
03:15लोकमत जैसा
03:16समाज न्यूज पेपर अगर आपको ढूट के समानित करता है
03:22तो आपको इतना जरूर समझना चाहिए
03:25कि आपका समाज के प्रतिकोई दायत तो भी है
03:28आप कम से कम ऐसे गाने ना लिखें
03:31जिससे समाज के किसी वर्ग को कहीं न कहीं ठेस पहुंचे
03:35तो हम इस बात का भी खयार रखेंगे
03:38और इस स्वर से प्रार्थना करेंगे
03:40कि आप इस सफर में बहुत दूर तक
03:42इसी तरह लोगों को समानित करते रहें
03:45और अपना सफर आगे बढ़ाएं
03:47धन्यवाद
03:48बहुत बहुत शुक्रिया समीर जी यहां आने के लिए
Comments